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पिछले तीन सालों में गन्ने की लागत 50- 60 रुपये क्विंटल बढ़ी- - बोले किसान नेता- 400- 450 रुपये प्रति क्विंटल गन्ने क भाव घ
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शामली। पिछले तीन सालों में किसान की गन्ने की लागत मूल्य डीजल, बिजली, पेस्टीसाइड के मूल्यों एवं मजदूरी बढ़ने के कारण गन्ने का खर्च 50-60 रुपये क्विंटल बढ़ रही है। किसानों और किसान संगठनों ने बसपा सुप्रीमो मायावती और पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश सरकार की तर्ज पर गन्ना का मूल्य 400 रुपये से लेकर 450 रुपये क्विंटल घोषित किए जाने की मांग उठाई है।
भैंसवाल गांव के प्रगतिशील किसान और सपा के राष्ट्रीय प्रवक्ता सुधीर पंवार का कहना है कि इस वर्ष डीजल एवं बिजली के दामों में भारी वृद्धि के बाद गन्ना उत्पादन लागत में केवल छह रुपये क्विंटल की बढ़ोतरी हुई है। इस वर्ष 0238 में फंगस की बीमारी होने के कारण गन्ना उत्पादन कम होने तथा कीटनाशकों के अधिक छिड़काव से लागत मूल्यों बढ़ोतरी हुई है। भाजपा सरकार ने चीनी के न्यूनतम मूल्यों में दो रुपये किलो तथा इथेनॉल पर 3.34 रुपये लीटर की बढ़ोतरी कर इस सत्र के लिए चीनी मिलों को 24-28 रुपये क्विंटल की अतिरिक्त आमदनी का प्रबंध कर दिया है। गन्ना मंत्री सुुरेश राणा पर निशाना साधते हुए कहा कि किसानों को लागत मूल्यों पर 50 प्रतिशत लाभ देने का प्रचार करती है, उत्तर प्रदेश भाजपा के नेता एवं गन्ना मंत्री सुरेश राणा विपक्ष में रहते हुए सदन एवं सभाओं में 400 रुपये क्विंटल करते रहे हैं। भाजपा के नेता अपना वायदा निभाते हुए इस सत्र में गन्ने का एसएपी 400 रुपये प्रति क्विंटल घोषित करें।
माया-अखिलेश की तर्ज पर मुख्यमंत्री गन्ने का मूल्य बढ़ाएं
शामली। भाकियू के राष्ट्रीय प्रवक्ता राकेश टिकैत का कहना है कि बसपा सुप्रीमो मायावती ने अपने कार्यकाल में 80 रुपये प्रति क्विंटल, पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने अपने कार्यकाल में 50 रुपये प्रति क्विंटल बढ़ाकर गन्ने को भाव दिया। भाजपा सरकार में योगी आदित्यनाथ ने अपने तीन साल में गन्ने का कोई भी भाव नही बढ़ाया है। मुख्यमंत्री योगी, मायावती और अखिलेश यादव से कमजोर नहीं है। वह भी मायावती-अखिलेश की तरह उतना भाव बढ़ाकर दे। सरकारी गन्ने के खर्च 300 रुपये की लागत के आधार को देखते हुए 450 रुपये और महंगाई को देखते हुए कम से कम 400 रुपये क्विंटल का भाव घोषित करे।
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भैंसवाल गांव के प्रगतिशील किसान और सपा के राष्ट्रीय प्रवक्ता सुधीर पंवार का कहना है कि इस वर्ष डीजल एवं बिजली के दामों में भारी वृद्धि के बाद गन्ना उत्पादन लागत में केवल छह रुपये क्विंटल की बढ़ोतरी हुई है। इस वर्ष 0238 में फंगस की बीमारी होने के कारण गन्ना उत्पादन कम होने तथा कीटनाशकों के अधिक छिड़काव से लागत मूल्यों बढ़ोतरी हुई है। भाजपा सरकार ने चीनी के न्यूनतम मूल्यों में दो रुपये किलो तथा इथेनॉल पर 3.34 रुपये लीटर की बढ़ोतरी कर इस सत्र के लिए चीनी मिलों को 24-28 रुपये क्विंटल की अतिरिक्त आमदनी का प्रबंध कर दिया है। गन्ना मंत्री सुुरेश राणा पर निशाना साधते हुए कहा कि किसानों को लागत मूल्यों पर 50 प्रतिशत लाभ देने का प्रचार करती है, उत्तर प्रदेश भाजपा के नेता एवं गन्ना मंत्री सुरेश राणा विपक्ष में रहते हुए सदन एवं सभाओं में 400 रुपये क्विंटल करते रहे हैं। भाजपा के नेता अपना वायदा निभाते हुए इस सत्र में गन्ने का एसएपी 400 रुपये प्रति क्विंटल घोषित करें।
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माया-अखिलेश की तर्ज पर मुख्यमंत्री गन्ने का मूल्य बढ़ाएं
शामली। भाकियू के राष्ट्रीय प्रवक्ता राकेश टिकैत का कहना है कि बसपा सुप्रीमो मायावती ने अपने कार्यकाल में 80 रुपये प्रति क्विंटल, पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने अपने कार्यकाल में 50 रुपये प्रति क्विंटल बढ़ाकर गन्ने को भाव दिया। भाजपा सरकार में योगी आदित्यनाथ ने अपने तीन साल में गन्ने का कोई भी भाव नही बढ़ाया है। मुख्यमंत्री योगी, मायावती और अखिलेश यादव से कमजोर नहीं है। वह भी मायावती-अखिलेश की तरह उतना भाव बढ़ाकर दे। सरकारी गन्ने के खर्च 300 रुपये की लागत के आधार को देखते हुए 450 रुपये और महंगाई को देखते हुए कम से कम 400 रुपये क्विंटल का भाव घोषित करे।
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