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नैतिक मूल्यों के पतन से टूट रही रिश्तों की डोर
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शामली। आज के भौतिकवादी युग में सबसे बड़ा खतरा अपनों से ही बना हुआ है। अपने ही अपनों की जान के दुश्मन बन रहे हैं। जिले में करीब एक माह के अंदर तीन ऐसी घटनाएं हुई है, जिनमें रिश्तों का कत्ल हुआ है और सामाजिक मान मर्यादा तार-तार हुई है। इससे पहले भी इस तरह की घटनाएं हुई है। इन घटनाओं को लेकर समाज शास्त्री और मनोविज्ञानी से बात की गई तो उनका कहना है कि समाज में नैतिक मूल्यों का पतन तेजी से हो रही है, जिसके चलते रिश्तों की परवाह नहीं कर रहे हैं।
केस-एक
पिछले महीने 19 दिसंबर को गांव खंद्रावली में गन्ना पर्यवेक्षक की बैठक के स्थान को लेकर हुए विवाद को लेकर फायरिंग हो गई थी। इस घटना में कर्मवीर और राहुल की गोली लगने से मौत हो गई थी। घटना में निवर्तमान प्रधान सोमपाल और उसके पुत्र समेत तीन के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज हुई थी। मृतक कर्मवीर आरोपी प्रधान सोमपाल का सगा भतीजा था।
केस-दो
गढ़ीपुख्ता थानाक्षेत्र के गांव भाटू के जंगल में 10 जनवरी को संजय निवासी गांव पिंडोरा जहांगीरपुर का शव मिला था। पुलिस ने हत्या के आरोप में मृतक के सगे भाई बबलू को गिरफ्तार किया था। बबलू ने अपने भाई संजय की हत्या महज इसलिए कर दी थी कि छह जनवरी को किसी बात को लेकर हुए विवाद संजय ने अपने पिता पर फावड़े से प्रहार कर दिया था, जिसमें उसकी मौत हो गई थी। पिता की हत्या का बदला लेने के लिए भाई ने भाई की हत्या कर दी थी।
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केस-तीन
आदर्श मंडी थानाक्षेत्र के गांव गोहरनी में 17 जनवरी को घर के बाहर तेजपाल उर्फ तेजू का शव बरामद हुआ था। दो दिन बाद पुलिस ने हत्या के आरोप में मृतक की पत्नी पिंकी को गिरफ्तार कर खुलासा किया था कि पति की गलत आदतों से परेशान होकर उसने हत्या कर दी और 24 घंटे तक शव को घर में ही छिपाए रखा था।
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समाज में नैतिक मूल्य खत्म होते जा रहे हैं। संयुक्त परिवार टूटते जा रहा है। एकल परिवार होने के कारण बड़े बुजुर्ग या समझाने वाला कोई नहीं होता। अकेलापन होने से मन में कुंठा बढ़ रही है, जिस कारण रिश्तों और मान मर्यादा की कोई परवाह नहीं होती और छोटी-छोटी बातों को लेकर बड़ी घटनाओं को अंजाम दे देते हैं। इस तरह की घटनाओं को रोकने के लिए समाज के लोगों को सोचना होगा। आज के युवा और बच्चों को देश के महापुरुषों की जीवनी और प्रेरणादायक कहानियों आदि की जानकारी देनी चाहिए। - डा. विनीत चौहान, समाज शास्त्री।
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आधुनिक युग में जीवन के प्रत्येक क्षेत्र में आवश्यकता से अधिक अपेक्षाएं धीरे-धीरे कुंठा और अवसाद का रूप लेकर गंभीर मनोवैज्ञानिक समस्याओं का कारण बनती है। आधुनिक जीवन शैली के वर्तमान स्वरूप में समय, सीमा और सामर्थ्य का आकलन किए बिना शीघ्र से शीघ्र सफलता पाने की दौड़ और मन मुताबिक अपेक्षाओं का पूर्ण न होना मानसिक दबाव में कब स्वयं पर नियंत्रण हाथ से निकल जाता है, इसका पता ही नहीं चलता। जीवन के प्रत्येक क्षेत्र में आवश्यकता भर में संतुष्टि खोज लेना और खुशियों के अवसर स्वीकृति की सहजता से जीने की कला ही इसका समाधान है। - डा. अजय बाबू शर्मा, मेंटल हेल्थ मेंटर मुस्कराएगा इंडिया अभियान, एनएसएस।
