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Shamli News: गठबंधन की गांठ में उलझे टिकट के दावेदार, दल बदलने की तैयारी
Mon, 12 Oct 2026 01:10 AM IST
मेरठ ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, शामली
संवाद न्यूज एजेंसी, शामली
Updated Mon, 12 Oct 2026 01:10 AM IST
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शामली। विधानसभा चुनाव 2027 से पहले गठबंधन और टिकट के समीकरणों ने पश्चिमी यूपी की सियासत में हलचल बढ़ा दी है।
भाजपा-रालोद गठबंधन में सीटों के बंटवारे और सपा-कांग्रेस के संभावित गठबंधन को लेकर चर्चाओं के बीच टिकट के दावेदारों की धड़कनें तेज हैं। जाट बहुल सीटों पर दावेदारी को लेकर भाजपा और रालोद के नेताओं के बीच असमंजस की स्थिति है। जिले में कई नेता पहले ही दल बदल चुके हैं, जबकि कुछ अन्य नेताओं के भी नए सियासी ठिकाने तलाशने की चर्चाएं हैं।
शामली विधानसभा क्षेत्र के पूर्व विधायक राजेश्वर बंसल अपने बेटे अखिल बंसल के साथ करीब एक साल पहले सपा में शामिल हो गए थे। थानाभवन क्षेत्र में रालोद के पूर्व जिपं सदस्य मुकेश सैनी, रशीदगढ़ के पूर्व प्रधान देशपाल सैनी और उनके भतीजे राहुल सैनी भी सपा की सदस्यता ग्रहण कर चुके हैं। पूर्व सांसद अमीर आलम और उनके बेटे पूर्व विधायक नवाजिश आलम, जो पहले रालोद छोड़कर आजाद समाज पार्टी में शामिल हुए थे, करीब 15 दिन पहले कांग्रेस में चले गए।
जाट बहुल सीटों पर टिकट का पेच
पश्चिमी यूपी की राजनीति में जाट मतदाताओं की भूमिका अहम मानी जाती है। वर्ष 2022 के विधानसभा चुनाव में भाजपा ने 17 जाट प्रत्याशी उतारे थे, जिनमें से 10 जीते थे। अब रालोद के भाजपा के साथ होने से जाट बहुल सीटों पर टिकट वितरण को लेकर नए समीकरण बन रहे हैं। रालोद की दावेदारी बढ़ने की स्थिति में भाजपा के पुराने दावेदारों के सामने भी चुनौती आ सकती है।
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सपा के राष्ट्रीय प्रवक्ता प्रोफेसर सुधीर पंवार ने दावा किया कि सपा पीडीए के मुद्दे पर चुनाव लड़ेगी और मजबूत प्रत्याशियों को मैदान में उतारेगी। भाजपा जिलाध्यक्ष रामजीलाल का कहना है कि पार्टी मजबूती से विस चुनाव लड़ेगी।
भाजपा के वरिष्ठ नेता के पार्टी छोड़ने की चर्चा
शामली। राजनीतिक गलियारों में चर्चा है कि भाजपा के कुछ नेता, टिकट का भरोसा मिलने पर नवरात्र में सपा का दामन थाम सकते हैं। वहीं, शामली में भाजपा के एक वरिष्ठ नेता जल्द ही पार्टी को अलविदा कह सकते हैं। बताया जा रहा है कि उन्होंने सोशल मीडिया पर सपा के पूर्व प्रमुख के संबंध में एक पोस्ट भी साझा की है। हालांकि, संबंधित नेता ने फिलहाल पार्टी छोड़ने की बात से इन्कार किया है। उन्हें आगामी विधानसभा चुनाव में टिकट का दावेदार भी बताया जा रहा है।
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भाजपा-रालोद गठबंधन में सीटों के बंटवारे और सपा-कांग्रेस के संभावित गठबंधन को लेकर चर्चाओं के बीच टिकट के दावेदारों की धड़कनें तेज हैं। जाट बहुल सीटों पर दावेदारी को लेकर भाजपा और रालोद के नेताओं के बीच असमंजस की स्थिति है। जिले में कई नेता पहले ही दल बदल चुके हैं, जबकि कुछ अन्य नेताओं के भी नए सियासी ठिकाने तलाशने की चर्चाएं हैं।
शामली विधानसभा क्षेत्र के पूर्व विधायक राजेश्वर बंसल अपने बेटे अखिल बंसल के साथ करीब एक साल पहले सपा में शामिल हो गए थे। थानाभवन क्षेत्र में रालोद के पूर्व जिपं सदस्य मुकेश सैनी, रशीदगढ़ के पूर्व प्रधान देशपाल सैनी और उनके भतीजे राहुल सैनी भी सपा की सदस्यता ग्रहण कर चुके हैं। पूर्व सांसद अमीर आलम और उनके बेटे पूर्व विधायक नवाजिश आलम, जो पहले रालोद छोड़कर आजाद समाज पार्टी में शामिल हुए थे, करीब 15 दिन पहले कांग्रेस में चले गए।
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जाट बहुल सीटों पर टिकट का पेच
पश्चिमी यूपी की राजनीति में जाट मतदाताओं की भूमिका अहम मानी जाती है। वर्ष 2022 के विधानसभा चुनाव में भाजपा ने 17 जाट प्रत्याशी उतारे थे, जिनमें से 10 जीते थे। अब रालोद के भाजपा के साथ होने से जाट बहुल सीटों पर टिकट वितरण को लेकर नए समीकरण बन रहे हैं। रालोद की दावेदारी बढ़ने की स्थिति में भाजपा के पुराने दावेदारों के सामने भी चुनौती आ सकती है।
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सपा के राष्ट्रीय प्रवक्ता प्रोफेसर सुधीर पंवार ने दावा किया कि सपा पीडीए के मुद्दे पर चुनाव लड़ेगी और मजबूत प्रत्याशियों को मैदान में उतारेगी। भाजपा जिलाध्यक्ष रामजीलाल का कहना है कि पार्टी मजबूती से विस चुनाव लड़ेगी।
भाजपा के वरिष्ठ नेता के पार्टी छोड़ने की चर्चा
शामली। राजनीतिक गलियारों में चर्चा है कि भाजपा के कुछ नेता, टिकट का भरोसा मिलने पर नवरात्र में सपा का दामन थाम सकते हैं। वहीं, शामली में भाजपा के एक वरिष्ठ नेता जल्द ही पार्टी को अलविदा कह सकते हैं। बताया जा रहा है कि उन्होंने सोशल मीडिया पर सपा के पूर्व प्रमुख के संबंध में एक पोस्ट भी साझा की है। हालांकि, संबंधित नेता ने फिलहाल पार्टी छोड़ने की बात से इन्कार किया है। उन्हें आगामी विधानसभा चुनाव में टिकट का दावेदार भी बताया जा रहा है।