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खंभे हटाने के लिए होते रहे सर्वे, बढ़ती रही लागत
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शामली मेरठ करनाल मार्ग।
- फोटो : SHAMLI
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खंभे हटाने के लिए होते रहे सर्वे, बढ़ती रही लागत
शामली। राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण हाईवे के चौड़ीकरण की जद में आ रहे खंभों और तारों हटाने के लिए आंकलन (इस्टीमेट) की धनराशि सालों से अवमुक्त नहीं कर पाया है। इस लेटलतीफी से जिले से होकर गुजर रहे हाईवे और बाईपास की जद में आए खंभों को हटाने की लागत बढ़ती जा रही है। अब आंकलन करीब 50 करोड़ तक पहुंचने की संभावना है। प्राधिकरण के अधिकारियों के कहने पर एक बार फिर विद्युत निगम सर्वे कर दोबारा आंकलन तैयार करने में जुट गया है।
जिले में दिल्ली-शामली-सहारनपुर, मेरठ-करनाल, पानीपत-खटीमा हाईवे के चौड़ीकरण और शामली बाईपास निर्माण का कार्य प्रस्तावित है। दिल्ली-शामली-सहारनपुर मार्ग का फोरलेन का दूसरा पैकेज कार्य पिछले छह माह से चल रहा है। भविष्य में पानीपत-खटीमा और मेरठ-करनाल मार्ग बाईपास की सीमा से बाहर चौड़ीकरण कार्य शुरू होना है। फोरलेन और बाईपास की जद में आने वाले खंभे अभी नहीं हट पाए हैं। तीन साल पूर्व राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण बागपत इकाई के अफसरों के निर्देश पर मेेरठ-करनाल हाईवे के चौड़ीकरण के मद्देनजर पावर कारपोरेशन के अफसरों ने 47 किमी लंबाई वाले मेरठ-करनाल फोरलेन और शामली बाईपास का सर्वेक्षण कराया था।
सर्वेक्षण रिपोर्ट के अनुसार हरियाणा सीमा पर बिड़ौली यमुना नदी के पुल से लेकर सेवापुर के पास शामली बाईपास की सीमा तक, मेरठ की ओर मुजफ्फरनगर जिले की सीमा लांक गांव से लेकर सिंभालका बाईपास सीमा तक और शामली बाईपास की जद में 1678 खंभे का 17 करोड़ रुपये की आंकलन तैयार करके एनएचएआई को धनराशि अवमुक्त कराने के लिए भेजा गया था। इसी प्रकार पानीपत-खटीमा हाईवे का कैराना यमुना पुल से बाबरी क्षेत्र की सीमा तक 13 करोड़ 51 लाख 95 हजार 396 रुपये का इस्टीमेट तैयार कराया गया था। दिल्ली-शामली-सहारनपुुर मार्ग का भी आंकलन तैयार हुआ था, लेकिन प्राधिकरण की बागपत इकाई की ओर से विद्युत निगम को धनराशि नहीं मिल पाई। तीन साल बाद एनएचएआई के अफसरों के कहने पर मेरठ-करनाल, दिल्ली-शामली-सहारनपुर और पानीपत-खटीमा फोरलेन एवं शामली बाईपास की जद मेें आ रहे खंभों का सर्वेक्षण और रिवाइज इस्टीमेट तैयार करने में अफसर फिर से जुट गए हैं। सभी हाईवे, बाईपास मिलाकर कुुल इस्टीमेट लागत 50 करोड़ रुपये की संभावना बन रही है।
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- सभी हाईवे और बाईपास के खंभे हटाने के लिए रिवाइज इस्टीमेट तैयार होने में फिलहाल तीन माह का समय लगेगा। तीन साल बाद खंभों की संख्या बढ़ने से रिवाइज इस्टीमेट भी जरूर बढ़ेगा। - जेके पाल, अधीक्षण अभियंता, पावर कारपोरेशन विभाग
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तीन साल पूर्व खंभों की सर्वेक्षण रिपोर्ट
मेरठ-करनाल मार्ग की जनपद में लंबाई : 47 किमी
नौ किमी लंबाई वाले शामली बाईपास की जद में गांव : सिंभालका, बनत, साईधाम, मुंडेट कंला, गोहरनी, बधेव, टिटौली।
मुजफ्फरनगर सीमा से सिंभालका बाईपास तक 343 खंभे
