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Shamli News: आयोग ने निजी फाइनेंस कंपनी पर लगाया 50 हजार रुपये जुर्माना

Sat, 31 May 2025 12:50 AM IST
Meerut Bureau मेरठ ब्यूरो
Updated Sat, 31 May 2025 12:50 AM IST
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The commission imposed a fine of Rs 50,000 on a private finance company

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शामली। न्यायालय जिला उपभोक्ता विवाद प्रतितोष आयोग शामली ने किस्त समय पर अदा करने के बाद मिनी ट्रक को सीज करने के कारण निजी फाइनेंस कंपनी पर 50 हजार रुपये जुर्माने का आदेश सुनाया है।
शहर के मोहल्ला घेर बुखारी निवासी खुर्शीद आलम ने आयोग में चोला मंडलम इंवेस्टमेंट एंड फाइनेंस कंपनी मुजफ्फरनगर और मुख्य शाखा पैरस चेन्नई के विरुद्ध 27 अप्रैल 2017 को परिवाद दायर कराया था। वादी का कहना था कि उसने मिनी ट्रक विपक्षी के एजेंट के माध्यम से शामली में फाइनेंस कराया था। उसने फाइनेंस की समस्त धनराशि 282765 रुपये 23 मासिक किस्तों में समय से अदा किए। फाइनेंस की समय अवधि एक अक्तूबर 2015 से एक अगस्त 2017 थी। वादी को 14 दिसंबर 2016 को हिंडौन राजस्थान से एक ऑर्डर भाड़े पर माल लाने के लिए मिला था। उसकी गाड़ी राजस्थान माल लेने जा रही थी।
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15 दिसंबर 2016 को फाइनेंस कंपनी के कर्मचारियों ने मिनी ट्रक को सीज कर दिया और पार्किंग यार्ड में खड़ा कर दिया, जिस कारण वह माल लेने समय पर नहीं पहुंचने के कारण उसे 18 हजार रुपये भाड़ा व अन्य खर्चे समेत 50 हजार रुपये की क्षति हुई। वादी ने कर्मचारियों से सीज करने का कारण समय से किस्तों का भुगतान न होना बताया जबकि उसने अपनी किस्तों का भुगतान समय अवधि में किया। मिनी ट्रक को सीज करने से पहले वादी को कोई नोटिस या सूचना नहीं दी गई। पांच हजार रुपये जुर्माना देने के बाद रात में मिनी ट्रक को छोड़ा गया।
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आयोग के अध्यक्ष हेमंत कुमार गुप्ता ने परिवाद आंशिक रूप से स्वीकार किया और विपक्षी को आदेशित किया कि वह वादी के मिनी ट्रक के संबंध में अनापत्ति प्रमाण पत्र अविलंब प्रदान करें और समझौते के बाद यदि परिवहन विभाग द्वारा मिनी ट्रक के संबंध में कोई टैक्स अधिरोपित किया गया और वादी द्वारा उसका भुगतान किया गया है तो ऐसी स्थिति में उक्त भुगतान की गई धनराशि का पुन: भुगतान वादी को करें। विपक्षी के कार्यों से परिवादी को मानसिक, आर्थिक व शारीरिक क्षतिपूर्ति हेतु 25 हजार रुपये वादी को भुगतान किए जाने हेतु आयोग में जमा करें। विपक्षी द्वारा की गई सेवा में कमी के लिए 25 हजार रुपये के अर्थदंड से दंडित किया गया। अर्थदंड की धनराशि नियमानुसार राजकोष में जमा की जाएगी।
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