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दिलों की डोर राखी से बंधी : विदेशों तक उड़ान भर रहीं बहनों की भावनाएं
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विदेश में राखी भेजने वाली खबर से संबंधित फोटो- कस्बा कैराना की इशिता कैलिफोर्निया में पती के
- फोटो : सरयू का दुग्धाभिषेक करतीं अपर्णा यादव।
शामली। रक्षाबंधन सिर्फ एक पर्व नहीं, भावनाओं की वो डोर है जो हजारों किलोमीटर की दूरी को मिटा देती है।
भाई-बहन का ये पवित्र रिश्ता अब सरहदों का मोहताज नहीं रहा। शामली की कई बहनों ने साबित कर दिया कि सच्चा प्रेम दूरी नहीं देखता वो तो बस दिल से दिल तक पहुंचता है।
कैराना की बेटी इशिता चंदन, जो वर्तमान में अमेरिका के कैलिफोर्निया शहर में कार्यरत हैं, ने अपने भाइयों नमन जैन और ऋषभ के लिए वहां से विशेष राखी भेजी। इस राखी को भारत पहुंचाने में करीब 8000 रुपये का खर्च आया, लेकिन इशिता के लिए भाइयों की कलाई पर राखी बांधना हर कीमत से बढ़कर था। उनका यह प्रयास न केवल परिवार बल्कि पूरे क्षेत्र के लिए प्रेरणास्रोत बन गया है।
वहीं गांव कुड़ाना की बहन स्वाति ने अपने दो भाइयों विकास और सुभाष (जो चीन के जिनान शहर में योग शिक्षक हैं) के लिए लगभग 5000 रुपये खर्च कर राखी भिजवाईं। उनका कहना है भले ही भाई दूर हैं, पर राखी तो उनके पास ही पहुंचेगी।
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इसी गांव के अमन कुमार, जो ताइवान की राजधानी ताइपे में योग शिक्षक हैं, को भी उनकी बहन रेनू ने 4000 रुपये खर्च कर राखी भेजी है। रेनू ने बताया कि, हर साल की तरह इस बार भी भाई की कलाई खाली नहीं रहेगी, चाहे वो दुनिया के किसी भी कोने में हो। इन बहनों की भावना और उनके समर्पण ने यह साबित कर दिया कि भारतीय संस्कृति की जड़ें चाहे कितनी भी दूर चली जाएं, लेकिन भावनाएं वही रहती हैं मजबूत, अटूट और प्रेरणादायक। (संवाद)
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भाई-बहन का ये पवित्र रिश्ता अब सरहदों का मोहताज नहीं रहा। शामली की कई बहनों ने साबित कर दिया कि सच्चा प्रेम दूरी नहीं देखता वो तो बस दिल से दिल तक पहुंचता है।
कैराना की बेटी इशिता चंदन, जो वर्तमान में अमेरिका के कैलिफोर्निया शहर में कार्यरत हैं, ने अपने भाइयों नमन जैन और ऋषभ के लिए वहां से विशेष राखी भेजी। इस राखी को भारत पहुंचाने में करीब 8000 रुपये का खर्च आया, लेकिन इशिता के लिए भाइयों की कलाई पर राखी बांधना हर कीमत से बढ़कर था। उनका यह प्रयास न केवल परिवार बल्कि पूरे क्षेत्र के लिए प्रेरणास्रोत बन गया है।
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वहीं गांव कुड़ाना की बहन स्वाति ने अपने दो भाइयों विकास और सुभाष (जो चीन के जिनान शहर में योग शिक्षक हैं) के लिए लगभग 5000 रुपये खर्च कर राखी भिजवाईं। उनका कहना है भले ही भाई दूर हैं, पर राखी तो उनके पास ही पहुंचेगी।
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इसी गांव के अमन कुमार, जो ताइवान की राजधानी ताइपे में योग शिक्षक हैं, को भी उनकी बहन रेनू ने 4000 रुपये खर्च कर राखी भेजी है। रेनू ने बताया कि, हर साल की तरह इस बार भी भाई की कलाई खाली नहीं रहेगी, चाहे वो दुनिया के किसी भी कोने में हो। इन बहनों की भावना और उनके समर्पण ने यह साबित कर दिया कि भारतीय संस्कृति की जड़ें चाहे कितनी भी दूर चली जाएं, लेकिन भावनाएं वही रहती हैं मजबूत, अटूट और प्रेरणादायक। (संवाद)

विदेश में राखी भेजने वाली खबर से संबंधित फोटो- कस्बा कैराना की इशिता कैलिफोर्निया में पती के - फोटो : सरयू का दुग्धाभिषेक करतीं अपर्णा यादव।