{"_id":"5a85ccae4f1c1b187e8b662f","slug":"sugar-produces-much-low-lifting-crisis-over-payments","type":"story","status":"publish","title_hn":"चीनी का उत्पादन ज्यादा, उठान कम, भुगतान पर संकट ","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
चीनी का उत्पादन ज्यादा, उठान कम, भुगतान पर संकट
ब्यूरो, अमर उजाला/ शामली
Updated Thu, 15 Feb 2018 11:46 PM IST
विज्ञापन
शामली चीनी मिल
- फोटो : अमर उजाला
शामली मेंं पिछले सालों की अपेक्षा इस बार चीनी का बंपर उत्पादन होने के बावजूद किसानों को समय पर गन्ना मूल्य का भुगतान नहीं मिल रहा है। जिले की तीनों चीनी मिलों पर किसानों का 284 करोड़ 56 लाख रुपये बकाया हैं। शुगर मिल प्रबंधनों का तर्क है कि चीनी का उत्पादन ज्यादा हुआ है, लेकिन बाजार में दाम पहले से कम है तथा चीनी का उठान भी कम है।
वेस्ट यूपी के जिलो की शुगर मिलों से हरियाणा, राजस्थान, गुजरात, हिमाचल, दिल्ली और पंजाब में चीनी की बिक्री की जाती है। वहां से चीनी की मांग बढ़ने से भुगतान आने के बाद किसानों को भुुगतान मिलता रहता था। महाराष्ट्र की मिलों की सस्ती चीनी गुजरात, राजस्थान में प्रचुर मात्रा में आने से वेस्ट यूपी के मिलों की चीनी की मांग घट गई है। पिछले कई सालों से हरियाणा- पंजाब में गन्ने की बंपर पैदावार होने से यहां की चीनी की बिक्री को प्रभावित कर रही है। महाराष्ट्र की चीनी वेस्ट यूपी की मिलो की अपेक्षा 200 रुपये से लेकर 300 रुपये प्रति क्विंटल सस्ती बताई जा रही है।
इसी बात का सहारा लेकर चीनी मिल मालिकों द्वारा किसानों को बकाया गन्ना मूल्य का भुगतान नहीं किया जा रहा है। अभी तक शामली चीनी मिल ने 30 नवंबर तक, ऊन चीनी मिल ने 11 दिसंबर और थानाभवन मिल ने 10 दिसंबर तक का गन्ना मूल्य भुगतान किया है। वहीं, 15 फरवरी तक जिले की तीनों चीनी मिलों द्वारा 188.89 लाख क्विंटल गन्ना खरीद किया जा चुका है, जबकि भुगतान 15 फरवरी तक 240 करोड़ 79 लाख रुपये का ही हुआ है, जिसके चलते 284 करोड़ 56 लाख रुपये का भुुगतान अवशेष है।
विज्ञापन
मिल अधिकारियों ने कहा, कम है चीनी का उठान
थानाभवन शुगर मिल के वाइस प्रेेसीडेंट वीरपाल सिंह का कहना है कि इस साल चीनी मूल्य कम होने और बैंक लिमिट न होने की वजह से भुगतान में देरी हो रही है। मिल चीनी बेचकर 85 प्रतिशत भुगतान किसानों का करते हैं। मिल की उत्पादन की अपेक्षा पचास प्रतिशत चीनी की बिक्री हो पा रही है। बाहर के प्रांतों से चीनी मिल की मांग घट रही है।
ऊन चीनी मिल के गन्ना महाप्रबंधक अनिल अहलावत ने बताया कि बीते वर्ष 4.62 लाख क्विंटल चीनी का उत्पादन हुुआ था, जो समय से बिक गई थी। इस साल 4.25 लाख क्विंटल चीनी उत्पादन में से 2.51 लाख क्विंटल चीनी की बिक्री हो पाई है। उनका कहना है कि नवंबर में चीनी का दाम 3700 रुपये प्रति क्विंटल था, जो जनवरी में 3140 रुपये तक पहुंच गया। छह फरवरी के बाद चीनी के दाम में कुछ उछाल आया और 3400 रुपये प्रति क्विंटल हुआ है।
गन्ना खरीद और भुगतान की स्थिति
