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Shamli News: कुट्टू की पकौड़ी खाने से परिवार के पांच सदस्यों की हालत बिगड़ी
Wed, 09 Oct 2024 03:24 AM IST
मेरठ ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, शामली
संवाद न्यूज एजेंसी, शामली
Updated Wed, 09 Oct 2024 03:24 AM IST
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शामली सीएचसी में भर्ती कुट्टू के आटे की पकोड़ी के सेवन से बीमार हुए परिवार के सदस्य । संवाद
शामली। शहर के दयानंद नगर मोहल्ले में कुट्टू के आटे की पकौड़ी खाने से मंगलवार तड़के एक ही परिवार के पांच सदस्यों की हालत बिगड़ गई, जिन्हें सीएचसी में भर्ती कराया, जहां से उन्हें जिला अस्पताल के लिए रेफर कर दिया गया। खाद्य विभाग की टीम ने जिलेभर में छापामार अभियान चलाया।
दयानंद नगर के रहने वाले ओमपाल सिंह ने बताया कि वह सोमवार की शाम को शामली के बाजार से कुट्टू का आटा लेकर आए थे। परिवार में व्रत के कारण सभी ने कुट्टू की पकौड़ी खाई। मंगलवार को तड़के करीब 4 बजे अचानक ही उन्हें चक्कर आने शुरू हो गए। पत्नी राखी, बेटी शिवानी, आरती, अंकुश ने भी चक्कर आने की शिकायत की। जिस पर सभी को सीएचसी ले जाया गया। खाद्य विभाग के सहायक आयुक्त खाद्य ग्रेड 2 पंकज कुमार कि जिलेभर में छापामारी कराई जा रही है। मिलावटी या पुराना कुट्टू का आटा बेचने वालों के खिलाफ कार्रवाई अमल में लाई जाएगी।
एफलाटॉक्सिन फंगस से होती है फूड प्वाइजनिंग
पंकज कुमार के अनुसार कूट्टू के आटे में अरारोट, किनकी और काला रंग मिलाया जाता है। वहीं सिंघाड़े के आटे में चावल की भूसी, अरारोट मिलाया जाता है। पुराना आटा होने पर एफलाटॉक्सिन फंगस आटे में लग जाता है, जिससे फूड प्वाइजनिंग की शिकायत होने लगती है। बताया कि एफलाटॉक्सिन एक विषाक्त पदार्थ है जो फंगस से पैदा होता है।
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उल्टी की हुई थी शिकायत, विक्रेता का नहीं लगा पता
खाद्य विभाग के अधिकारियों ने बताया कि जांच में पता चला है कि परिवार के सदस्यों को उल्टी की शिकायत हुई थी। जिस दुकानदार से आटा खरीदने की बात परिवार के सदस्यों ने बताई है, उसने आटा बेचने की बात से ही इनकार किया है। चौलाई के लड्डू, किशमिश के सैंपल लिए गए हैं। विक्रेता का पता किया जा रहा है। परिवार के सदस्य भी सही से विक्रेता के बारे में जानकारी नहीं दे पा रहे।
साबुत कुट्टू या सिंगाडा खरीद लें
खाद्य विभाग के सहायक आयुक्त के अनुसार अधिक पुराने कुट्टे के सेवन से बीमार होने की संभावना अधिक रहती है। इसलिए लोगों को चाहिए कि वह साबुत कुट्टू या फिर सिंगाडा का आटा खरीद लें। घर पर उसे पीसकर सेवन करें। बताया कि एक सप्ताह के अंदर शामली, कैराना, थानाभवन, जलालाबाद से कुट्टू , सिंगाडे के आटे, मूंगफली, रिफाइंड के दस सैंपल लिए गए हैं। अभियान आगे भी जारी रहेगा।
ऐसे करें मिलावट-खराब आटे की पहचान
