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जिले में स्वास्थ्य सुविधाओं की दरकार
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शामली स्वास्थ्य दिवस से सम्बधित फोटो जिला अस्पताल
- फोटो : SHAMLI
जिले में स्वास्थ्य सुविधाओं की दरकार
शामली। जिला बनने के करीब साढ़े नौ साल बाद भी लोगों को पर्याप्त स्वास्थ्य सुविधाएं उपलब्ध नहीं हो सकी हैं। अस्पताल में सीटी स्कैन, अल्ट्रासाउंड मशीन की उपलब्धता तक नहीं है। यहां तक कि विशेषज्ञ चिकित्सकों के नहीं होने के कारण गंभीर रोगों से पीड़ित लोगों को महंगा इलाज दूसरे शहरों में कराने के विवश होना पड़ता है। इलाज कराने में अक्षम जरूरतमंद लोगों को अपनी जिंदगी के लिए संघर्ष करना पड़ता है।
जिले में सात सीएचसी शामली, कुड़ाना, जसाला, कांधला, कैैराना, थानाभवन, ऊन व झिंझाना और 25 पीएचसी है। इनमें तीन पीएचसी नगरीय क्षेत्र में हैं। जसाला सीएचसी पर अभी स्टाफ की तैनाती नहीं हुई है। जिला मुख्यालय की सीएचसी को जिला अस्पताल के रूप में चलाया जा रहा है, लेकिन यहां पर जनरल सर्जन, गायनोकॉलोजिस्ट जैसे विशेषज्ञ चिकित्सक न होने से लोगों को उपचार की बेहतर सुविधाएं नहीं मिल पा रहा है। इसके चलते गंभीर रोगों के मरीजों को दूसरे शहरों में जाकर महंगा इलाज कराना पड़ता है।
सीएचसी बना रेफर सेंटर
कहने को तो सीएचसी शामली को जिला अस्पताल के रूप में चलाया जा रहा है, लेकिन इमरजेंसी में आने वाले गंभीर रोगों से पीड़ित मरीजों और घायलों को प्राथमिक उपचार के बाद हायर सेंटर रेफर किया जाता है। इस कारण सीएचसी गंभीर रोगियों के लिए रेफर सेंटर ही बनकर रह गया है।
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कोविड के कारण जिला अस्पताल नहीं हो सका चालू
जिला मुख्यालय पर गांव मुंडेट के निकट नहर पटरी पर करीब साढ़े 39 करोड़ की लागत से पिछले साल जिला संयुक्त चिकित्सालय के भवन का निर्माण कार्य पूरा हो गया था। लोगों को उम्मीद थी कि जिला अस्पताल चालू होने पर स्वास्थ्य सुविधाओं का लाभ मिलेगा। कोरोना संक्रमण की वजह से पिछले साल 30 अक्तूबर को जिला अस्पताल के भवन में कोविड एल-1 व एल-2 अस्पताल चालू किया गया। इसका उद्घाटन मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने लखनऊ से किया था। कोरोना के केस कम होने पर स्वास्थ्य अधिकारियों ने जिला अस्पताल चालू करने के लिए शासन से अनुमति लेने को पत्राचार किया, लेकिन कोरोना के केस फिर से बढ़ने के कारण शासन ने जिला अस्पताल चालू करने से मना करते हुए कोविड अस्पताल ही चलाए जाने के निर्देश दिए गए।
डायलिसिस की नहीं मिली सुविधा
पिछले साल जिला अस्पताल में डायलिसिस और सीटी स्कैन की सुविधा उपलब्ध कराने के लिए स्वास्थ्य विभाग ने शासन को प्रस्ताव भेजा था। करीब पांच माह पहले शासन से प्रस्ताव की मंजूरी मिलने के बाद सार्वजनिक निजी साझेदारी (पीपीपी मॉडल) के तहत दोनों मशीनें लगाई जानी है, लेकिन अभी तक दोनों सुविधाएं उपलब्ध नहीं हो पाई है। इसके साथ ही जिला अस्पताल में शासन स्तर से 22 पुरुष चिकित्सक, महिला चिकित्सक और 66 पैरा मेडिकल स्टाफ के पद स्वीकृत हो चुके हैं, लेकिन अभी तक विशेषज्ञ चिकित्सकों की नियुक्ति नहीं हो सकी।
इनका कहना है-
जिला बनने के बाद भी गंभीर रोगों के इलाज की सुविधा नहीं है, जिस कारण मरीजों को दूसरे बड़े शहरों में जाना पड़ता है। जिला अस्पताल भी चालू नहीं हो सका है, जिस कारण पर्याप्त स्वास्थ्य सुविधाएं नहीं मिल रही है।
अमित शर्मा, विवेक विहार।
क्षय रोग की जांच के साथ कोविड की व्यवस्था संभाली
शामली। सीएचसी शामली में स्थित क्षय रोग प्रयोगशाला के वरिष्ठ पर्यवेक्षक रोहित कुमार पिछले साल जब से कोरोना के केस आने शुरू हुए, तभी से वह लगातार क्षय रोगियों की जांच के साथ कोरोना की जांच कराने में लगातार अपना दायित्व निभा रहे हैं। रोहित ने बताया कि पिछले साल 16 मार्च से 30 मई तक उन्होंने कोई अवकाश नहीं लिया। पहले उनकी ड्यूटी कोविड कंट्रोल रूम में रही। इसके बाद से सीएचसी शामली पर ट्रू नेट मशीन से लेकर एंटीजन किट से जांच कराने की व्यवस्था का जिम्मा संभाल रहे हैं। उनका कहना है कि कोरोना से बचाव के लिए लोगों को फेस मास्क और सोशल डिस्टेंस का पालन करते हुए सभी जरूरी सावधानी बरतनी चाहिए।
