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विद्यार्थियों को वाटर लेवल इंडिकेटर बनाने का दिया प्रशिक्षण
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सेंट आरसी स्कूल में तकनीकी कार्यशाला का दूसरा दिन
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संवाद न्यूज एजेंसी
शामली। सेंट आरसी कान्वेंट स्कूल में तीन दिवसीय युवा कौशल तकनीकी कार्यशाला के दूसरे दिन विद्यार्थियों को वाटर लेवल इंडिकेटर बनाने का प्रशिक्षण दिया गया ।
कार्यशाला में शनिवार को प्रधानाचार्या मीनू संगल ने कहा कि आधुनिक युग विज्ञान का युग है। वर्तमान में वैज्ञानिकों ने हर क्षेत्र में आविष्कार करके मानव जीवन को अत्यंत सरल एवं सुलभ बना दिया है। जल ही जीवन है यह वास्तविकता है, लेकिन जल की बर्बादी और वनों के अंधाधुंध कटान के कारण बारिश कम होती है। इससे भूजल स्तर लगातार घट रहा है। जिस कारण भविष्य में मानव जाति को जल संकट का सामना करना पड़ेगा। इसलिए प्रत्येक मानव का कर्तव्य है कि वह जल को अनावश्यक रूप से बर्बाद न करे।
कार्यशाला में हरिद्वार की विज्ञान तकनीकी फाउंडेशन ऑफ इंडिया के इंजीनियर प्रमोद और उनकी छह सदस्यीय टीम ने विद्यार्थियों को कार्ड बोर्ड, स्टीकर, जार, एलईडी, बैटरी कनेक्टर, बटन, वायर, रेसिस्टर आदि की सहायता से वाटर लेवल इंडिकेटर का वर्किंग मॉडल बनाने का प्रशिक्षण दिया। उन्होंने विद्यार्थियों को बताया कि पानी की बर्बादी को बचाने के लिए वाटर लेवल इंडिकेटर निर्माण किया गया है। यह टैंक के अंदर जमा पानी को तीन स्तर पर इंडिकेट करता है। निम्न स्तर, मध्यम स्तर और उच्च स्तर पर पानी का लेवल आने पर यह बीप कर पानी पूरा भरने के संकेत देता है। इससे टैंक की टंकी से बाहर पानी अनावश्यक रूप से नहीं बहेगा।
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इस अवसर पर अंशुल गुप्ता, अभिषेक वर्मा, सतीश जैन, अजय गोयल, मनीष मित्तल, हर्षित मित्तल, अनुपम मित्तल, मनोज मेनवाल, रवि हुड्डा, विशाखा गोयल, शालिनी गर्ग, कविता, स्वाति, अंजू पवार, भावना शर्मा, विनीता, सपना चौधरी, सुरक्षा, निशा शर्मा आदि मौजूद रहे।
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संवाद न्यूज एजेंसी
शामली। सेंट आरसी कान्वेंट स्कूल में तीन दिवसीय युवा कौशल तकनीकी कार्यशाला के दूसरे दिन विद्यार्थियों को वाटर लेवल इंडिकेटर बनाने का प्रशिक्षण दिया गया ।
कार्यशाला में शनिवार को प्रधानाचार्या मीनू संगल ने कहा कि आधुनिक युग विज्ञान का युग है। वर्तमान में वैज्ञानिकों ने हर क्षेत्र में आविष्कार करके मानव जीवन को अत्यंत सरल एवं सुलभ बना दिया है। जल ही जीवन है यह वास्तविकता है, लेकिन जल की बर्बादी और वनों के अंधाधुंध कटान के कारण बारिश कम होती है। इससे भूजल स्तर लगातार घट रहा है। जिस कारण भविष्य में मानव जाति को जल संकट का सामना करना पड़ेगा। इसलिए प्रत्येक मानव का कर्तव्य है कि वह जल को अनावश्यक रूप से बर्बाद न करे।
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कार्यशाला में हरिद्वार की विज्ञान तकनीकी फाउंडेशन ऑफ इंडिया के इंजीनियर प्रमोद और उनकी छह सदस्यीय टीम ने विद्यार्थियों को कार्ड बोर्ड, स्टीकर, जार, एलईडी, बैटरी कनेक्टर, बटन, वायर, रेसिस्टर आदि की सहायता से वाटर लेवल इंडिकेटर का वर्किंग मॉडल बनाने का प्रशिक्षण दिया। उन्होंने विद्यार्थियों को बताया कि पानी की बर्बादी को बचाने के लिए वाटर लेवल इंडिकेटर निर्माण किया गया है। यह टैंक के अंदर जमा पानी को तीन स्तर पर इंडिकेट करता है। निम्न स्तर, मध्यम स्तर और उच्च स्तर पर पानी का लेवल आने पर यह बीप कर पानी पूरा भरने के संकेत देता है। इससे टैंक की टंकी से बाहर पानी अनावश्यक रूप से नहीं बहेगा।
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इस अवसर पर अंशुल गुप्ता, अभिषेक वर्मा, सतीश जैन, अजय गोयल, मनीष मित्तल, हर्षित मित्तल, अनुपम मित्तल, मनोज मेनवाल, रवि हुड्डा, विशाखा गोयल, शालिनी गर्ग, कविता, स्वाति, अंजू पवार, भावना शर्मा, विनीता, सपना चौधरी, सुरक्षा, निशा शर्मा आदि मौजूद रहे।