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धड़कनें तेज, कौन बनेगा सरताज
शामली, अमर उजाला ब्यूरो
Updated Sat, 11 Mar 2017 12:15 AM IST
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चुनाव
- फोटो : file
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शामली। नतीजों को लेकर एक महीने से चल रही अटकलों पर आज विराम लग जाएगा। जनता जनार्दन ने अपना वोट देकर किसे सरताज बनाया और किसे नकार दिया, उसका फैसला ईवीएम से वोटों की गिनती के साथ सामने आ जाएगा।
विधानसभा चुनाव के लिए शामली जिले में 11 फरवरी को मतदान हुआ था। उसके बाद से चुनाव नतीजों को लेकर कयासों का दौर चल रहा था। जिले की कैराना, थानाभवन और शामली सीट पर हर कोई अपने हिसाब से आंकड़े बताकर हार जीत के समीकरण बना रहा था, तो चुनाव लड़ने वाले प्रत्याशियों और समर्थकों द्वारा भी आंकड़े फिट किए जा रहे थे। एक महीना इंतजार के बाद आखिर 11 मार्च को वह घड़ी सामने आ गई, जब हर किसी के आंकड़ों की सही तस्वीर सामने होगी।
वहीं, एक्जिट पोलों ने जिस तरह उत्तर प्रदेश में सभी राजनीतिक दलों के हार जीत के आंकड़ों का अनुमान पेश किया है, उसके साथ ही चुनाव परिणामों को लेकर सट्टे का बाजार भी गरम हो गया है। कैराना सीट पर सट्टे के बाजार में नाहिद हसन को मजबूती बताई जा रही है, तो थानाभवन सीट पर बसपा के राव अब्दुल वारिस को। वहीं, शामली सीट पर भाजपा प्रत्याशी को बढ़त दिखाई जा रही है।
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सीटवार नतीजों के आसार
कैराना : विधानसभा सीट कैराना पर भाजपा प्रत्याशी मृगांका सिंह और सपा प्रत्याशी नाहिद हसन के बीच सीधा मुकाबला है। क्षेत्र में जिस तरह की बातें हो रही हैं, उससे तय है कि विजयश्री इन दोनों में से ही किसी एक का हाथ लगेगी। देखना यह होगा कि इनमें हार और जीत का अंतर कितना रहता है। कैराना सीट पर कमल खिलता है, या फिर साइकिल की रफ्तार सबको पछाड़ेगी, उसका फैसला मतगणना से हो जाएगा।
थानाभवन : इस सीट पर भाजपा के सुरेश राणा और बसपा के राव अब्दुल वारिस के बीच अहम मुकाबला है। रालोद से जावेद राव और सपा से डॉ. सुधीर पंवार ने चुनाव लड़ा, लेकिन जिस तरह की चर्चाएं चल रही हैं, उसमें इतना तय माना जा रहा है कि भाजपा, बसपा में से ही एक को जीत मिलनी तय है।
शामली : इस सीट पर मतदान और उससे पूर्व त्रिकोणीय मुकाबला बना रहा। शहर में वोटरों के उत्साह और मुस्लिम मतदाताओं की संख्या कम होने के कारण भाजपा को मजबूत माना जा रहा है। वहीं, कांग्रेस-सपा गठबंधन के पंकज मलिक, रालोद के बिजेंद्र मलिक तथा निर्दलीय प्रत्याशी मनीष चौहान भी पूरी मजबूती से चुनाव लड़े, जिसके चलते यहां मुकाबला कांटे का हो गया। ऐसे में चुनाव नतीजों को लेकर तस्वीर साफ नहीं है। इस सीट पर चौंकाने वाले परिणाम भी सामने आ सकते हैं।
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विधानसभा चुनाव के लिए शामली जिले में 11 फरवरी को मतदान हुआ था। उसके बाद से चुनाव नतीजों को लेकर कयासों का दौर चल रहा था। जिले की कैराना, थानाभवन और शामली सीट पर हर कोई अपने हिसाब से आंकड़े बताकर हार जीत के समीकरण बना रहा था, तो चुनाव लड़ने वाले प्रत्याशियों और समर्थकों द्वारा भी आंकड़े फिट किए जा रहे थे। एक महीना इंतजार के बाद आखिर 11 मार्च को वह घड़ी सामने आ गई, जब हर किसी के आंकड़ों की सही तस्वीर सामने होगी।
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वहीं, एक्जिट पोलों ने जिस तरह उत्तर प्रदेश में सभी राजनीतिक दलों के हार जीत के आंकड़ों का अनुमान पेश किया है, उसके साथ ही चुनाव परिणामों को लेकर सट्टे का बाजार भी गरम हो गया है। कैराना सीट पर सट्टे के बाजार में नाहिद हसन को मजबूती बताई जा रही है, तो थानाभवन सीट पर बसपा के राव अब्दुल वारिस को। वहीं, शामली सीट पर भाजपा प्रत्याशी को बढ़त दिखाई जा रही है।
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सीटवार नतीजों के आसार
कैराना : विधानसभा सीट कैराना पर भाजपा प्रत्याशी मृगांका सिंह और सपा प्रत्याशी नाहिद हसन के बीच सीधा मुकाबला है। क्षेत्र में जिस तरह की बातें हो रही हैं, उससे तय है कि विजयश्री इन दोनों में से ही किसी एक का हाथ लगेगी। देखना यह होगा कि इनमें हार और जीत का अंतर कितना रहता है। कैराना सीट पर कमल खिलता है, या फिर साइकिल की रफ्तार सबको पछाड़ेगी, उसका फैसला मतगणना से हो जाएगा।
थानाभवन : इस सीट पर भाजपा के सुरेश राणा और बसपा के राव अब्दुल वारिस के बीच अहम मुकाबला है। रालोद से जावेद राव और सपा से डॉ. सुधीर पंवार ने चुनाव लड़ा, लेकिन जिस तरह की चर्चाएं चल रही हैं, उसमें इतना तय माना जा रहा है कि भाजपा, बसपा में से ही एक को जीत मिलनी तय है।
शामली : इस सीट पर मतदान और उससे पूर्व त्रिकोणीय मुकाबला बना रहा। शहर में वोटरों के उत्साह और मुस्लिम मतदाताओं की संख्या कम होने के कारण भाजपा को मजबूत माना जा रहा है। वहीं, कांग्रेस-सपा गठबंधन के पंकज मलिक, रालोद के बिजेंद्र मलिक तथा निर्दलीय प्रत्याशी मनीष चौहान भी पूरी मजबूती से चुनाव लड़े, जिसके चलते यहां मुकाबला कांटे का हो गया। ऐसे में चुनाव नतीजों को लेकर तस्वीर साफ नहीं है। इस सीट पर चौंकाने वाले परिणाम भी सामने आ सकते हैं।