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Shamli News: निजी प्रकाशकों की किताबों के दाम 20 से 30 फीसदी तक बढ़े
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- यूनीफॉर्म के दामों में भी हुई बढ़ोत्तरी, अभिभावकों पर पड़ेगा अतिरिक्त बोझ
संवाद न्यूज एजेंसी
शामली। अप्रैल में नया शैक्षिक सत्र शुरु होने वाला है। अभिभावक इसकी तैयारियों में जुटे हैं। महंगाई की मार झेल रहे अभिभावकों की जेब पर बच्चों की पढ़ाई बोझ और अधिक बढ़ गया है। निजी प्रकाशकों की पुस्तकों के दाम में 20 से 30 फीसदी तक बढ़ोत्तरी हुई है। स्कूल बैग और यूनीफॉर्म के दाम भी बढ़े हैं।
शिक्षा विभाग और प्रशासन भले ही स्कूल संचालकों पर शिकंजा कसने का दावा करते हों लेकिन अभिभावकों को इससे कोई राहत नहीं मिलती दिखती। हर बार कोर्स में निजी प्रकाशकों की कुछ महंगी किताबें जोड़ दी जाती हैं। जो किताब बाजार में 200 रुपये में मिल सकती है, वह 400 से 450 रुपये में मिलती है। जिन्हें अभिभावकों को मजबूरी में खरीदना पड़ता है। किताब विक्रेताओं का कहना है कागज के दाम बढ़े हैं, जिसके चलते प्रकाशकों ने किताबों के दाम भी बढ़ा दिए हैं। आने वाले दिनों में किताबों की कीमत और अधिक बढ़ सकती है।
कोर्स के नाम पर चलता है कमीशन का खेल
शहर के अधिकतर स्कूलों का कोर्स किसी खास दुकान पर ही मिलेगा। इनके अलावा किसी दुकान पर किताबें नहीं मिलती। इसके पीछे कमीशन का खेल चलता है। निजी प्रकाशक सीधे स्कूल संचालकों से संपर्क करते हैं और मोटा कमीशन देते हैं। इसमें दुकानदारों का भी हिस्सा होता है। बताया जाता है कि स्कूल 40 फीसदी तक कमीशन लेते हैं। जो विक्रेता सिर्फ एनसीईआरटी की किताबें बेचते हैं, उनकी बिक्री कम होती है। जबकि प्रकाशकों की दुकानों पर लाइन लगी होती है।
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वर्जन.........
स्कूलों में निजी प्रकाशकों की किताबें लगाई जाती हैं, जो अन्य किताबों से काफी महंगी होती हैं। ये किताबें सिर्फ खास दुकानों पर ही मिलती हैं। सरकार को इस पर अंकुश लगाना चाहिए। अमित शर्मा, अभिभावक।
अभिभावक अपने बच्चों के भविष्य के लिए मजबूरी में आर्थिक शोषण सहते हैं। शिक्षा विभाग को इस पर रोक लगानी चाहिए। स्कूलों में एनीसीईआरटी के अलावा किसी किताब से नहीं पढ़ाया जाना चाहिए। आशीष कुमार, अभिभावक।
स्कूलों में निजी प्रकाशकों की किताबें लगाने पर पूरी तरह रोक है। सत्र शुरु होने पर स्कूलों की जांच की जाएगी। किसी स्कूल में निजी प्रकाशकों की किताबों से पढ़ाई होती मिली तो कार्रवाई की जाएगी।- सरदार सिंह, डीआईओएस।
यूनीफार्म की कीमत
कक्षा-1 से 5: 700 से 1000
कक्षा- 6 से 9: 900 से 1200
कक्षा-10 से 12: 1200 से 1400
स्कूल बैग- 300 से 400
जूते- 400 से 900
कक्षा निजी प्रकाशक के दाम एनसीईआरटी के दाम
प्री नर्सरी व नर्सरी दो से तीन हजार रुपये 200
कक्षा-1 से 5 तक चार से पांच हजार रुपये 300
कक्षा-6 से 8 तक पांच से सात हजार रुपये 600
