UP: सामने आए चौंकाने वाले मामले, ठगों ने दिया दर्द, उपभोक्ता आयोग बना हमदर्द, कभी न करना ऐसी गलती
Shamli News : पीड़ितों के ठगे गए रुपये वापस दिलाने में आयोग ने अहम भूमिका निभाई है। पढ़िए अमर उजाला की यह खास रिपोर्ट।
विस्तार
ये खबर उन साइबर ठगी के पीड़ितों के लिए भी जरूरी है, जो बैंक या फिर बीमा कंपनी की गलतियों के कारण ठगी का शिकार होने के बाद थानों या फिर साइबर सेल, बैंक, बीमा कंपनियों के अधिकारियों के चक्कर काटने को मजबूर हैं। जिला उपभोक्ता प्रतितोष आयोग के अधिकारी ऐसे पीड़ितों को इंसाफ दिलाने में अहम भूमिका निभा रहे हैं।
हाल ही में कई पीड़ितों के ठगे गए रुपये वापस दिलाने में आयोग ने अहम भूमिका निभाई है। पिछले कुछ समय से जिला उपभोक्ता विवाद प्रतितोष आयोग में उपभोक्ताओं, पीड़ितों का विश्वास भी बढ़ा है।
चंद मामलों की बानगी...
केस-1
शामली के रहने वाले नौकरी पेशा राहुल का शहर के बैंक में खाता है। 27 जून 2020 को उसके पास एक मैसेज आया था। जिसमें उसके खाते से 65 हजार रुपये निकाल लिए गए। जबकि उसकी बैंक लिमिट मात्र 25 हजार रुपये थी। पीड़ित ने तुरंत ही बैंक से संपर्क किया। अपना खाता भी बंद करा दिया। साथ ही पुलिस से भी शिकायत कर दी। पीड़ित का कहना था कि उसने किसी को अपना ओटीपी भी नहीं बताया था। इसके बावजूद खाते से रकम साफ कर दी गई। जबकि खाते से चौबीस घंटे में 25 हजार रुपये ही निकाले जा सकते है। बैंक ने इस मामले में पूरी तरह से पल्ला झाड़ लिया और कहा कि टुकडों में रकम खातों से निकाली गई है। पीड़ित ने जिला उपभोक्ता प्रतितोष आयोग में वाद दर्ज कराया। उपभोक्ता अदालत ने बैंक को दोषी मानते हुए आदेश दिया कि एक माह के भीतर उपभोक्ता को 65 हजार रुपये तथा पांच हजार का जुर्माना जमा कराएं।
केस-2
कांधला के रहने वाले मनीष कुमार ने बताया कि उसका कस्बे की बैंक शाखा में खाता है। एक साल पूर्व ही उसके खाते से दो बार में 97 हजार रुपये निकाल लिए गए जबकि उसने किसी को ओटीपी भी नहीं बताया था। पीड़ित ने पुलिस से लेकर साइबर सेल से मामले की शिकायत की मगर कोई सुनवाई नहीं की गई। पीड़ित ने उपभोक्ता फोरम का दरवाजा खटखटाया।
केस-3
काकानगर की रहने वाली सीमा रानी ने 11 जून 2021 को जिला उपभोक्ता विवाद प्रतितोष आयोग में वाद दायर किया। बताया कि उनका खाता भारतीय स्टेट बैंक में हैं। उसके सिविल स्कोर को देखते हुए उसके पास कॉल की गई तथा कहा कि क्रेडिट कार्ड ले लें। उसने क्रेडिट कार्ड ले लिया। मगर उसका प्रयोग नहीं किया। मगर इसके बाद उनके खाते से 39 हजार 999 रुपये काट लिए गए। जबकि उन्होंने किसी को अपना ओटीपी नंबर भी नहीं बताया था। बैंक और बीमा कंपनी से शिकायत की तो उन्होंने कोई मदद नहीं की। पुलिस भी मदद का आश्वासन देती रही। जिला उपभोक्ता आयोग के अध्यक्ष हेमंत कुमार गुप्ता, महिला सदस्य अमरजीत कौर ने इस मामले की सुनवाई की।
बैंक और बीमा कंपनी को दोषी मानते हुए पीड़िता के नुकसान की पूर्ति के साथ छह प्रतिशत ब्याज चुकाने के आदेश दिए। साथ ही पचास हजार का जुर्माना भी लगाया गया। यही नहीं पीडि़ता को हुए मानसिक, आर्थिक और शारीरिक क्षति के लिए 30 हजार रुपये, वाद व्यय के लिए 10 हजार रुपये अदा करने को कहा। ये तीन मामले तो बानगी भर मात्र है। 20 से अधिक मामलों में आयोग ने पीड़ितों को इंसाफ दिलाने में अहम भूमिका निभाई है। 14 साइबर क्राइम संबंधी मामलों में आयोग जल्द फैसला सुनाने वाला है।
इन्होंने कहा...
साइबर ठगी के कई मामलों में पीड़ितों को आयोग ने इंसाफ दिलाने में अहम भूमिका निभाई है। कई अन्य मामलों की जांच की जा रही है। जल्द ही फैसला सुनाया जाएगा। प्रयास रहता है कि उपभोक्ता को इंसाफ कम से कम समय में मिले। - हेमंत कुमार गुप्ता, अध्यक्ष, जिला उपभोक्ता विवाद प्रतितोष आयोग शामली
बैंक और बीमा क्लेम कंपनी पर क्लेम करने के लिए यह करें उपभोक्ता-
- पीड़ितों को चाहिए कि वे बैंक में समय से शिकायत करें।
- साइबर अपराध होने पर पीड़ित को बैंक को शिकायत देकर उसकी रसीद लेनी चाहिए।
- खाते से धन निकलने पर रोक लगाने का अनुरोध करना चाहिए।
- संबंधित बैंक से इस आशय का भी अनुरोध किया जाना चाहिए कि वह निकाली गई राशि की पूरी तरह से जांच करें।
- कुछ दिन बाद बैंक या फिर अन्य संस्था कोई कार्रवाई नहीं करती है तो पुन: पत्र भेजकर जांच की मांग करें।
- जांच पूर्ण होने या न होने के बाद ही पीड़ित व्यक्ति संबंधित दस्तावेजों के साथ परिवाद जिला उपभोक्ता विवाद प्रतितोष आयोग में दर्ज कराए।