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जिला पंचायत की पहली बैठक हंगामे की भेंट चढ़ी
शामली/ ब्यूरो/ अमर उजाला
Updated Fri, 15 Jan 2016 01:27 AM IST
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शामली। जिला पंचायत की पहली बैठक ही अखाड़ा बन गई। सपा के जिला पंचायत सदस्यों ने मीटिंग में महिला जिला पंचायत सदस्यों के पति की मौजूदगी को मुद्दा बनाते हुए हंगामा कर दिया। दोनों पक्षों में भुगत लेने और देख लेने जैसी अभद्र भाषा का प्रयोग हुआ, जिसके बाद अपर जिलाधिकारी ने शासनादेश का हवाला देकर महिला सदस्यों के पतियों को बाहर जाने को कहा। इस पर अध्यक्ष संतोष देवी ने मीटिंग स्थगित कर दी। अब शुक्रवार को फिर से मीटिंग बुलाई गई है।
बृहस्पतिवार को दोपहर बाद करीब तीन बजे कलक्ट्रेट सभाकक्ष में विपक्षी (सपा खेमे के) सदस्यों मनीष चौहान, शेफाली चौहान, अनिल टीनू, मोहसिन चौधरी, पंजाब सिंह और शेर सिंह राणा की शपथ हुई। इसके बाद बोर्ड मीटिंग शुरू होनी थी, लेकिन सभाकक्ष में जिला पंचायत अध्यक्ष संतोष देवी के पति प्रसन्न चौधरी, जिला पंचायत सदस्य बिलकिश के पति वाजिद चौधरी, सुषमा के पति अनिल चौहान तथा मौलाना रज्जाक की मौजूदगी पर विरोध शुरू हो गया।
जिला पंचायत सदस्य अनिल टीनू और मनीष चौहान ने अपर मुख्य अधिकारी नरेंद्र बहादुर सिंह से कहा कि शासनादेश के मुताबिक जिला पंचायत सदस्य ही बोर्ड मीटिंग में मौजूद रह सकता है। सदस्य के पति या परिजन बैठक में मौजूद नहीं रहेंगे। लिहाजा सदस्यों के परिजनों को मीटिंग से बाहर निकाला जाए। जिला पंचायत के अपर मुख्य अधिकारी नरेंद्र बहादुर ने शासनादेश की पुष्टि करते हुए जिला पंचायत अध्यक्ष पति प्रसन्न चौधरी, सदस्य बिलकिश के पति वाजिद अली सहित अन्य लोगों को बाहर जाने के लिए कहा। इस पर प्रसन्न चौधरी और उनके साथियों ने कहा कि क्या शामली से ही शासनादेश लागू होगा।
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उन्होंने मीटिंग से बाहर जाने से इंकार कर दिया, जिस पर मनीष चौहान, शेर सिंह राणा और अनिल टीनू ने कड़ी आपत्ति जताई, जिसके चलते दोनों पक्षों में गरमाहट बढ़ गई और देख लेने, भुगतने की धमकी तक दे दी गई। मीटिंग हाल में हंगामा बढ़ने पर अपर जिलाधिकारी भरत पांडे वहां पहुंचे और शासनादेश पढ़कर सुनाते हुए सदस्यों के परिजनों को बाहर जाने के लिए कहा, अन्यथा पुलिस बुलाकर बाहर निकालने की हिदायत दी। जिला पंचायत सदस्य सुषमा के पति अनिल चौहान ने कहा कि बैठक के एजेंडा के साथ निर्वाचित सदस्य के पति एवं परिजन वाला शासनादेश भेजना चाहिए था।
सदस्य मनीष चौहान ने कहा कि यह व्यवस्था अध्यक्ष पक्ष की ओर से की जानी चाहिए थी। इसके बाद जिला पंचायत अध्यक्ष संतोष देवी ने बैठक को स्थगित कर दिया। उन्होंने मनीष चौहान से यह भी कहा कि आप बैठक में क्या लड़ने आए हो। अब शुक्रवार को बोर्ड की बैठक होगी, यह कहकर वह बाहर निकल गईं। बैठक स्थगित होते ही वहां मौजूद जिला स्तरीय अधिकारी और अध्यक्ष समर्थक बाहर निकल आए।
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बृहस्पतिवार को दोपहर बाद करीब तीन बजे कलक्ट्रेट सभाकक्ष में विपक्षी (सपा खेमे के) सदस्यों मनीष चौहान, शेफाली चौहान, अनिल टीनू, मोहसिन चौधरी, पंजाब सिंह और शेर सिंह राणा की शपथ हुई। इसके बाद बोर्ड मीटिंग शुरू होनी थी, लेकिन सभाकक्ष में जिला पंचायत अध्यक्ष संतोष देवी के पति प्रसन्न चौधरी, जिला पंचायत सदस्य बिलकिश के पति वाजिद चौधरी, सुषमा के पति अनिल चौहान तथा मौलाना रज्जाक की मौजूदगी पर विरोध शुरू हो गया।
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जिला पंचायत सदस्य अनिल टीनू और मनीष चौहान ने अपर मुख्य अधिकारी नरेंद्र बहादुर सिंह से कहा कि शासनादेश के मुताबिक जिला पंचायत सदस्य ही बोर्ड मीटिंग में मौजूद रह सकता है। सदस्य के पति या परिजन बैठक में मौजूद नहीं रहेंगे। लिहाजा सदस्यों के परिजनों को मीटिंग से बाहर निकाला जाए। जिला पंचायत के अपर मुख्य अधिकारी नरेंद्र बहादुर ने शासनादेश की पुष्टि करते हुए जिला पंचायत अध्यक्ष पति प्रसन्न चौधरी, सदस्य बिलकिश के पति वाजिद अली सहित अन्य लोगों को बाहर जाने के लिए कहा। इस पर प्रसन्न चौधरी और उनके साथियों ने कहा कि क्या शामली से ही शासनादेश लागू होगा।
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उन्होंने मीटिंग से बाहर जाने से इंकार कर दिया, जिस पर मनीष चौहान, शेर सिंह राणा और अनिल टीनू ने कड़ी आपत्ति जताई, जिसके चलते दोनों पक्षों में गरमाहट बढ़ गई और देख लेने, भुगतने की धमकी तक दे दी गई। मीटिंग हाल में हंगामा बढ़ने पर अपर जिलाधिकारी भरत पांडे वहां पहुंचे और शासनादेश पढ़कर सुनाते हुए सदस्यों के परिजनों को बाहर जाने के लिए कहा, अन्यथा पुलिस बुलाकर बाहर निकालने की हिदायत दी। जिला पंचायत सदस्य सुषमा के पति अनिल चौहान ने कहा कि बैठक के एजेंडा के साथ निर्वाचित सदस्य के पति एवं परिजन वाला शासनादेश भेजना चाहिए था।
सदस्य मनीष चौहान ने कहा कि यह व्यवस्था अध्यक्ष पक्ष की ओर से की जानी चाहिए थी। इसके बाद जिला पंचायत अध्यक्ष संतोष देवी ने बैठक को स्थगित कर दिया। उन्होंने मनीष चौहान से यह भी कहा कि आप बैठक में क्या लड़ने आए हो। अब शुक्रवार को बोर्ड की बैठक होगी, यह कहकर वह बाहर निकल गईं। बैठक स्थगित होते ही वहां मौजूद जिला स्तरीय अधिकारी और अध्यक्ष समर्थक बाहर निकल आए।