फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Shamli News ›   Showing the path of true happiness to the suffering beings is the essence of religion: Vimarsh Sagar

दुखी जीवों को सच्चे सुख का मार्ग दिखाना ही धर्म का सार : विमर्श सागर

Tue, 11 Nov 2025 12:36 AM IST
Meerut Bureau मेरठ ब्यूरो
Updated Tue, 11 Nov 2025 12:36 AM IST
विज्ञापन
Showing the path of true happiness to the suffering beings is the essence of religion: Vimarsh Sagar
संवाद न्यूज एजेंसी
विज्ञापन

शामली। जैन आचार्य 108 विमर्श सागर महाराज ने कहा कि भगवान महावीर स्वामी ने जीवन जीने का जो तरीका बताया वह केवल धार्मिक आचरण तक सीमित नहीं है, बल्कि जीवन के प्रत्येक क्षेत्र में लागू होने वाला सार्वभौमिक मार्ग है। उन्होंने बताया कि संसार के दुखी जीवों को सच्चे सुख का मार्ग दिखाना ही धर्म का सार है।
दिगंबर जैन धर्मशाला में सोमवार को प्रवचन करते हुए जैन आचार्य ने कहा कि धर्म वही है, जिसमें सभी जीवों के प्रति मैत्री और सद्भाव का भाव हो। जब व्यक्ति मित्र या शत्रु, प्रशंसक या निंदक सभी के प्रति समान दृष्टि रखता है, तभी वह सच्चे धर्म के मार्ग पर चलता है।
विज्ञापन

उन्होंने बताया कि भगवान महावीर ने यह भी कहा कि जीवन का उद्देश्य केवल स्वयं को सुखी बनाना नहीं, बल्कि दूसरों को दुख न देना है। मोह से उत्पन्न प्रेम सीमित होता है, जबकि सच्चा प्रेम वह है जो सभी जीवों में समान रूप से व्याप्त होता है। उन्होंने सिखाया कि धर्म की जड़ मैत्री है, जैसे वृक्ष बिना जड़ के नहीं फलता, वैसे ही धर्म बिना मैत्री के सफल नहीं हो सकता। उन्होंंने धर्म और मैत्री के संबंध को गहराई से समझाते हुए धर्म को मैत्री का पर्याय बताया।
विज्ञापन
विज्ञापन

उन्होंने कहा कि धर्म वही है जो सभी में मित्रता, करुणा और अहिंसा का भाव जगाए। यदि किसी के जीवन में मैत्री नहीं है, तो पूजा, पाठ, व्रत या कोई भी धार्मिक कर्म केवल प्रदर्शन या ढोंग बन जाता है। सच्चा धर्म भीतर से उपजा समभाव है। धर्म के प्रत्येक अंग, दया, अहिंसा, सत्य, ब्रह्मचर्य, अपरिग्रह, भक्ति और पूजा में मैत्री का ही रूप छिपा है। जब व्यक्ति अपने और पराए, मित्र और शत्रु के भेद से ऊपर उठ जाता है, तब वह धर्म के शुद्ध स्वरूप को अनुभव करता है। उन्होंने मंदिर को धर्म की प्रयोगशाला बताते हुए कहा कि जैसे वैज्ञानिक प्रयोगशाला में औषधि का परीक्षण कर उसका जीवन में उपयोग किया जाता है, वैसे ही मंदिर में व्यक्ति धर्म के सिद्धांतों का अभ्यास करता है। यहां से सीखे गए सिद्धांतों को वह घर, दुकान और समाज में लागू करता है। मंदिर व्यक्ति को यह सिखाता है कि सच्चा धर्म केवल पूजा तक सीमित नहीं, बल्कि आचरण में प्रकट होता है।
यही कारण है मंदिर व्यक्ति को मैत्री, समभाव और करुणा से युक्त जीवन जीने की प्रेरणा देता है, जो प्रभु महावीर का वास्तविक संदेश है।
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed