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जिला योजना का बदलेगा स्वरूप
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करोड़ों के पास होते हैं प्रस्ताव, धन नहीं होता आवंटित
संवाद न्यूज एजेंसी
शामली। जिला योजना का स्वरूप बदला जाएगा। नीति आयोग द्वारा जिला योजना पर सवाल खड़े करने के बाद और समिति की अभी तक बैठक न होने से ऐसी चर्चाओं को बल मिल रहा है। करोड़ों के प्रस्ताव तो जिला योजना में पास हो जाते हैं, लेकिन उनके लिए धन का आवंटन मुश्किल हो जाता है। भविष्य में जिला योजना में परियोजना के लिए धनराशि का प्रस्ताव पारित नहीं होगा। परियोजना को स्वीकृति के लिए सीधे शासन को भेजा जाएगा।
जिला योजना के तहत के कराए जाने वाले कार्यों की शुरूआत नए वित्तीय वर्ष के साथ ही मानी जाती है। इसीलिए वित्तीय वर्ष की समाप्त होने से पहले ही दिसंबर-जनवरी में ही नए वित्तीय वर्ष की जिला योजना को तैयार किए जाने के निर्देश जारी कर दिए जाते हैं। व्यवस्था यह है कि जिला योजना में सभी विभागों के साथ ही नगर पंचायतों, क्षेत्र पंचायतों, जिला पंचायत से अगले वित्तीय वर्ष में कराए जाने वाले कार्यों के प्रस्ताव मांगे जाते हैं। इनका एकत्रीकरण किया जाता है। फिर निर्धारित लक्ष्य के मुताबिक कटौती करके इनको तैयार किया जाता है। जिला योजना को अंतिम रूप देने के लिए जिला योजना समिति की बैठक की जाती है। पिछले कई वर्षों से ऐसा ही होता रहा है। इस बैठक में विभिन्न विभागों के लिए प्रस्तावित कार्यों के साथ ही बजट को लेकर चर्चा किए जाने की व्यवस्था है। समिति जिले के बेहतर विकास के लिए विभाग व पंचायतों के लिए प्रस्ताव को अंतिम रूप देती है। जिला योजना में केंद्र और राज्य की विभिन्न महत्वाकांक्षी परियोजनाओं को भी शामिल किया जाता है। जिला योजना समिति की बैठक के बाद इसे अनुमोदन के लिए शासन को भेजा जाता है। इसके बाद धन आवंटन के साथ प्रस्तावित कार्य किए जाते हैं।
162.62 करोड़ में से मिले 74.16 करोड़
वर्ष 2020-21 की जिला योजना 162.62 करोड़ रुपये की थी। जिसमें से महज 74.16 करोड़ की धनराशि ही अवमुक्त हो पाई थी। जिसके चलते 2021-22 की जिला योजना का बजट भी न बढ़ाने का निर्णय लिया गया था। लेकिन इस वित्तीय वर्ष की जिला योजना की बैठक ही अभी तक नहीं हो पाई है।
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क्यों हुआ जिला योजना का ऐसा हाल
दरअसल जिला योजना में पहले विधायक और सांसद प्रस्ताव देते थे। इसके बाद धन आवंटन कराने के लिए शासन में पैरवी करते थे। जिससे अपने क्षेत्रों में अधिक से अधिक विकास कार्य करा सकें। लेकिन अब विधायकों और सांसदों को 5-5 करोड़ की विकास निधि मिलने लगी है। जिससे वह भी अब जिला योजना के लिए धन आवंटन कराने में ज्यादा दिलचस्पी नहीं लेते।
जिला योजना का वर्ष, बजट, अवमुक्त हुई धनराशि
2019-20 , 146.17 करोड़, 48.06 करोड़
2020-21, 162.62 करोड़, 74.16 करोड़
कोट
जिला योजना की तैयारी लगभग पूरी है, लेकिन अभी तक शासन से कोई निर्देश प्राप्त नहीं हुआ है। जिला योजना के स्वरूप बदले जाने की चर्चाएं हैं।- डा. हरेंद्र सिंह, जिला अर्थ एवं संख्या अधिकारी
