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सीता जन्म प्रसंग का मंचन किया
शामली/ ब्यूरो/ अमर उजाला
Updated Sun, 11 Oct 2015 01:10 AM IST
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शामली। श्री हनुमान धाम पर तीसरे दिन श्रीराम लीला में सीता जन्म और श्रवण लीला प्रसंग का मंचन किया।
शुक्रवार की रात्रि में श्री हनुमान धाम पर श्रीराम लीला में राजा जनक के राज्य में अकाल पड़ता है। इंद्र देव को प्रसन्न करने के लिए राजा जनक सोने का हल चलाते हैं। हल चलने से धरती के अंदर एक घड़े से सीता का जन्म होता है। इस सूचना के मिलते ही मिथलापुरी में बहार आती है। श्रवण कुमार अपने अंधे माता -पिता को कांवड़ के माध्यम से तीर्थ यात्रा कराता है।
सरयू नदी के किनारे अंधे माता - पिता की प्यास बुझाने के लिए नदी से पानी लेने जाता है। पानी लेने के लिए जैसे ही घड़ा पानी में डूबाता है, तो राजा दशरथ जानवर समझकर शब्द भेदी बाण चला देता है। इससे श्रवण की मौत हो जाती है। राजा दशरथ श्रवण के माता - पिता को पानी पिलाने जाता है। श्रवण के न बोलने पर उनकी जानकारी करते हैं। राजा दशरथ सारा किस्सा बताता है।
श्रवण के माता -पिता राजा दशरथ को श्राप देते हैं और तड़प -तड़प कर जान देते है। श्रवण कुमार - तरुण खोटियान, दशरथ - आदेश शर्मा, माता डॉ. माता मांगेराम छोक्कर, उत्तम- चाकू पिता का शानदार अभिनय किया। मंच निर्देशक के रूप में वैद्य उपेंद्र द्विवेदी, दिनेश पाठक ने किया।
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हनुमान सेवादल ने प्रश्न मंत्र प्रतियोगिता कराई। इसमें वृंदा नामदेव प्रथम पुरस्कार को कमलेश संगल की स्मृति में दिया। दूसरा पुरस्कार सेवादल की ओर से लाल सिंह लचक की ओर बच्चों को देकर पुरस्कृत किया। हनुमान धाम के प्रधान सलील द्विवेदी, राज कुमार मलिक, रमेश धीमान, अजय पाठक, सुनील अरोरा, राकेश आचार्य, निकुंज मित्तल, अमित प्रजापति, बाल किशन सैनी, रामेश्वर वत्स, जोगेंद्र पाल सेठी आदि रहे।
जलालाबाद। कस्बा जलालाबाद के गांधी चौक मैदान में हो रही श्री रामलीला में रावण-वेदवती संवाद, रावण मेघनाद द्वारा देवताओं, संतों पर अत्याचार, महाराज जनक द्वारा प्रजा के हितार्थ स्वर्ण का हल चलाना, सीता का जन्म लीला का मंचन किया।
रावण-श्याम लाल कश्यप, वेदवती- हिमांशु जुनेजा, जनक-राजकुमार रूहेला, मेघनाद-लालचन्द भगत, नीरज सैनी आदि ने मुख्य भूमिका निभाई। लीला के मुख्य यजमान सोमपाल सैनी बाबरी ने आरती की। लालू भगत प्रधान, सुनील पंवार, बोबी शर्मा, सुरेंद्र शर्मा, राजेंद्र भगत, मा. देवेंद्र शर्मा, अवनीश, मोर आहूजा, नरेश शर्मा, मौसम कश्यप का सहयोग रहा।
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शुक्रवार की रात्रि में श्री हनुमान धाम पर श्रीराम लीला में राजा जनक के राज्य में अकाल पड़ता है। इंद्र देव को प्रसन्न करने के लिए राजा जनक सोने का हल चलाते हैं। हल चलने से धरती के अंदर एक घड़े से सीता का जन्म होता है। इस सूचना के मिलते ही मिथलापुरी में बहार आती है। श्रवण कुमार अपने अंधे माता -पिता को कांवड़ के माध्यम से तीर्थ यात्रा कराता है।
सरयू नदी के किनारे अंधे माता - पिता की प्यास बुझाने के लिए नदी से पानी लेने जाता है। पानी लेने के लिए जैसे ही घड़ा पानी में डूबाता है, तो राजा दशरथ जानवर समझकर शब्द भेदी बाण चला देता है। इससे श्रवण की मौत हो जाती है। राजा दशरथ श्रवण के माता - पिता को पानी पिलाने जाता है। श्रवण के न बोलने पर उनकी जानकारी करते हैं। राजा दशरथ सारा किस्सा बताता है।
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श्रवण के माता -पिता राजा दशरथ को श्राप देते हैं और तड़प -तड़प कर जान देते है। श्रवण कुमार - तरुण खोटियान, दशरथ - आदेश शर्मा, माता डॉ. माता मांगेराम छोक्कर, उत्तम- चाकू पिता का शानदार अभिनय किया। मंच निर्देशक के रूप में वैद्य उपेंद्र द्विवेदी, दिनेश पाठक ने किया।
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हनुमान सेवादल ने प्रश्न मंत्र प्रतियोगिता कराई। इसमें वृंदा नामदेव प्रथम पुरस्कार को कमलेश संगल की स्मृति में दिया। दूसरा पुरस्कार सेवादल की ओर से लाल सिंह लचक की ओर बच्चों को देकर पुरस्कृत किया। हनुमान धाम के प्रधान सलील द्विवेदी, राज कुमार मलिक, रमेश धीमान, अजय पाठक, सुनील अरोरा, राकेश आचार्य, निकुंज मित्तल, अमित प्रजापति, बाल किशन सैनी, रामेश्वर वत्स, जोगेंद्र पाल सेठी आदि रहे।
जलालाबाद। कस्बा जलालाबाद के गांधी चौक मैदान में हो रही श्री रामलीला में रावण-वेदवती संवाद, रावण मेघनाद द्वारा देवताओं, संतों पर अत्याचार, महाराज जनक द्वारा प्रजा के हितार्थ स्वर्ण का हल चलाना, सीता का जन्म लीला का मंचन किया।
रावण-श्याम लाल कश्यप, वेदवती- हिमांशु जुनेजा, जनक-राजकुमार रूहेला, मेघनाद-लालचन्द भगत, नीरज सैनी आदि ने मुख्य भूमिका निभाई। लीला के मुख्य यजमान सोमपाल सैनी बाबरी ने आरती की। लालू भगत प्रधान, सुनील पंवार, बोबी शर्मा, सुरेंद्र शर्मा, राजेंद्र भगत, मा. देवेंद्र शर्मा, अवनीश, मोर आहूजा, नरेश शर्मा, मौसम कश्यप का सहयोग रहा।