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एक महीने तक अंदर खाने चलती रही कवायद

Wed, 03 Jun 2020 11:54 PM IST
Meerut Bureau मेरठ ब्यूरो
Updated Wed, 03 Jun 2020 11:54 PM IST
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The exercise continued inside the hospital for a month
एक महीने तक अंदरखाने चलती रही कवायद
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शामली। कांधला में मनरेगा के तहत विकास कार्य कराने के नाम पर घोटाले का खुलासा होने के बाद वेंडरों के खाते में गई रकम लाने को एक महीने तक अंदरखाने कवायद चलती रही। जब सरकारी खाते में रकम वापस आ गई, तब प्रशासन ने इसका खुलासा किया। हालांकि गत दो मई को ही इस संबंध में कांधला बीडीओ को जिला मुख्यालय से संबद्ध करके निलंबन की संस्तुति कर शासन को रिपोर्ट भेज दी गई थी।
परियोजना निदेशक के अनुसार 21 लाख 669 रुपये की धनराशि मार्च और अप्रैल में पांचों फर्म के खातों में ट्रांसफर हुई। इतनी बड़ी रकम खाते में आने के बाद फर्मों को भी पता चला होगा, ऐसे में फर्मों को भी खुद ही सामने आना चाहिए था। सवाल उठता है कि आखिर फर्म चुप क्यों थीं। यदि घपला न खुलता तो संभव है कि ये रकम भी बंदरबांट हो सकती थी। घपले की रकम बड़ी थी, इसलिए बड़े अफसरों की भी जवाबदेही बनती। लिहाजा प्रशासन ने मामले पर अंदरखाने ही कार्रवाई जारी रखी।
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खाते फ्रीज कर फर्मों पर बनाया दबाव
घोटाले में वेंडर्स के खाते में गई रकम को वापस सरकारी खाते में लाना बड़ी चुनौती थी। अफसरों को लगा कि यदि रकम वापस आ जाएगी तो शासन को जवाब देने की स्थिति में रहेंगे। इसलिए संबंधित फर्मों के खाते फ्रीज करा दिए और रकम वापसी का दबाव बनाया। सरकारी रकम वापस आने के बाद ही प्रकरण का खुलासा किया और वेंडर्स को ब्लैक लिस्ट करने को नोटिस जारी कर दिए।
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शासन ने भी नहीं लिया संज्ञान
हैरानी की बात है कि शासन को रिपोर्ट जाने के बाद भी कोई कार्रवाई नहीं हुई है। जिलाधिकारी जसजीत कौर के अनुसार उन्होंने इस संबंध में रिपोर्ट शासन स्तर को भेज दी है। काफी पहले ही बीडीओ के निलंबन की संस्तुति भी कर दी थी। कार्रवाई होनी बाकी है।

कोट
यदि मामले को पहले सार्वजनिक किया जाता तो सभी पक्ष बचाव के लिए हथकंडे अपनाते। हमारी प्राथमिकता गलत करने वालों पर कार्रवाई के साथ सरकारी रकम को वापस लाने की थी। वेंडर्स से रकम वापस ले ली गई है और उन्हें ब्लैक लिस्टेड करने के नोटिस दिए गए हैं। - जसजीत कौर, डीएम शामली
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