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केस-एक
पिछले महीने 19 दिसंबर को गांव खंद्रावली में गन्ना पर्यवेक्षक की बैठक के स्थान को लेकर हुए विवाद को लेकर फायरिंग हो गई थी। इस घटना में कर्मवीर और राहुल की गोली लगने से मौत हो गई थी। घटना में निवर्तमान प्रधान सोमपाल और उसके पुत्र समेत तीन के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज हुई थी। मृतक कर्मवीर आरोपी प्रधान सोमपाल का सगा भतीजा था।
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केस-दो
गढ़ीपुख्ता थानाक्षेत्र के गांव भाटू के जंगल में 10 जनवरी को संजय निवासी गांव पिंडोरा जहांगीरपुर का शव मिला था। पुलिस ने हत्या के आरोप में मृतक के सगे भाई बबलू को गिरफ्तार किया था। बबलू ने अपने भाई संजय की हत्या महज इसलिए कर दी थी कि छह जनवरी को किसी बात को लेकर हुए विवाद संजय ने अपने पिता पर फावड़े से प्रहार कर दिया था, जिसमें उसकी मौत हो गई थी। पिता की हत्या का बदला लेने के लिए भाई ने भाई की हत्या कर दी थी।
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केस-तीन
आदर्श मंडी थानाक्षेत्र के गांव गोहरनी में 17 जनवरी को घर के बाहर तेजपाल उर्फ तेजू का शव बरामद हुआ था। दो दिन बाद पुलिस ने हत्या के आरोप में मृतक की पत्नी पिंकी को गिरफ्तार कर खुलासा किया था कि पति की गलत आदतों से परेशान होकर उसने हत्या कर दी और 24 घंटे तक शव को घर में ही छिपाए रखा था।
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समाज में नैतिक मूल्य खत्म होते जा रहे हैं। संयुक्त परिवार टूटते जा रहा है। एकल परिवार होने के कारण बड़े बुजुर्ग या समझाने वाला कोई नहीं होता। अकेलापन होने से मन में कुंठा बढ़ रही है, जिस कारण रिश्तों और मान मर्यादा की कोई परवाह नहीं होती और छोटी-छोटी बातों को लेकर बड़ी घटनाओं को अंजाम दे देते हैं। इस तरह की घटनाओं को रोकने के लिए समाज के लोगों को सोचना होगा। आज के युवा और बच्चों को देश के महापुरुषों की जीवनी और प्रेरणादायक कहानियों आदि की जानकारी देनी चाहिए। - डा. विनीत चौहान, समाज शास्त्री।
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आधुनिक युग में जीवन के प्रत्येक क्षेत्र में आवश्यकता से अधिक अपेक्षाएं धीरे-धीरे कुंठा और अवसाद का रूप लेकर गंभीर मनोवैज्ञानिक समस्याओं का कारण बनती है। आधुनिक जीवन शैली के वर्तमान स्वरूप में समय, सीमा और सामर्थ्य का आकलन किए बिना शीघ्र से शीघ्र सफलता पाने की दौड़ और मन मुताबिक अपेक्षाओं का पूर्ण न होना मानसिक दबाव में कब स्वयं पर नियंत्रण हाथ से निकल जाता है, इसका पता ही नहीं चलता। जीवन के प्रत्येक क्षेत्र में आवश्यकता भर में संतुष्टि खोज लेना और खुशियों के अवसर स्वीकृति की सहजता से जीने की कला ही इसका समाधान है। - डा. अजय बाबू शर्मा, मेंटल हेल्थ मेंटर मुस्कराएगा इंडिया अभियान, एनएसएस।