Delhi Blast: झिंझाना की फिजा को लगी किसकी नजर! एक तरफ ATS की गिरफ्तारी, दूसरी ओर नोमान की मौत से टूटा सौहार्द
गंगा-जमुनी तहजीब के प्रतीक झिंझाना कस्बे पर हाल के घटनाक्रमों ने गहरा असर डाला है। एक ओर एटीएस ने युवक आजाद को गिरफ्तार किया, तो दूसरी ओर दिल्ली धमाके में 18 वर्षीय नोमान की मौत से पूरा कस्बा गमगीन है। मस्जिदों और मंदिरों में शांति की दुआएं मांगी जा रही हैं।
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शामली जनपद का झिंझाना, कभी गंगा-जमुनी तहजीब की मिसाल और आपसी भाईचारे के लिए पहचाने जाने वाले झिंझाना कस्बे को जैसे किसी की नजर लग गई हो। एक सप्ताह के भीतर दो घटनाओं ने यहां की फिजा को बेचैन कर दिया है। पहले गुजरात एटीएस ने कस्बे के युवक आजाद को राष्ट्रविरोधी गतिविधियों में संलिप्त होने के आरोप में गिरफ्तार किया, और अब दिल्ली धमाके में 18 वर्षीय नोमान की मौत ने पूरे कस्बे को सदमे में डाल दिया।
झिंझाना, जो इमाम नसीरुद्दीन शहीद मजार और ऐतिहासिक नीला रोजा जैसी धार्मिक और सांस्कृतिक विरासतों के लिए जाना जाता है, हमेशा से सौहार्द और एकता की मिसाल रहा है। यहां हर धर्म और मजहब के लोग एक-दूसरे के सुख-दुख में बराबरी से शामिल होते रहे हैं। मगर बीते कुछ दिनों की घटनाओं ने इस अमनपसंद कस्बे में एक सन्नाटा और डर का माहौल पैदा कर दिया है।
नेताओं ने जताया दुख
पूर्व विधायक राव अब्दुल वारिस ने पीड़ित परिवार से मुलाकात कर दुख साझा किया। उन्होंने कहा कि “यह हादसा सिर्फ एक परिवार की नहीं, बल्कि पूरे कस्बे की त्रासदी है। सरकार को दोषियों को जल्द पकड़कर सख्त से सख्त सजा देनी चाहिए। उन्होंने मृतक नोमान के बड़े भाई फरमान, जो किडनी की गंभीर बीमारी से जूझ रहे हैं, के इलाज में भी मदद का भरोसा दिया।
लोगों में आक्रोश और चिंता
आरएसएस इंटर कॉलेज के प्रबंधक शैलेंद्र मित्तल ने कहा, कस्बा हमेशा भाईचारे का संदेश देता आया है, पर नोमान की मौत ने सबको तोड़ दिया। ऐसे आतंकियों को फांसी से कम सजा नहीं मिलनी चाहिए।
वहीं समाजसेवी बाबर हुसैन कुद्दुसी ने कहा, यह हादसा इंसानियत पर हमला है।
धर्म कोई भी हो, ऐसे लोगों को बख्शा नहीं जाना चाहिए। पूर्व चेयरमैन नौशाद ठेकेदार ने कहा, एक सप्ताह में हुई घटनाओं ने लोगों को सोचने पर मजबूर कर दिया है कि आखिर झिंझाना की इस अमनपसंद मिट्टी को किसकी नजर लग गई।
अब झिंझाना की फिजा में सन्नाटा है, लेकिन उम्मीद अभी बाकी है-कि यह कस्बा फिर एक बार अपने पुराने रूप में लौटेगा, जहां मंदिर की घंटी और अज़ान की आवाज़ें मिलकर शांति का संदेश देती हैं।