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महंगाई का नया गणित : दाम वही, लेकिन सामान हुआ कम
Tue, 02 Jun 2026 12:39 AM IST
मेरठ ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, शामली
संवाद न्यूज एजेंसी, शामली
Updated Tue, 02 Jun 2026 12:39 AM IST
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शामली। गैस, डीजल-पेट्रोल के दामों में बढ़ोत्तरी के बाद लगे महंगाई के तड़के में कंपनियों ने अपने उत्पाद के सीधे दाम बढ़ाने के बजाय एक नया तरीका अपनाया है। जिसमें अब उत्पाद का वजन ही घटा दिया गया है।
सोमवार को बाजार में की गई पड़ताल में सामने आया कि चिप्स, बिस्किट, नमकीन, चॉकलेट, जूस, आइसक्रीम और छाछ जैसी वस्तुओं के दाम महंगाई के हिसाब से कंपनियों ने नहीं बढ़ाए है ब्लकि अब कंपनियों ने इन उत्पादों की मात्रा में कटौती कर दी है। 10 रुपये में मिलने वाला चिप्स का पैकेट पहले 32 ग्राम का होता था, जो अब 28 ग्राम का रह गया है। इसी तरह चॉकलेट 30 ग्राम से घटकर 24 ग्राम और आइसक्रीम 47 ग्राम से घटकर 40 ग्राम रह गई है।
केवल खाद्य पदार्थ ही नहीं, बल्कि सर्फ, साबुन, हेयर ऑयल और क्रीम जैसे उत्पादों में भी यही स्थिति देखने को मिल रही है। कई उत्पादों की पैकिंग पहले जैसी ही दिखाई देती है, लेकिन उनमें भरी जाने वाली सामग्री कम कर दी गई है। एक किलो के पैकेट अब 950 ग्राम या उससे कम वजन के हो गए है।
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शहर के बड़े बाजार के दुकानदार अंकित व आदेश का कहना है कि कच्चे माल, परिवहन और पैकेजिंग की लागत बढ़ने के कारण कंपनियां कीमत बढ़ाने से बचने के लिए वजन कम करने का रास्ता अपना रही हैं। वहीं राहुल व अमित का मानना है कि यह महंगाई का ऐसा रूप है, जो पहली नजर में दिखाई नहीं देता, लेकिन जेब पर इसका असर उतना ही पड़ता है।
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सोमवार को बाजार में की गई पड़ताल में सामने आया कि चिप्स, बिस्किट, नमकीन, चॉकलेट, जूस, आइसक्रीम और छाछ जैसी वस्तुओं के दाम महंगाई के हिसाब से कंपनियों ने नहीं बढ़ाए है ब्लकि अब कंपनियों ने इन उत्पादों की मात्रा में कटौती कर दी है। 10 रुपये में मिलने वाला चिप्स का पैकेट पहले 32 ग्राम का होता था, जो अब 28 ग्राम का रह गया है। इसी तरह चॉकलेट 30 ग्राम से घटकर 24 ग्राम और आइसक्रीम 47 ग्राम से घटकर 40 ग्राम रह गई है।
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केवल खाद्य पदार्थ ही नहीं, बल्कि सर्फ, साबुन, हेयर ऑयल और क्रीम जैसे उत्पादों में भी यही स्थिति देखने को मिल रही है। कई उत्पादों की पैकिंग पहले जैसी ही दिखाई देती है, लेकिन उनमें भरी जाने वाली सामग्री कम कर दी गई है। एक किलो के पैकेट अब 950 ग्राम या उससे कम वजन के हो गए है।
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शहर के बड़े बाजार के दुकानदार अंकित व आदेश का कहना है कि कच्चे माल, परिवहन और पैकेजिंग की लागत बढ़ने के कारण कंपनियां कीमत बढ़ाने से बचने के लिए वजन कम करने का रास्ता अपना रही हैं। वहीं राहुल व अमित का मानना है कि यह महंगाई का ऐसा रूप है, जो पहली नजर में दिखाई नहीं देता, लेकिन जेब पर इसका असर उतना ही पड़ता है।