{"_id":"5d98e0778ebc3e93b532c9b3","slug":"there-is-a-facility-for-hepatitis-screening-but-no-cure-shamli-news-mrt4470090184","type":"story","status":"publish","title_hn":"ये कैसा जनपद, हेपेटाइटिस की जांच की सुविधा पर इलाज नहीं मिलेगा","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
ये कैसा जनपद, हेपेटाइटिस की जांच की सुविधा पर इलाज नहीं मिलेगा
विज्ञापन
There is a facility for hepatitis screening, but no cure
शामली। जनपद में हेपेटाइटिस बी और सी के रोगी हर माह सामने आ रहे हैं, लेकिन जनपद में इन खतरनाक रोगों की जांच जांच की सुविधा है, लेकिन इलाज की कोई सुविधा नहीं है। इस तरह के मरीजों को मुजफ्फरनगर या मेरठ रेफर किया जाता है।
जनपद स्वास्थ्य सेवाओं में पिछड़ा हुआ है। यहां पर मरीजों का प्रारंभिक जांच और इलाज कर दूसरे शहरों के उच्चीकृत सेंटरों को रेफर कर दिया जाता है। इसकी मुख्य वजह यहां जिला अस्पताल का शुरू न होना है। यहां न तो विशेषज्ञ चिकित्सक हैं और न ही ब्लड बैंक आदि की सुविधा है। जनपद में हेपेटाइटिस बी और सी के मरीज हर माह सामने आ रहे हैं, लेकिन उनके इलाज की सुविधा नहीं है। सीएचसी शामली में इन रोगों की केवल जांच की जाती है। जांच में पॉजिटिव मिलने पर मरीजों को मुजफ्फरनगर या मेरठ रेफर कर दिया जाता है। विभागीय आंकड़ों के मुताबिक सितंबर माह में सीएचसी पर हेपेटाइटिस के संभावित 57 मरीजों की जांच की गई, जिनमें हेपेटाइटिस सी के नौ और हेपेटाइटिस बी के चार मरीज पॉजिटिव मिले। इनमें अधिकतर मरीज कैराना और कांधला क्षेत्र के बताए गए हैं। चिकित्सकों के मुताबिक अगर समय पर उपचार न कराया जाए तो ये जानलेवा हो सकते हैं।
हेपेटाइटिस बी-
चिकित्सकों के मुताबिक हेपेटाइटिस बी एक संक्रामक बीमारी है। इस बीमारी के कारण लीवर में सूजन और जलन पैदा होती है। हेपेटाइटिस के वायरसों में सबसे खतरनाक वायरस बी माना जाता है। यह वायरस एक व्यक्ति से दूसरे व्यक्ति में संक्रमित सुईं या असुरक्षित यौन संबंधों की वजह से फैल सकता है। यह वायरस शरीर से पूरी तरह खत्म नहीं होता, लेकिन दवाइयों के माध्यम से कंट्रोल किया जा सकता है।
विज्ञापन
लक्षण- जोड़ों में दर्द, पेट में दर्द, उल्टी और कमजोरी का अहसास होना, हमेशा थकान लगना। स्किन का रंग पीला होना और आंखों का सफेद हिस्सा भी पीला होना। बुखार होना और यूरिन का गाढ़ा होना, भूख कम लगना।
बचाव- फास्ट फूड का सेवन नहीं करें, कार्बोहाइड्रेट वाली चीजों से परहेज करना, मीठे पदार्थ से दूरी बनाकर रखना।
इनका सेवन करें- दिन में दो से तीन बार कॉफी पीना, फल और सब्जी का अधिक मात्रा में सेवन करना, प्रोटीन युक्त आहार लेना, अधिक पानी पीना चाहिए।
हेपेटाइटिस सी
हेपेटाइटिस सी संक्रामक और लीवर से जुड़ी बीमारी है, जो हेपेटाइटिस सी वायरस एचसीवी नाम के विषाणु से संक्रमित होने पर पैदा होती है। यह संक्रमण लीवर को क्षतिग्रस्त कर सकता है। हालांकि शुरुआती संक्रमण के बाद इसके लक्षणों को पहचानना कठिन होता है। इससे लीवर कैंसर होने का भी खतरा रहता है। यह प्रमुख रूप से लीवर कमजोर होने की स्थिति में होता है। लीवर के कमजोर और खराब होने का कारण अत्यधिक तेल मसाले युक्त भोजन करना, चटपटे एवं मिर्च मसालेयुक्त व्यंजन, बेसन एवं मैदे से बने व्यंजनों का सेवन और वनस्पति घी का अधिक प्रयोग करना, धूम्रपान, नशा या मांसाहार का सेवन करने से लीवर पर सूजन आने की आशंका रहती है।
लक्षण- भूख न लगना या बेहद कम भूख लगना, सामान्य रहते हुए भी थकान महसूस होना, पेट में यकृत की तरफ से दर्द महसूस होना, पीलिया होना भी एक लक्षण हो सकता है। हल्का बुखार होना एवं खुजली होना।