बिड़ौली से टिटौली तक 1213 खंभे
नौ किमी शामली बाईपास पर 122 खंभे
बिजली के खंभों का कुल इस्टीमेट 17 करोड़
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शामली। राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण हाईवे के चौड़ीकरण की जद में आ रहे खंभों और तारों हटाने के लिए आंकलन (इस्टीमेट) की धनराशि सालों से अवमुक्त नहीं कर पाया है। इस लेटलतीफी से जिले से होकर गुजर रहे हाईवे और बाईपास की जद में आए खंभों को हटाने की लागत बढ़ती जा रही है। अब आंकलन करीब 50 करोड़ तक पहुंचने की संभावना है। प्राधिकरण के अधिकारियों के कहने पर एक बार फिर विद्युत निगम सर्वे कर दोबारा आंकलन तैयार करने में जुट गया है।
जिले में दिल्ली-शामली-सहारनपुर, मेरठ-करनाल, पानीपत-खटीमा हाईवे के चौड़ीकरण और शामली बाईपास निर्माण का कार्य प्रस्तावित है। दिल्ली-शामली-सहारनपुर मार्ग का फोरलेन का दूसरा पैकेज कार्य पिछले छह माह से चल रहा है। भविष्य में पानीपत-खटीमा और मेरठ-करनाल मार्ग बाईपास की सीमा से बाहर चौड़ीकरण कार्य शुरू होना है। फोरलेन और बाईपास की जद में आने वाले खंभे अभी नहीं हट पाए हैं। तीन साल पूर्व राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण बागपत इकाई के अफसरों के निर्देश पर मेेरठ-करनाल हाईवे के चौड़ीकरण के मद्देनजर पावर कारपोरेशन के अफसरों ने 47 किमी लंबाई वाले मेरठ-करनाल फोरलेन और शामली बाईपास का सर्वेक्षण कराया था।
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सर्वेक्षण रिपोर्ट के अनुसार हरियाणा सीमा पर बिड़ौली यमुना नदी के पुल से लेकर सेवापुर के पास शामली बाईपास की सीमा तक, मेरठ की ओर मुजफ्फरनगर जिले की सीमा लांक गांव से लेकर सिंभालका बाईपास सीमा तक और शामली बाईपास की जद में 1678 खंभे का 17 करोड़ रुपये की आंकलन तैयार करके एनएचएआई को धनराशि अवमुक्त कराने के लिए भेजा गया था। इसी प्रकार पानीपत-खटीमा हाईवे का कैराना यमुना पुल से बाबरी क्षेत्र की सीमा तक 13 करोड़ 51 लाख 95 हजार 396 रुपये का इस्टीमेट तैयार कराया गया था। दिल्ली-शामली-सहारनपुुर मार्ग का भी आंकलन तैयार हुआ था, लेकिन प्राधिकरण की बागपत इकाई की ओर से विद्युत निगम को धनराशि नहीं मिल पाई। तीन साल बाद एनएचएआई के अफसरों के कहने पर मेरठ-करनाल, दिल्ली-शामली-सहारनपुर और पानीपत-खटीमा फोरलेन एवं शामली बाईपास की जद मेें आ रहे खंभों का सर्वेक्षण और रिवाइज इस्टीमेट तैयार करने में अफसर फिर से जुट गए हैं। सभी हाईवे, बाईपास मिलाकर कुुल इस्टीमेट लागत 50 करोड़ रुपये की संभावना बन रही है।
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- सभी हाईवे और बाईपास के खंभे हटाने के लिए रिवाइज इस्टीमेट तैयार होने में फिलहाल तीन माह का समय लगेगा। तीन साल बाद खंभों की संख्या बढ़ने से रिवाइज इस्टीमेट भी जरूर बढ़ेगा। - जेके पाल, अधीक्षण अभियंता, पावर कारपोरेशन विभाग
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तीन साल पूर्व खंभों की सर्वेक्षण रिपोर्ट
मेरठ-करनाल मार्ग की जनपद में लंबाई : 47 किमी
नौ किमी लंबाई वाले शामली बाईपास की जद में गांव : सिंभालका, बनत, साईधाम, मुंडेट कंला, गोहरनी, बधेव, टिटौली।
मुजफ्फरनगर सीमा से सिंभालका बाईपास तक 343 खंभे
बिड़ौली से टिटौली तक 1213 खंभे
नौ किमी शामली बाईपास पर 122 खंभे
बिजली के खंभों का कुल इस्टीमेट 17 करोड़