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4 घंटे 47 मिनट तक चला सूर्यग्रहण
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शामली सुबह 10:20 पर सूर्य ग्रहण का नजारा
- फोटो : SHAMLI
शामली। कोराना वायरस के संक्रमण काल के दौरान लगे सूर्यग्रहण का 4 घंटे 47 मिनट तक लंबा असर रहा। कोरोना के चलते कैराना यमुना पुल पर डुबकी लगाने वालेे श्रद्धालुओं की कमी आई। लगभग 17 घंटे के सूतक काल समाप्त होने के बाद मंदिरों के कपाट खोले गए। इस मौके पर महंतों ने देवी देवताओं का गंगा जल से स्नान कराकर नए वस्त्र पहनाकर पूजा-आरती की।
सूर्यग्रहण के मद्देनजर शनिवार रात दस बजे के बाद सूतक काल शुरू हो जाने से मंदिरों के कपाट बंद कर दिए गए। रविवार को आकाश मेेें बादलों के बीच सुबह दस बजे सूर्यग्रहण शुरु हुआ। दोपहर 12 बजे के लगभग सूर्य का प्रकाश बढ़नेे लगा। दो बजकर 47 मिनट तक ग्रहण का असर रहा। एक बार आकाश में बादलों की ओट में सूर्य के आने से अंधेरा छा गया। ग्रहण काल के बाद श्रद्धालुओं ने अपने घरों में स्नान किया और पूजा अर्चना के साथ परिवार की सुख शांति के लिए गेहूं-आटा, चावल, गुड़, कपड़ा दान किया।
मंदिर हनुमान धाम के प्रधान सलील द्विवेदी ने बताया कि शामली में सुबह दस बजे के बाद सूर्य ग्रहण शुरु हुआ। ग्रहण समाप्त होने पर दोपहर तीन बजे के बाद मंदिरों के कपाट खोले गए। मंदिरों की सफाई और देवी देवताओं को स्नान कराने के बाद नए वस्त्र पहनाकर पूजा -अर्चना की गई। कैराना में कोराना के खौफ के चलते बहुत कम श्रद्धालु स्नान करने पहुंचे।
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सूर्यग्रहण के मद्देनजर शनिवार रात दस बजे के बाद सूतक काल शुरू हो जाने से मंदिरों के कपाट बंद कर दिए गए। रविवार को आकाश मेेें बादलों के बीच सुबह दस बजे सूर्यग्रहण शुरु हुआ। दोपहर 12 बजे के लगभग सूर्य का प्रकाश बढ़नेे लगा। दो बजकर 47 मिनट तक ग्रहण का असर रहा। एक बार आकाश में बादलों की ओट में सूर्य के आने से अंधेरा छा गया। ग्रहण काल के बाद श्रद्धालुओं ने अपने घरों में स्नान किया और पूजा अर्चना के साथ परिवार की सुख शांति के लिए गेहूं-आटा, चावल, गुड़, कपड़ा दान किया।
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मंदिर हनुमान धाम के प्रधान सलील द्विवेदी ने बताया कि शामली में सुबह दस बजे के बाद सूर्य ग्रहण शुरु हुआ। ग्रहण समाप्त होने पर दोपहर तीन बजे के बाद मंदिरों के कपाट खोले गए। मंदिरों की सफाई और देवी देवताओं को स्नान कराने के बाद नए वस्त्र पहनाकर पूजा -अर्चना की गई। कैराना में कोराना के खौफ के चलते बहुत कम श्रद्धालु स्नान करने पहुंचे।
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