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काम के समय पर पढ़ाई, दिनचर्या गड़बड़ाई

Fri, 23 Apr 2021 12:25 AM IST
Meerut Bureau मेरठ ब्यूरो
Updated Fri, 23 Apr 2021 12:25 AM IST
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Study on time, disturbance of routine
काम के समय पर पढ़ाई, दिनचर्या गड़बड़ाई
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शामली। कोरोना संक्रमण फैलने के कारण स्कूल एक बार फिर बंद हो गए हैं ऑनलाइन कक्षाएं शुरू कर दी गईं हैं। पिछले वर्ष की तरह ही महिलाओं के सामने बच्चों की पढ़ाई को लेकर समस्या खड़ी हो गई है। घरेलू कामकाज के समय कक्षाएं चलती हैं. जिससे महिलाओं की पूरी दिनचर्या गड़बड़ा गई हैं। उन्हें सुबह जल्दी उठकर कामकाज निपटाना पड़ता है, तो कुछ बच्चों की कक्षा पूरी होने के बाद रोजाना का काम निपटाती हैं। महिलाओं का कहना है कि बच्चों को पढ़ाने का पूरा बोझ अब उन पर आ गया है।
तीन घंटे लगातार कराती हैं पढ़ाई
शामली। ऋतु वत्स की बड़ी बेटी अनुष्का वत्स कक्षा सात तथा बेटा रुद्र वत्स कक्षा दो का छात्र है। दोनों की ऑनलाइन कक्षाएं सुबह सात बजे से चलती हैं। बड़ी बेटी तो खुद अपनी कक्षाएं अटैंड कर लेती हैं, लेकिन बेटे के साथ तीन घंटे लगातार समय देना पड़ता है। ऋतु बताती हैं कि घर का कामकाज निपटाने का यही समय होता है। इसी समय उन्हें बच्चों की पढ़ाई करानी होती है। जरूरी काम बीच-बीच में निपटा लेती हैं, लेकिन ज्यादातर काम क्लास खत्म होने के बाद ही निपटाती हैं। ऑनलाइन कक्षा में बच्चों की पूरी तरह समझ में नहीं आता। इसलिए घर पर उनके साथ अलग से मेहनत करनी पड़ती है।
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जल्दी उठकर निपटाती हैं काम
शामली। नाला रोड सब्जी मंडी निवासी पूनम शर्मा की बड़ी बेटी एंजल एलकेजी तथा छोटी बेटी अवनी नर्सरी की छात्रा है। दोनों की ऑनलाइन कक्षाएं चल रही हैं। वह बताती हैं कि दोनों बेटियां छोड़ी हैं। खुद कुछ नहीं समझ पाती, इसलिए दोनों को खुद ही पढ़ाना पड़ता है। उनकी कक्षा आठ बजे से शुरू होती है। इसलिए उन्हें सुबह पांच बजे उठकर घरेलू कामकाज निपटाना पड़ता है। अन्य कार्य दस बजे के बाद ही कर पाती हैं।
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घर का सारा कामकाज रहता है प्रभावित
शामली। दीप्ति वत्स अपनी दो बेटियों सिद्धि वत्स और अराध्या वत्स की ऑनलाइन कक्षा में व्यस्त रहती हैं। दोनों की कक्षा सुबह आठ से दोपहर 12 बजे तक चलती हैं। वह बताती हैं कि यही घरेलू कामकाज का समय रहता है। खाना बनाना, बर्तन एवं कपड़े धोने के साथ ही घर की साफ-सफाई का कार्य करना होता है। यह सारा काम कक्षाएं खत्म होने के बाद ही करती हैं।

खुद न पढ़ाएं तो बच्ची की समझ में कुछ न आए
शामली। रूई मिल कॉलोनी निवासी अन्नु शर्मा अपनी बेटी पीहू को रोजाना पढ़ाती हैं। वह बताती हैं कि सुबह ऑनलाइन कक्षा के दौरान उन्हें खुद बच्ची को पढ़ाना पड़ता है। यदि वह उसे न पढ़ाएं तो उसकी कुछ समझ में नहीं आएगा। इस दौरान उनका कोई काम नहीं हो पाता। कक्षा पूरी होने के बाद ही काम निपटाती हैं।
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