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Shamli News: इस बार सप्ताह नहीं ठीक होने में पखवाडा लगा रहा आई फ्लू

Mon, 24 Jul 2023 11:35 PM IST
Meerut Bureau मेरठ ब्यूरो
Updated Mon, 24 Jul 2023 11:35 PM IST
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This time the flu is taking a fortnight to recover, not a week
अमर उजाला पड़ताल...
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- आंखों में हेमरेज के मरीज भी बढ़े, वायरस के नए स्ट्रेन का शक
- शामली में रोज 400 से अधिक मरीज करा रहे उपचार
- एडीनो वायरस के किसी नए स्ट्रेन की भी आशंका
महबूब अली
शामली। इस बार जिले के विभिन्न स्थानों पर आई फ्लू यानि कंजेक्टिवाइटिस का संक्रमण तेजी से बढ़ रहा है। बच्चों से लेकर बड़ों और खासकर स्कूली बच्चाें को फ्लू अपनी चपेट में ले रहा है। इस बार हैरत करने वाली बात यह है कि 5 से 7 दिन में ठीक होने के बजाय 10 से 12 दिन तक आई फ्लू लोगों को अपनी चपेट में ले रहा है। विशेषज्ञों का कहना है कि इस बार एडीनो वायरस के किसी नए स्ट्रेन की भी आशंका जताई जा रही है। यही नहीं आंखों में हेमरेज के भी अधिक केस सामने आ रहे हैं। चिकित्सक लोगों को बिना घबराए सावधानी बरतने की सलाह दे रहे हैं।
12 से लेकर 15 दिन तक ले रहा चपेट में

नेत्र परीक्षण अधिकारी अरविंद नरुला ने बताया कि इस बार देखने में आ रहा है कि 5 से 7 दिन के बजाए 12 से लेकर 15 दिन तक भी वायरस लोगों की आंखों से नहीं जा पा रहा है। अभी तक देखने में आया है कि पहले आंखों में बैक्टीरियल हमला था। इस बार एडीनो वायरस के किसी नए स्ट्रेन की भी आशंका है। हालांकि, घबराने वाली बात नहीं है। सभी को उपचार देकर ठीक किया जा रहा है।
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संक्रमण अधिक जटिल, ज्यादा लापरवाही से आंखों की रोशनी जाने का भी खतरा
विशेषज्ञों का कहना है कि इस बार संक्रमण अधिक जटिल है और ठीक इलाज नहीं होने पर प्री सेप्टल सेल्युलाइटिस भी हो सकता है। इसमें चोरों तरफ टि्श्यू हो जाता है। संक्रमण नियंत्रित नहीं करने पर आंखों की रोशनी जाने का भी खतरा बना रहता है। अभी तक आंखों की एलर्जी के मरीज अधिक आ रहे हैं।
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तेजी से फैल रहा एडीनो वायरस का नया स्ट्रेन
अरविंद ने बताया कि आंख के सफेद हिस्से पर एक झिल्ली होती है। इसे कंजंक्टाइवा कहते हैं। आंखों की झिल्ली में एडीनो वायरस से संक्रमण हो रहा है। इस बार एडीनो वायरस का नया स्ट्रेन लग रहा है। जो खतरनाक भी नजर आ रहा है। हेमरेज के भी मरीज पहुंच रहे हैं।


विशेषज्ञ यह मानते हैं आई फ्लू फैलने का प्रमुख कारण
नेत्र रोग परीक्षण अधिकारी रामकुमार, अरविंद का कहना है कि बारिश के मौसम के बाद उमस में यह वायरस तेजी से फैलता है। बाढ़ के पानी के कारण भी लोग इसकी चपेट में आए हैं। इसके अलावा कुछ लोग जो कांवड़ लेकर पहुंचे उनसे भी बीमारी फैली है।
ओपीडी में एक ही दिन में पहुंचे 180 मरीज

जिला अस्पताल के नेत्र परीक्षण अधिकारी राजकुमार ने बताया कि उन्होंने सोमवार को 235 की ओपीड़ी की, जिसमें 180 मरीज आई फ्लू के थे। कुछ मरीज आंखों में हेमरेज के भी आ रहे हैं। हालांकि, हेमरेज में घबराने वाली बात नहीं होती है। आंखें को ज्यादा मसलने से यह हो जाती है, जिसे उपचार से आसानी से ठीक किया जा रहा है।

सीएचसी में पहुंचे 200 मरीज

सीएचसी की नेत्र परीक्षण अधिकारी रीतू रानी ने बताया कि सोमवार को 200 आई फ्लू से ग्रस्त मरीज पहुंचे। बच्चों की संख्या अधिक है। पिछले एक सप्ताह से मरीजों की संख्या बढ़ी है।



किस तरह परेशान हो रहे मरीज

केस 1

: आदर्श मंडी के रहने वाले मनोज ने बताया कि 12 दिन पहले वह आई फ्लू की चपेट में आया था मगर अभी तक ठीक नहीं हो सका है। आंखों में दर्द भी रहता है। अब सीएचसी में उपचार कराने पहुंचा है।

केस - 2

शहर की रहने वाली अर्पिता ने बताया कि दो दिन से वह आई फ्लू से ग्रस्त है। आंखों में जलन के कारण परेशानी हो रही है। सीएचसी में उपचार करा रही हूं।

केस- 3

राजेश ने बताया कि वह 12 दिन से फ्लू से ग्रस्त है। आंखों में जलन के कारण ज्यादा परेशानी हो रही है।


लक्षण:
-आंखों में दर्द के साथ लाल होना।

- आंखों में पानी आना।

- तेज खारिश होना।

- धुंधला दिखाई देना।

- आंखों में जलन होना।

- पलकों के बाल चिपकना।

- आंखों में कचरा होने जैसा महसूस देना।


इन बातों का ध्यान रखें
अपनी आंखों को अपने हाथ से न छुएं, जब भी जरूरी हो अपने हाथों को धोएं। अपनी निजी चीजों जैसे तौलिया, तकिया, रूमाल, आई कॉस्मेटिक्स (आंखों के मेकअप) को किसी से साझा न करें। अपने रूमाल, तकिए के कवर, तौलिए को रोज धोएं। आंखों में हाथ लगाने के बाद दरवाजों के हैंडिल, घर में सभी के द्वारा छुए जाने वाले सामानों को न छुएं। इससे संक्रमण दूसरे व्यक्ति में फैल सकता है। बच्चों को स्कूल न भेजें, जिससे दूसरे बच्चों में यह रोग फैलने से रोका जा सके।


लापरवाही भी नहीं ठीक होने दे रही बीमारी
विशेषज्ञ राजकुमार के अनुसार, देखने में आया है कि कुछ लोग आई फ्लू से ग्रस्त होने के बाद उपचार करना मुनासिब नहीं समझते हैं। जिसके कारण बीमारी को ठीक होने में समय लगता है। समय पर उपचार शुरू करना भी बहुत जरूरी है।
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