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घट रहा है नदियों का आकार, सिर्फ बरसाती नाला बनकर रह गई यमुना-कृष्णा
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घट रहा है नदियों का आकार, जीवनदायिनी को भगीरथ की दरकार
शामली। पश्चिमी उत्तर प्रदेश और हरियाणा के किसानों के लिए जीवनदायिनी कहने जाने वाली यमुना नदी को शासन के ऐसे भगीरथी प्रयास की दरकार है, जिससे वह अपने वास्तविक स्वरूप में आ सके। इस समय यमुना नदी का स्वरूप सिर्फ बरसाती नाला बनकर रह गया है। अतिक्रमण ने यमुना की के फैलाव को ग्रहण कर दिया है। जिस कारण लगातार यमुना का आकार घटता जा रहा है। यमुना और कृष्णा की भूमि पर खेती हो रही है। कम पानी होने से गर्मी के मौसम में यमुना सूख रही है। जबकि कृष्णा नदी पूरी तरह प्रदूषित हो चुकी है।
यमुना की धारा पश्चिमी उत्तर प्रदेश में हरियाणा के यमुना नगर और सहारनपुर जिले की सीमा पर हथिनी कुंड और ताजे वाला बांध से शुरू होकर शामली, बागपत, दिल्ली, मथुरा से होकर गुजरती है। सहारनपुर और बागपत जिले के बीच शामली जिले का 52 किमी लंबाई का क्षेत्र है। ग्राम चौसाना, बिडौली, कैराना, कांधला क्षेत्र के इस्सोपुरटील सीमा तक यमुना के किनारे दोनों प्रांतों के किसान अतिक्रमण करके गन्ना, गेहूं, धान आदि फसल बुवाई कर रहे हैं।
पिछले कई साल से यमुना का जलस्तर घटता जा रहा है। कभी वृहद क्षेत्र में अवरिल बहने वाली यमुना जल स्तर घटने से बरसाती नदी बन गई है। जुलाई और अगस्त में मानसून आने से विकराल रुप धारण कर लेती है। फरवरी शुरू होते ही जलस्तर घटना शुरू होता है। अप्रैल और मई आते-आते यमुना पूरी सूख जाती है। लोग यमुना में पानी के लगातार छोड़े जाने की मांग करते रहते हैं।
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सहारनपुर जिले से शुरु होने वाली जिले की कृष्णा नदी का आकार भी घट रहा है। कृष्णा नाला बन गई है। कृष्णा नदी थानाभवन क्षेत्र के दखौड़ी जमालपुर, कैडी, जलालपुर, बनत, कुड़ाना, काबडौत, झाल, सल्फा, लिसाढ़ डूंगर, डांगरौल, भनेड़ा होकर बागपत जिले में प्रवेश करती है। मौजूदा दौर में कृष्णा नदी के किनारे गंदगी के अंबार लगे हुए हैं। जिला प्रशासन ने पिछले साल नदियों को निर्मल बनाने के लिए अभियान चलाया गया था। एक साल बाद नदी की स्थिति जस की तस हो गई है।
स्वच्छता के लिए पॉर्कलेन जैसी मशीन की जरूरत
जिले में पिछले साल कृष्णा को स्वच्छ बनाने के लिए नदी के किनारे भूमि का चिह्नीकरण करके स्वच्छता अभियान मनरेगा योजना के अंतर्गत चलाया गया था। अब मनरेगा के मजदूरों द्वारा स्वच्छता अभियान चला पाना मुश्किल है। नदियों के किनारे पॉर्कलेन मशीन से ही सफाई हो सकती है। - शंभूनाथ तिवारी, सीडीओ शामली।
ग्राम पंचायत, निकायों और औद्योगिक इकाई कर रहीं नदियों को प्रदूषित
कृष्णा नदी में 70 प्रतिशत नालों का पानी और 30 प्रतिशत पानी औद्योगिक इकाई का आ रहा है। नदियों में प्रदूषित पानी रोकने के लिए ग्रामीण क्षेत्रों और निकाय को ट्रीटमेंट प्लांट एसटीपी प्रोजेक्ट लगाना होगा। ऑनलाइन मॉनिटर व्यवस्था यमुना नदी में हो सकती है। इस सबंध में औद्योगिक इकाई को लगातार नोटिस दिए जा रहे हैं। कृष्णा नदी के हर माह नमूने लिए जा रहे हैं। - अंकित सिंह, क्षेत्रीय अधिकारी प्रदूषण विभाग, शामली-मुजफ्फरनगर।
कृष्णा नदी का पउप्र में जलागम क्षेत्र
बागपत-222 वर्ग किमी
मुजफ्फरनगर- 91 वर्ग किमी
शामली-664 वर्ग किमी
सहारनपुर 226 वर्ग किमी
कुल- 1203 वर्ग किमी