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संवाद न्यूज एजेंसी
शामली। जिला योजना का स्वरूप बदला जाएगा। नीति आयोग द्वारा जिला योजना पर सवाल खड़े करने के बाद और समिति की अभी तक बैठक न होने से ऐसी चर्चाओं को बल मिल रहा है। करोड़ों के प्रस्ताव तो जिला योजना में पास हो जाते हैं, लेकिन उनके लिए धन का आवंटन मुश्किल हो जाता है। भविष्य में जिला योजना में परियोजना के लिए धनराशि का प्रस्ताव पारित नहीं होगा। परियोजना को स्वीकृति के लिए सीधे शासन को भेजा जाएगा।
जिला योजना के तहत के कराए जाने वाले कार्यों की शुरूआत नए वित्तीय वर्ष के साथ ही मानी जाती है। इसीलिए वित्तीय वर्ष की समाप्त होने से पहले ही दिसंबर-जनवरी में ही नए वित्तीय वर्ष की जिला योजना को तैयार किए जाने के निर्देश जारी कर दिए जाते हैं। व्यवस्था यह है कि जिला योजना में सभी विभागों के साथ ही नगर पंचायतों, क्षेत्र पंचायतों, जिला पंचायत से अगले वित्तीय वर्ष में कराए जाने वाले कार्यों के प्रस्ताव मांगे जाते हैं। इनका एकत्रीकरण किया जाता है। फिर निर्धारित लक्ष्य के मुताबिक कटौती करके इनको तैयार किया जाता है। जिला योजना को अंतिम रूप देने के लिए जिला योजना समिति की बैठक की जाती है। पिछले कई वर्षों से ऐसा ही होता रहा है। इस बैठक में विभिन्न विभागों के लिए प्रस्तावित कार्यों के साथ ही बजट को लेकर चर्चा किए जाने की व्यवस्था है। समिति जिले के बेहतर विकास के लिए विभाग व पंचायतों के लिए प्रस्ताव को अंतिम रूप देती है। जिला योजना में केंद्र और राज्य की विभिन्न महत्वाकांक्षी परियोजनाओं को भी शामिल किया जाता है। जिला योजना समिति की बैठक के बाद इसे अनुमोदन के लिए शासन को भेजा जाता है। इसके बाद धन आवंटन के साथ प्रस्तावित कार्य किए जाते हैं।
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162.62 करोड़ में से मिले 74.16 करोड़
वर्ष 2020-21 की जिला योजना 162.62 करोड़ रुपये की थी। जिसमें से महज 74.16 करोड़ की धनराशि ही अवमुक्त हो पाई थी। जिसके चलते 2021-22 की जिला योजना का बजट भी न बढ़ाने का निर्णय लिया गया था। लेकिन इस वित्तीय वर्ष की जिला योजना की बैठक ही अभी तक नहीं हो पाई है।
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क्यों हुआ जिला योजना का ऐसा हाल
दरअसल जिला योजना में पहले विधायक और सांसद प्रस्ताव देते थे। इसके बाद धन आवंटन कराने के लिए शासन में पैरवी करते थे। जिससे अपने क्षेत्रों में अधिक से अधिक विकास कार्य करा सकें। लेकिन अब विधायकों और सांसदों को 5-5 करोड़ की विकास निधि मिलने लगी है। जिससे वह भी अब जिला योजना के लिए धन आवंटन कराने में ज्यादा दिलचस्पी नहीं लेते।
जिला योजना का वर्ष, बजट, अवमुक्त हुई धनराशि
2019-20 , 146.17 करोड़, 48.06 करोड़
2020-21, 162.62 करोड़, 74.16 करोड़
कोट
जिला योजना की तैयारी लगभग पूरी है, लेकिन अभी तक शासन से कोई निर्देश प्राप्त नहीं हुआ है। जिला योजना के स्वरूप बदले जाने की चर्चाएं हैं।- डा. हरेंद्र सिंह, जिला अर्थ एवं संख्या अधिकारी