- कूट्टू के आटे में नमी हो तो उसमें मिलावट या खराब होने की आशंका अधिक होती है।
: कुट्टू का आटा छह दिन से अधिक का नहीं होना चाहिए।
- कूट्टू के आटे का रंग हल्का गहरा न हो।
- आटे को गूंथते समय बिखरना नहीं चाहिए।
- सिंघाड़े के मिलावटी आटे में अरारोट के कारण चिकनाहट होती है।
- साबुत कुट्टू खरीदकर उसे पिसवाना सबसे बेहतर है।
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दयानंद नगर के रहने वाले ओमपाल सिंह ने बताया कि वह सोमवार की शाम को शामली के बाजार से कुट्टू का आटा लेकर आए थे। परिवार में व्रत के कारण सभी ने कुट्टू की पकौड़ी खाई। मंगलवार को तड़के करीब 4 बजे अचानक ही उन्हें चक्कर आने शुरू हो गए। पत्नी राखी, बेटी शिवानी, आरती, अंकुश ने भी चक्कर आने की शिकायत की। जिस पर सभी को सीएचसी ले जाया गया। खाद्य विभाग के सहायक आयुक्त खाद्य ग्रेड 2 पंकज कुमार कि जिलेभर में छापामारी कराई जा रही है। मिलावटी या पुराना कुट्टू का आटा बेचने वालों के खिलाफ कार्रवाई अमल में लाई जाएगी।
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एफलाटॉक्सिन फंगस से होती है फूड प्वाइजनिंग
पंकज कुमार के अनुसार कूट्टू के आटे में अरारोट, किनकी और काला रंग मिलाया जाता है। वहीं सिंघाड़े के आटे में चावल की भूसी, अरारोट मिलाया जाता है। पुराना आटा होने पर एफलाटॉक्सिन फंगस आटे में लग जाता है, जिससे फूड प्वाइजनिंग की शिकायत होने लगती है। बताया कि एफलाटॉक्सिन एक विषाक्त पदार्थ है जो फंगस से पैदा होता है।
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उल्टी की हुई थी शिकायत, विक्रेता का नहीं लगा पता
खाद्य विभाग के अधिकारियों ने बताया कि जांच में पता चला है कि परिवार के सदस्यों को उल्टी की शिकायत हुई थी। जिस दुकानदार से आटा खरीदने की बात परिवार के सदस्यों ने बताई है, उसने आटा बेचने की बात से ही इनकार किया है। चौलाई के लड्डू, किशमिश के सैंपल लिए गए हैं। विक्रेता का पता किया जा रहा है। परिवार के सदस्य भी सही से विक्रेता के बारे में जानकारी नहीं दे पा रहे।
साबुत कुट्टू या सिंगाडा खरीद लें
खाद्य विभाग के सहायक आयुक्त के अनुसार अधिक पुराने कुट्टे के सेवन से बीमार होने की संभावना अधिक रहती है। इसलिए लोगों को चाहिए कि वह साबुत कुट्टू या फिर सिंगाडा का आटा खरीद लें। घर पर उसे पीसकर सेवन करें। बताया कि एक सप्ताह के अंदर शामली, कैराना, थानाभवन, जलालाबाद से कुट्टू , सिंगाडे के आटे, मूंगफली, रिफाइंड के दस सैंपल लिए गए हैं। अभियान आगे भी जारी रहेगा।
ऐसे करें मिलावट-खराब आटे की पहचान
- कूट्टू के आटे में नमी हो तो उसमें मिलावट या खराब होने की आशंका अधिक होती है।
: कुट्टू का आटा छह दिन से अधिक का नहीं होना चाहिए।
- कूट्टू के आटे का रंग हल्का गहरा न हो।
- आटे को गूंथते समय बिखरना नहीं चाहिए।
- सिंघाड़े के मिलावटी आटे में अरारोट के कारण चिकनाहट होती है।
- साबुत कुट्टू खरीदकर उसे पिसवाना सबसे बेहतर है।