हेपेटाइटिस बी और सी के संभावित मरीजों की सीएचसी शामली में जांच की जाती है। जांच में जो मरीज पॉजिटिव पाए जाते हैं, उन्हें मेरठ या मुजफ्फरनगर रेफर किया जाता है। यहां हेपेटाइटिस बी व सी के उपचार की सुविधा नहीं है।
- डा. श्रीकांत, एसीएमओ एवं नोडल अधिकारी संचारी रोग।
विज्ञापन
जनपद स्वास्थ्य सेवाओं में पिछड़ा हुआ है। यहां पर मरीजों का प्रारंभिक जांच और इलाज कर दूसरे शहरों के उच्चीकृत सेंटरों को रेफर कर दिया जाता है। इसकी मुख्य वजह यहां जिला अस्पताल का शुरू न होना है। यहां न तो विशेषज्ञ चिकित्सक हैं और न ही ब्लड बैंक आदि की सुविधा है। जनपद में हेपेटाइटिस बी और सी के मरीज हर माह सामने आ रहे हैं, लेकिन उनके इलाज की सुविधा नहीं है। सीएचसी शामली में इन रोगों की केवल जांच की जाती है। जांच में पॉजिटिव मिलने पर मरीजों को मुजफ्फरनगर या मेरठ रेफर कर दिया जाता है। विभागीय आंकड़ों के मुताबिक सितंबर माह में सीएचसी पर हेपेटाइटिस के संभावित 57 मरीजों की जांच की गई, जिनमें हेपेटाइटिस सी के नौ और हेपेटाइटिस बी के चार मरीज पॉजिटिव मिले। इनमें अधिकतर मरीज कैराना और कांधला क्षेत्र के बताए गए हैं। चिकित्सकों के मुताबिक अगर समय पर उपचार न कराया जाए तो ये जानलेवा हो सकते हैं।
विज्ञापन
हेपेटाइटिस बी-
चिकित्सकों के मुताबिक हेपेटाइटिस बी एक संक्रामक बीमारी है। इस बीमारी के कारण लीवर में सूजन और जलन पैदा होती है। हेपेटाइटिस के वायरसों में सबसे खतरनाक वायरस बी माना जाता है। यह वायरस एक व्यक्ति से दूसरे व्यक्ति में संक्रमित सुईं या असुरक्षित यौन संबंधों की वजह से फैल सकता है। यह वायरस शरीर से पूरी तरह खत्म नहीं होता, लेकिन दवाइयों के माध्यम से कंट्रोल किया जा सकता है।
विज्ञापन
लक्षण- जोड़ों में दर्द, पेट में दर्द, उल्टी और कमजोरी का अहसास होना, हमेशा थकान लगना। स्किन का रंग पीला होना और आंखों का सफेद हिस्सा भी पीला होना। बुखार होना और यूरिन का गाढ़ा होना, भूख कम लगना।
बचाव- फास्ट फूड का सेवन नहीं करें, कार्बोहाइड्रेट वाली चीजों से परहेज करना, मीठे पदार्थ से दूरी बनाकर रखना।
इनका सेवन करें- दिन में दो से तीन बार कॉफी पीना, फल और सब्जी का अधिक मात्रा में सेवन करना, प्रोटीन युक्त आहार लेना, अधिक पानी पीना चाहिए।
हेपेटाइटिस सी
हेपेटाइटिस सी संक्रामक और लीवर से जुड़ी बीमारी है, जो हेपेटाइटिस सी वायरस एचसीवी नाम के विषाणु से संक्रमित होने पर पैदा होती है। यह संक्रमण लीवर को क्षतिग्रस्त कर सकता है। हालांकि शुरुआती संक्रमण के बाद इसके लक्षणों को पहचानना कठिन होता है। इससे लीवर कैंसर होने का भी खतरा रहता है। यह प्रमुख रूप से लीवर कमजोर होने की स्थिति में होता है। लीवर के कमजोर और खराब होने का कारण अत्यधिक तेल मसाले युक्त भोजन करना, चटपटे एवं मिर्च मसालेयुक्त व्यंजन, बेसन एवं मैदे से बने व्यंजनों का सेवन और वनस्पति घी का अधिक प्रयोग करना, धूम्रपान, नशा या मांसाहार का सेवन करने से लीवर पर सूजन आने की आशंका रहती है।
लक्षण- भूख न लगना या बेहद कम भूख लगना, सामान्य रहते हुए भी थकान महसूस होना, पेट में यकृत की तरफ से दर्द महसूस होना, पीलिया होना भी एक लक्षण हो सकता है। हल्का बुखार होना एवं खुजली होना।
हेपेटाइटिस बी और सी के संभावित मरीजों की सीएचसी शामली में जांच की जाती है। जांच में जो मरीज पॉजिटिव पाए जाते हैं, उन्हें मेरठ या मुजफ्फरनगर रेफर किया जाता है। यहां हेपेटाइटिस बी व सी के उपचार की सुविधा नहीं है।
- डा. श्रीकांत, एसीएमओ एवं नोडल अधिकारी संचारी रोग।