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जुलाई में थमी कोरोना की रफ्तार, सावधानी बरतने की अभी जरूरत
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जुलाई में थमी कोरोना की रफ्तार, लेकिन खतरा टला नहीं
शामली। कोरोना की दूसरी लहर की रफ्तार जुलाई माह में थम गई, लेकिन इस महीने कोरोना की तीसरी लहर की आशंका जताए जाने के कारण लोगों को खास सावधानी बरतने की जरूरत है। लोग जिस तरह से कोरोना को लेकर बेपरवाह बने हुए हैं, वह जिंदगी पर भारी पड़ सकती है।
कोरोना की दूसरी लहर अप्रैल व मई के महीने में पीक पर रहा। एक दिन में कोरोना के 687 केस मिलने का रिकार्ड भी बना था। जून माह में कोरोना की दूसरी लहर की रफ्तार धीमी पड़नी शुरू हुई थी। 170 केस कोरोना के मिले और तीन लोगों की मौत हुई। जुलाई माह में कोरोना की रफ्तार पर ब्रेक लगा। इस महीने में कोरोना के 12 केस ही मिले और जून माह में मिले कोरोना के 40 मरीज ठीक हुए। जुलाई में 21 दिन ऐसे रहे, जिनमें कोरोना का नया केस नहीं मिला। कोरोना कम होने पर लोगों की लापरवाही भी बढ़ रही है। बाजारों में भीड़ के बीच सोशल डिस्टेंस का कोई ख्याल नहीं और फेस मास्क लगाना भी जरूरी नहीं समझ रहे हैं। इस माह में कोरोना की तीसरी लहर का अंदेशा स्वास्थ्य विशेषज्ञों द्वारा जताया जा रहा है। जिला अस्पताल के सीएमएस डॉ. सफल कुमार का कहना है कि कोरोना के केस भले ही कम हो गए हो, लेकिन खतरा अभी बरकरार है। इसलिए लोगों को पूरी तरह सावधानी बरतने की जरूरत है। उन्होंने कहा कि फेस मास्क लगाए और सोशल डिस्टेंस का पालन करे। साबुन या सैनिटाइजर से हाथ साफ करते रहें।
तीसरी लहर से बचाव की ये की गई तैयारी
जिला अस्पताल के सीएमएस डॉ. सफल कुमार ने बताया कि कोरोना की तीसरी लहर में बच्चों को ज्यादा प्रभावित होने का अंदेशा जताया जा रहा है। उसे देखते हुए 40 बेड का पीडियाट्रिक इंटेसिव केयर यूनिट (पीकू) बनाई गई है। इसमें 10 बेड पर वेंटिंलेंटर हैं। 10 बेड की हाई डिपेंडेसी यूनिट (एचडीयू) और 20 बेड आइसोलेशन में है। जिला अस्पताल में 105 बेड पर सेंट्रल ऑक्सीजन सप्लाई की व्यवस्था है। एक ऑक्सीजन प्लांट चालू हो चुका है। दो प्लांट जल्द लगाए जाएंगे। इसके अलावा थानाभवन, कांधला व झिंझाना में भी ऑक्सीजन प्लांट लगाए जा रहे हैं। इसके अलावा 45 चिकित्सकों और 45 स्टाफ नर्स को प्रशिक्षण दिया जा चुका है।
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शामली। कोरोना की दूसरी लहर की रफ्तार जुलाई माह में थम गई, लेकिन इस महीने कोरोना की तीसरी लहर की आशंका जताए जाने के कारण लोगों को खास सावधानी बरतने की जरूरत है। लोग जिस तरह से कोरोना को लेकर बेपरवाह बने हुए हैं, वह जिंदगी पर भारी पड़ सकती है।
कोरोना की दूसरी लहर अप्रैल व मई के महीने में पीक पर रहा। एक दिन में कोरोना के 687 केस मिलने का रिकार्ड भी बना था। जून माह में कोरोना की दूसरी लहर की रफ्तार धीमी पड़नी शुरू हुई थी। 170 केस कोरोना के मिले और तीन लोगों की मौत हुई। जुलाई माह में कोरोना की रफ्तार पर ब्रेक लगा। इस महीने में कोरोना के 12 केस ही मिले और जून माह में मिले कोरोना के 40 मरीज ठीक हुए। जुलाई में 21 दिन ऐसे रहे, जिनमें कोरोना का नया केस नहीं मिला। कोरोना कम होने पर लोगों की लापरवाही भी बढ़ रही है। बाजारों में भीड़ के बीच सोशल डिस्टेंस का कोई ख्याल नहीं और फेस मास्क लगाना भी जरूरी नहीं समझ रहे हैं। इस माह में कोरोना की तीसरी लहर का अंदेशा स्वास्थ्य विशेषज्ञों द्वारा जताया जा रहा है। जिला अस्पताल के सीएमएस डॉ. सफल कुमार का कहना है कि कोरोना के केस भले ही कम हो गए हो, लेकिन खतरा अभी बरकरार है। इसलिए लोगों को पूरी तरह सावधानी बरतने की जरूरत है। उन्होंने कहा कि फेस मास्क लगाए और सोशल डिस्टेंस का पालन करे। साबुन या सैनिटाइजर से हाथ साफ करते रहें।
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तीसरी लहर से बचाव की ये की गई तैयारी
जिला अस्पताल के सीएमएस डॉ. सफल कुमार ने बताया कि कोरोना की तीसरी लहर में बच्चों को ज्यादा प्रभावित होने का अंदेशा जताया जा रहा है। उसे देखते हुए 40 बेड का पीडियाट्रिक इंटेसिव केयर यूनिट (पीकू) बनाई गई है। इसमें 10 बेड पर वेंटिंलेंटर हैं। 10 बेड की हाई डिपेंडेसी यूनिट (एचडीयू) और 20 बेड आइसोलेशन में है। जिला अस्पताल में 105 बेड पर सेंट्रल ऑक्सीजन सप्लाई की व्यवस्था है। एक ऑक्सीजन प्लांट चालू हो चुका है। दो प्लांट जल्द लगाए जाएंगे। इसके अलावा थानाभवन, कांधला व झिंझाना में भी ऑक्सीजन प्लांट लगाए जा रहे हैं। इसके अलावा 45 चिकित्सकों और 45 स्टाफ नर्स को प्रशिक्षण दिया जा चुका है।
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