कक्षा-9 व 10 सात से आठ हजार रुपये 800
कक्षा-11 व 12 आठ से दस हजार रुपये 950
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संवाद न्यूज एजेंसी
शामली। अप्रैल में नया शैक्षिक सत्र शुरु होने वाला है। अभिभावक इसकी तैयारियों में जुटे हैं। महंगाई की मार झेल रहे अभिभावकों की जेब पर बच्चों की पढ़ाई बोझ और अधिक बढ़ गया है। निजी प्रकाशकों की पुस्तकों के दाम में 20 से 30 फीसदी तक बढ़ोत्तरी हुई है। स्कूल बैग और यूनीफॉर्म के दाम भी बढ़े हैं।
शिक्षा विभाग और प्रशासन भले ही स्कूल संचालकों पर शिकंजा कसने का दावा करते हों लेकिन अभिभावकों को इससे कोई राहत नहीं मिलती दिखती। हर बार कोर्स में निजी प्रकाशकों की कुछ महंगी किताबें जोड़ दी जाती हैं। जो किताब बाजार में 200 रुपये में मिल सकती है, वह 400 से 450 रुपये में मिलती है। जिन्हें अभिभावकों को मजबूरी में खरीदना पड़ता है। किताब विक्रेताओं का कहना है कागज के दाम बढ़े हैं, जिसके चलते प्रकाशकों ने किताबों के दाम भी बढ़ा दिए हैं। आने वाले दिनों में किताबों की कीमत और अधिक बढ़ सकती है।
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कोर्स के नाम पर चलता है कमीशन का खेल
शहर के अधिकतर स्कूलों का कोर्स किसी खास दुकान पर ही मिलेगा। इनके अलावा किसी दुकान पर किताबें नहीं मिलती। इसके पीछे कमीशन का खेल चलता है। निजी प्रकाशक सीधे स्कूल संचालकों से संपर्क करते हैं और मोटा कमीशन देते हैं। इसमें दुकानदारों का भी हिस्सा होता है। बताया जाता है कि स्कूल 40 फीसदी तक कमीशन लेते हैं। जो विक्रेता सिर्फ एनसीईआरटी की किताबें बेचते हैं, उनकी बिक्री कम होती है। जबकि प्रकाशकों की दुकानों पर लाइन लगी होती है।
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वर्जन.........
स्कूलों में निजी प्रकाशकों की किताबें लगाई जाती हैं, जो अन्य किताबों से काफी महंगी होती हैं। ये किताबें सिर्फ खास दुकानों पर ही मिलती हैं। सरकार को इस पर अंकुश लगाना चाहिए। अमित शर्मा, अभिभावक।
अभिभावक अपने बच्चों के भविष्य के लिए मजबूरी में आर्थिक शोषण सहते हैं। शिक्षा विभाग को इस पर रोक लगानी चाहिए। स्कूलों में एनीसीईआरटी के अलावा किसी किताब से नहीं पढ़ाया जाना चाहिए। आशीष कुमार, अभिभावक।
स्कूलों में निजी प्रकाशकों की किताबें लगाने पर पूरी तरह रोक है। सत्र शुरु होने पर स्कूलों की जांच की जाएगी। किसी स्कूल में निजी प्रकाशकों की किताबों से पढ़ाई होती मिली तो कार्रवाई की जाएगी।- सरदार सिंह, डीआईओएस।
यूनीफार्म की कीमत
कक्षा-1 से 5: 700 से 1000
कक्षा- 6 से 9: 900 से 1200
कक्षा-10 से 12: 1200 से 1400
स्कूल बैग- 300 से 400
जूते- 400 से 900
कक्षा निजी प्रकाशक के दाम एनसीईआरटी के दाम
प्री नर्सरी व नर्सरी दो से तीन हजार रुपये 200
कक्षा-1 से 5 तक चार से पांच हजार रुपये 300
कक्षा-6 से 8 तक पांच से सात हजार रुपये 600
कक्षा-9 व 10 सात से आठ हजार रुपये 800
कक्षा-11 व 12 आठ से दस हजार रुपये 950