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किसानों के लिए आसमान से बरसा सोना
ब्यूरो, अमर उजाला/शामली
Updated Tue, 23 Jan 2018 11:48 PM IST
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- फोटो : अमर उजाला ब्यूरो
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शामली। हिमाचल प्रदेश में पश्चिमी विक्षोभ के कारण मंगलवार को हुई बूंदाबांदी से मौसम का मिजाज अचानक बदल गया। दोपहर के समय हुई बूंदाबांदी से जहां जनजीवन अस्त व्यस्त रहा, धूप न निकलने से ठिठुरन बरकार रही। मौसम विभाग ने चेतावनी दी कि बुुधवार को भी मौसम खराब रहेगा। बादल छाजाने से बूंदाबांदी और कही-कही पर ओलावृष्टि की संभावना हैं। उधर, कृषि वैज्ञानिकों ने इस बूंदाबांदी को फसलों के लिए आसमान से बरसा सोना बताया है।
मंगलवार को दिन निकलते ही आकाश में घने बादल छा गए। दोपहर 12 बजे के बाद हल्की बूंदाबांदी शुरू हो गई। शाम तीन बजे तक यह सिलसिला जारी तो जनजीवन प्रभावित हो गया। सात किमी प्रति घंटे बर्फीली हवाएं चलने से मौसम में ठिठुुरन बढ़ गई। इससे अधिकतम तापमान 17.5 डिग्री सेल्सियस और न्यूनतम 4.2 डिग्री सेल्सियस रिकार्ड किया गया।
बघरा कृषि विज्ञान केंद्र के निदेशक डाक्टर पीके सिंह ने बताया कि हिमाचल प्रदेश में पश्चिमी विक्षोभ शुरू होने से मंगलवार को मौसम में बदलाव शुरू हुआ है। इससे बुधवार को भी आकाश में बादल छाए रहने और बूंदाबांदी के साथ साथ कही-कही पर ओलावृष्टि होने की संभावना हैं।
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यह बूंदाबांदी से गेहूं, आलू की फसल के लिए अमृत के समान है। यदि ओला वृष्टि हुई तो फसलों के लिए नुकसान दायक होगा। उपनिदेशक कृषि रामवीर कटारा ने बताया कि बारिश के साथ पहाड़ों पर लगातार हो रही बर्फबारी से मैदानी क्षेत्र में ठंड और अधिक बढ़ेगी। उधर, पूर्वी यमुना नहर खंड के जिलेदार अंबुज कुमार ने बताया कि मंगलवार दोपहर 12 बजे के बाद बूंदाबांदी शुरू हुई। शाम पांच बजे तक तीन एमएम बूंदाबांदी रिकार्ड की गई हैं।
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मंगलवार को दिन निकलते ही आकाश में घने बादल छा गए। दोपहर 12 बजे के बाद हल्की बूंदाबांदी शुरू हो गई। शाम तीन बजे तक यह सिलसिला जारी तो जनजीवन प्रभावित हो गया। सात किमी प्रति घंटे बर्फीली हवाएं चलने से मौसम में ठिठुुरन बढ़ गई। इससे अधिकतम तापमान 17.5 डिग्री सेल्सियस और न्यूनतम 4.2 डिग्री सेल्सियस रिकार्ड किया गया।
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बघरा कृषि विज्ञान केंद्र के निदेशक डाक्टर पीके सिंह ने बताया कि हिमाचल प्रदेश में पश्चिमी विक्षोभ शुरू होने से मंगलवार को मौसम में बदलाव शुरू हुआ है। इससे बुधवार को भी आकाश में बादल छाए रहने और बूंदाबांदी के साथ साथ कही-कही पर ओलावृष्टि होने की संभावना हैं।
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यह बूंदाबांदी से गेहूं, आलू की फसल के लिए अमृत के समान है। यदि ओला वृष्टि हुई तो फसलों के लिए नुकसान दायक होगा। उपनिदेशक कृषि रामवीर कटारा ने बताया कि बारिश के साथ पहाड़ों पर लगातार हो रही बर्फबारी से मैदानी क्षेत्र में ठंड और अधिक बढ़ेगी। उधर, पूर्वी यमुना नहर खंड के जिलेदार अंबुज कुमार ने बताया कि मंगलवार दोपहर 12 बजे के बाद बूंदाबांदी शुरू हुई। शाम पांच बजे तक तीन एमएम बूंदाबांदी रिकार्ड की गई हैं।