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शामली। जिला बनने के करीब साढ़े नौ साल बाद भी लोगों को पर्याप्त स्वास्थ्य सुविधाएं उपलब्ध नहीं हो सकी हैं। अस्पताल में सीटी स्कैन, अल्ट्रासाउंड मशीन की उपलब्धता तक नहीं है। यहां तक कि विशेषज्ञ चिकित्सकों के नहीं होने के कारण गंभीर रोगों से पीड़ित लोगों को महंगा इलाज दूसरे शहरों में कराने के विवश होना पड़ता है। इलाज कराने में अक्षम जरूरतमंद लोगों को अपनी जिंदगी के लिए संघर्ष करना पड़ता है।
जिले में सात सीएचसी शामली, कुड़ाना, जसाला, कांधला, कैैराना, थानाभवन, ऊन व झिंझाना और 25 पीएचसी है। इनमें तीन पीएचसी नगरीय क्षेत्र में हैं। जसाला सीएचसी पर अभी स्टाफ की तैनाती नहीं हुई है। जिला मुख्यालय की सीएचसी को जिला अस्पताल के रूप में चलाया जा रहा है, लेकिन यहां पर जनरल सर्जन, गायनोकॉलोजिस्ट जैसे विशेषज्ञ चिकित्सक न होने से लोगों को उपचार की बेहतर सुविधाएं नहीं मिल पा रहा है। इसके चलते गंभीर रोगों के मरीजों को दूसरे शहरों में जाकर महंगा इलाज कराना पड़ता है।
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सीएचसी बना रेफर सेंटर
कहने को तो सीएचसी शामली को जिला अस्पताल के रूप में चलाया जा रहा है, लेकिन इमरजेंसी में आने वाले गंभीर रोगों से पीड़ित मरीजों और घायलों को प्राथमिक उपचार के बाद हायर सेंटर रेफर किया जाता है। इस कारण सीएचसी गंभीर रोगियों के लिए रेफर सेंटर ही बनकर रह गया है।
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कोविड के कारण जिला अस्पताल नहीं हो सका चालू
जिला मुख्यालय पर गांव मुंडेट के निकट नहर पटरी पर करीब साढ़े 39 करोड़ की लागत से पिछले साल जिला संयुक्त चिकित्सालय के भवन का निर्माण कार्य पूरा हो गया था। लोगों को उम्मीद थी कि जिला अस्पताल चालू होने पर स्वास्थ्य सुविधाओं का लाभ मिलेगा। कोरोना संक्रमण की वजह से पिछले साल 30 अक्तूबर को जिला अस्पताल के भवन में कोविड एल-1 व एल-2 अस्पताल चालू किया गया। इसका उद्घाटन मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने लखनऊ से किया था। कोरोना के केस कम होने पर स्वास्थ्य अधिकारियों ने जिला अस्पताल चालू करने के लिए शासन से अनुमति लेने को पत्राचार किया, लेकिन कोरोना के केस फिर से बढ़ने के कारण शासन ने जिला अस्पताल चालू करने से मना करते हुए कोविड अस्पताल ही चलाए जाने के निर्देश दिए गए।
डायलिसिस की नहीं मिली सुविधा
पिछले साल जिला अस्पताल में डायलिसिस और सीटी स्कैन की सुविधा उपलब्ध कराने के लिए स्वास्थ्य विभाग ने शासन को प्रस्ताव भेजा था। करीब पांच माह पहले शासन से प्रस्ताव की मंजूरी मिलने के बाद सार्वजनिक निजी साझेदारी (पीपीपी मॉडल) के तहत दोनों मशीनें लगाई जानी है, लेकिन अभी तक दोनों सुविधाएं उपलब्ध नहीं हो पाई है। इसके साथ ही जिला अस्पताल में शासन स्तर से 22 पुरुष चिकित्सक, महिला चिकित्सक और 66 पैरा मेडिकल स्टाफ के पद स्वीकृत हो चुके हैं, लेकिन अभी तक विशेषज्ञ चिकित्सकों की नियुक्ति नहीं हो सकी।
इनका कहना है-
जिला बनने के बाद भी गंभीर रोगों के इलाज की सुविधा नहीं है, जिस कारण मरीजों को दूसरे बड़े शहरों में जाना पड़ता है। जिला अस्पताल भी चालू नहीं हो सका है, जिस कारण पर्याप्त स्वास्थ्य सुविधाएं नहीं मिल रही है।
अमित शर्मा, विवेक विहार।
क्षय रोग की जांच के साथ कोविड की व्यवस्था संभाली
शामली। सीएचसी शामली में स्थित क्षय रोग प्रयोगशाला के वरिष्ठ पर्यवेक्षक रोहित कुमार पिछले साल जब से कोरोना के केस आने शुरू हुए, तभी से वह लगातार क्षय रोगियों की जांच के साथ कोरोना की जांच कराने में लगातार अपना दायित्व निभा रहे हैं। रोहित ने बताया कि पिछले साल 16 मार्च से 30 मई तक उन्होंने कोई अवकाश नहीं लिया। पहले उनकी ड्यूटी कोविड कंट्रोल रूम में रही। इसके बाद से सीएचसी शामली पर ट्रू नेट मशीन से लेकर एंटीजन किट से जांच कराने की व्यवस्था का जिम्मा संभाल रहे हैं। उनका कहना है कि कोरोना से बचाव के लिए लोगों को फेस मास्क और सोशल डिस्टेंस का पालन करते हुए सभी जरूरी सावधानी बरतनी चाहिए।