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दिल्ली-देहरादून इकनॉमिक कॉरिडोर एक्सप्रेसवे, किसानों को नहीं मिलेगा बढ़ा हुआ म़ुआवजा
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दिल्ली-देहरादून इकनॉमिक कॉरिडोर को लेकर कलक्ट्रेट सभागार में हुई बैठक में अपनी बात रखते किसान स?
- फोटो : SHAMLI
शामली। दिल्ली-देहरादून इकनॉमिक कॉरिडोर एक्सप्रेसवे के भूमि का बढ़ा हुआ मुआवजा समेत विभिन्न समस्याओं को लेकर किसान संघर्ष समिति, एनएचएआई और जिला प्रशासन के अफसरों के बीच चली डेढ़ घंटे तक चली बैठक बेनतीजा रही। त्रिस्तरीय बैठक में मुद्दे का हल न निकलने पर किसान संतुष्ट नहीं हुए। आखिर में किसानों ने प्रशासन और एनएचएआई के अधिकारियों को चेतावनी देते हुए बैठक का बहिष्कार कर दिया। किसानों ने एलान किया कि किसान जमीन पर प्रशासन का कतई कब्जा नहीं होने देंगे।
कलक्ट्रेट सभाकक्ष में शुक्रवार दोपहर साढे 12 बजे एनएचएआई के अधिकारियों, एसडीएम सदर बृजेश कुमार सिंह की मौजूदगी में दिल्ली-देहरादून इकनॉमिक कॉरिडोर एक्सप्रेसवे की किसान संघर्ष समिति के पदाधिकारियों की बैठक शुरू हुई। इस मौके पर एनएचएआई परियोजना निदेशक संजय मिश्रा के सामने किसानों ने सर्किल रेट को रिवाइज करके मुआवजे दिए जाने की मांग की। दो हिस्सों में बंटे खेत का अलग से 40 प्रतिशत मुआवजे दिए जाने, पुनर्वास, पुर्न विस्थापन के लिए 5.50 लाख रुपये दिए जाने और शिफ्टिंग के लिए 40 प्रतिशत अलग से मुआवजे की मांग की। कहा कि खड़ी फसल का मुआवजा और परिसंपत्तियों व ट्यूबवैल आदि का पुनर्मूल्यांकन करके मुआवजा दिया जाए। कुछ किसानों की जमीन अवार्ड में कम दिखाई गई है। निशान ज्यादा जमीन में लगे हैं।
डेढ़ घंटे चली संयुक्त बैठक में किसानों के रखे गए मुद्दों पर परियोजना निदेशक संजय मिश्रा किसानों को संतुष्ट नहीं कर पाए। आखिर में किसानों ने प्रशासन और एनएचएआई के अधिकारियों को चेतावनी देते हुए बैठक के बहिष्कार का एलान कर दिया। किसानों ने कहा कि प्रशासन जमीन पर कब्जा करने की कोशिश न करें। सर्किल रेट को रिवाइज करके और तमाम प्रतिकर लागू करके मुआवजा एनएचएआई और प्रशासन नहीं देगा तो किसान बड़ा आंदोलन करने को मजबूर होंगे। बैठक में मुख्य रुप से किसान संघर्ष समिति के अध्यक्ष ठाकुर वीर सिंह, सचिव विदेश मलिक, भाकियू जिलाध्यक्ष कपिल खाटियान, युद्धवीर मलिक, जितेंद्र अहलावत, विजेंद्र सिंह, योगेंद्र प्रधान, प्रमोद कुमार, हाजी तुफैल अहमद, डॉ. तेजपाल समेत आदि किसान उपस्थित रहे।
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वर्जन
एसडीएम सदर बृजेश कुमार सिंह ने बताया कि सर्किल रेट बढ़ाकर मुआवजा नहीं दिया जा सकता है। किसानों की नलकूप, पेड़, बाग, आवास भूमि भवन आदि की मौके पर समस्याओं का लिखित आवेदन करने पर समस्याओें का निस्तारण किया जाएगा।
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कलक्ट्रेट सभाकक्ष में शुक्रवार दोपहर साढे 12 बजे एनएचएआई के अधिकारियों, एसडीएम सदर बृजेश कुमार सिंह की मौजूदगी में दिल्ली-देहरादून इकनॉमिक कॉरिडोर एक्सप्रेसवे की किसान संघर्ष समिति के पदाधिकारियों की बैठक शुरू हुई। इस मौके पर एनएचएआई परियोजना निदेशक संजय मिश्रा के सामने किसानों ने सर्किल रेट को रिवाइज करके मुआवजे दिए जाने की मांग की। दो हिस्सों में बंटे खेत का अलग से 40 प्रतिशत मुआवजे दिए जाने, पुनर्वास, पुर्न विस्थापन के लिए 5.50 लाख रुपये दिए जाने और शिफ्टिंग के लिए 40 प्रतिशत अलग से मुआवजे की मांग की। कहा कि खड़ी फसल का मुआवजा और परिसंपत्तियों व ट्यूबवैल आदि का पुनर्मूल्यांकन करके मुआवजा दिया जाए। कुछ किसानों की जमीन अवार्ड में कम दिखाई गई है। निशान ज्यादा जमीन में लगे हैं।
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डेढ़ घंटे चली संयुक्त बैठक में किसानों के रखे गए मुद्दों पर परियोजना निदेशक संजय मिश्रा किसानों को संतुष्ट नहीं कर पाए। आखिर में किसानों ने प्रशासन और एनएचएआई के अधिकारियों को चेतावनी देते हुए बैठक के बहिष्कार का एलान कर दिया। किसानों ने कहा कि प्रशासन जमीन पर कब्जा करने की कोशिश न करें। सर्किल रेट को रिवाइज करके और तमाम प्रतिकर लागू करके मुआवजा एनएचएआई और प्रशासन नहीं देगा तो किसान बड़ा आंदोलन करने को मजबूर होंगे। बैठक में मुख्य रुप से किसान संघर्ष समिति के अध्यक्ष ठाकुर वीर सिंह, सचिव विदेश मलिक, भाकियू जिलाध्यक्ष कपिल खाटियान, युद्धवीर मलिक, जितेंद्र अहलावत, विजेंद्र सिंह, योगेंद्र प्रधान, प्रमोद कुमार, हाजी तुफैल अहमद, डॉ. तेजपाल समेत आदि किसान उपस्थित रहे।
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वर्जन
एसडीएम सदर बृजेश कुमार सिंह ने बताया कि सर्किल रेट बढ़ाकर मुआवजा नहीं दिया जा सकता है। किसानों की नलकूप, पेड़, बाग, आवास भूमि भवन आदि की मौके पर समस्याओं का लिखित आवेदन करने पर समस्याओें का निस्तारण किया जाएगा।