-- मिल------- गन्ना खरीद ----- भुुगतान ---- अवशेष भुगतान
शामली---- 64.82 लाख क्विंटल- 79.40 करोड़ रुपये-- 104 करोड़
थानाभवन-- 80. 77 लाख क्विंटल- 103.35 करोड़-- 120 करोड़
ऊन ------- 43.30 लाख क्विंटल -- 57.86 करोड़ रुपये-- 60.53 करोड़ रुपये
चीनी मूल्य का अंतर
वर्ष 2016- 17 -- 3300 रुपये से लेकर 3700 रूपये प्रति क्विंटल
वर्ष 2017- 18-- 3150 रूपये से लेकर 3400 रूपये प्रति क्विंटल।
विज्ञापन
वेस्ट यूपी के जिलो की शुगर मिलों से हरियाणा, राजस्थान, गुजरात, हिमाचल, दिल्ली और पंजाब में चीनी की बिक्री की जाती है। वहां से चीनी की मांग बढ़ने से भुगतान आने के बाद किसानों को भुुगतान मिलता रहता था। महाराष्ट्र की मिलों की सस्ती चीनी गुजरात, राजस्थान में प्रचुर मात्रा में आने से वेस्ट यूपी के मिलों की चीनी की मांग घट गई है। पिछले कई सालों से हरियाणा- पंजाब में गन्ने की बंपर पैदावार होने से यहां की चीनी की बिक्री को प्रभावित कर रही है। महाराष्ट्र की चीनी वेस्ट यूपी की मिलो की अपेक्षा 200 रुपये से लेकर 300 रुपये प्रति क्विंटल सस्ती बताई जा रही है।
विज्ञापन
इसी बात का सहारा लेकर चीनी मिल मालिकों द्वारा किसानों को बकाया गन्ना मूल्य का भुगतान नहीं किया जा रहा है। अभी तक शामली चीनी मिल ने 30 नवंबर तक, ऊन चीनी मिल ने 11 दिसंबर और थानाभवन मिल ने 10 दिसंबर तक का गन्ना मूल्य भुगतान किया है। वहीं, 15 फरवरी तक जिले की तीनों चीनी मिलों द्वारा 188.89 लाख क्विंटल गन्ना खरीद किया जा चुका है, जबकि भुगतान 15 फरवरी तक 240 करोड़ 79 लाख रुपये का ही हुआ है, जिसके चलते 284 करोड़ 56 लाख रुपये का भुुगतान अवशेष है।
विज्ञापन
मिल अधिकारियों ने कहा, कम है चीनी का उठान
थानाभवन शुगर मिल के वाइस प्रेेसीडेंट वीरपाल सिंह का कहना है कि इस साल चीनी मूल्य कम होने और बैंक लिमिट न होने की वजह से भुगतान में देरी हो रही है। मिल चीनी बेचकर 85 प्रतिशत भुगतान किसानों का करते हैं। मिल की उत्पादन की अपेक्षा पचास प्रतिशत चीनी की बिक्री हो पा रही है। बाहर के प्रांतों से चीनी मिल की मांग घट रही है।
ऊन चीनी मिल के गन्ना महाप्रबंधक अनिल अहलावत ने बताया कि बीते वर्ष 4.62 लाख क्विंटल चीनी का उत्पादन हुुआ था, जो समय से बिक गई थी। इस साल 4.25 लाख क्विंटल चीनी उत्पादन में से 2.51 लाख क्विंटल चीनी की बिक्री हो पाई है। उनका कहना है कि नवंबर में चीनी का दाम 3700 रुपये प्रति क्विंटल था, जो जनवरी में 3140 रुपये तक पहुंच गया। छह फरवरी के बाद चीनी के दाम में कुछ उछाल आया और 3400 रुपये प्रति क्विंटल हुआ है।
गन्ना खरीद और भुगतान की स्थिति
-- मिल------- गन्ना खरीद ----- भुुगतान ---- अवशेष भुगतान
शामली---- 64.82 लाख क्विंटल- 79.40 करोड़ रुपये-- 104 करोड़
थानाभवन-- 80. 77 लाख क्विंटल- 103.35 करोड़-- 120 करोड़
ऊन ------- 43.30 लाख क्विंटल -- 57.86 करोड़ रुपये-- 60.53 करोड़ रुपये
चीनी मूल्य का अंतर
वर्ष 2016- 17 -- 3300 रुपये से लेकर 3700 रूपये प्रति क्विंटल
वर्ष 2017- 18-- 3150 रूपये से लेकर 3400 रूपये प्रति क्विंटल।