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शामली। पश्चिमी उत्तर प्रदेश और हरियाणा के किसानों के लिए जीवनदायिनी कहने जाने वाली यमुना नदी को शासन के ऐसे भगीरथी प्रयास की दरकार है, जिससे वह अपने वास्तविक स्वरूप में आ सके। इस समय यमुना नदी का स्वरूप सिर्फ बरसाती नाला बनकर रह गया है। अतिक्रमण ने यमुना की के फैलाव को ग्रहण कर दिया है। जिस कारण लगातार यमुना का आकार घटता जा रहा है। यमुना और कृष्णा की भूमि पर खेती हो रही है। कम पानी होने से गर्मी के मौसम में यमुना सूख रही है। जबकि कृष्णा नदी पूरी तरह प्रदूषित हो चुकी है।
यमुना की धारा पश्चिमी उत्तर प्रदेश में हरियाणा के यमुना नगर और सहारनपुर जिले की सीमा पर हथिनी कुंड और ताजे वाला बांध से शुरू होकर शामली, बागपत, दिल्ली, मथुरा से होकर गुजरती है। सहारनपुर और बागपत जिले के बीच शामली जिले का 52 किमी लंबाई का क्षेत्र है। ग्राम चौसाना, बिडौली, कैराना, कांधला क्षेत्र के इस्सोपुरटील सीमा तक यमुना के किनारे दोनों प्रांतों के किसान अतिक्रमण करके गन्ना, गेहूं, धान आदि फसल बुवाई कर रहे हैं।
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पिछले कई साल से यमुना का जलस्तर घटता जा रहा है। कभी वृहद क्षेत्र में अवरिल बहने वाली यमुना जल स्तर घटने से बरसाती नदी बन गई है। जुलाई और अगस्त में मानसून आने से विकराल रुप धारण कर लेती है। फरवरी शुरू होते ही जलस्तर घटना शुरू होता है। अप्रैल और मई आते-आते यमुना पूरी सूख जाती है। लोग यमुना में पानी के लगातार छोड़े जाने की मांग करते रहते हैं।
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सहारनपुर जिले से शुरु होने वाली जिले की कृष्णा नदी का आकार भी घट रहा है। कृष्णा नाला बन गई है। कृष्णा नदी थानाभवन क्षेत्र के दखौड़ी जमालपुर, कैडी, जलालपुर, बनत, कुड़ाना, काबडौत, झाल, सल्फा, लिसाढ़ डूंगर, डांगरौल, भनेड़ा होकर बागपत जिले में प्रवेश करती है। मौजूदा दौर में कृष्णा नदी के किनारे गंदगी के अंबार लगे हुए हैं। जिला प्रशासन ने पिछले साल नदियों को निर्मल बनाने के लिए अभियान चलाया गया था। एक साल बाद नदी की स्थिति जस की तस हो गई है।
स्वच्छता के लिए पॉर्कलेन जैसी मशीन की जरूरत
जिले में पिछले साल कृष्णा को स्वच्छ बनाने के लिए नदी के किनारे भूमि का चिह्नीकरण करके स्वच्छता अभियान मनरेगा योजना के अंतर्गत चलाया गया था। अब मनरेगा के मजदूरों द्वारा स्वच्छता अभियान चला पाना मुश्किल है। नदियों के किनारे पॉर्कलेन मशीन से ही सफाई हो सकती है। - शंभूनाथ तिवारी, सीडीओ शामली।
ग्राम पंचायत, निकायों और औद्योगिक इकाई कर रहीं नदियों को प्रदूषित
कृष्णा नदी में 70 प्रतिशत नालों का पानी और 30 प्रतिशत पानी औद्योगिक इकाई का आ रहा है। नदियों में प्रदूषित पानी रोकने के लिए ग्रामीण क्षेत्रों और निकाय को ट्रीटमेंट प्लांट एसटीपी प्रोजेक्ट लगाना होगा। ऑनलाइन मॉनिटर व्यवस्था यमुना नदी में हो सकती है। इस सबंध में औद्योगिक इकाई को लगातार नोटिस दिए जा रहे हैं। कृष्णा नदी के हर माह नमूने लिए जा रहे हैं। - अंकित सिंह, क्षेत्रीय अधिकारी प्रदूषण विभाग, शामली-मुजफ्फरनगर।
कृष्णा नदी का पउप्र में जलागम क्षेत्र
बागपत-222 वर्ग किमी
मुजफ्फरनगर- 91 वर्ग किमी
शामली-664 वर्ग किमी
सहारनपुर 226 वर्ग किमी
कुल- 1203 वर्ग किमी

चौसाना क्षेत्र में यमुना नदी की भूमि पर बोई गई गेहूं की फसल।- फोटो : SHAMLI

चौसाना क्षेत्र में यमुना नदी की भूमि पर बोई गई फसल।- फोटो : SHAMLI