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Shamli News: एटीएस के रडार पर शामली, 190 मकतबों की होगी जांच
Tue, 29 Oct 2024 12:47 AM IST
मेरठ ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, शामली
संवाद न्यूज एजेंसी, शामली
Updated Tue, 29 Oct 2024 12:47 AM IST
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शामली। शामली जिला एक बार फिर से एटीएस के रडार पर है। अधिकारियों के निर्देश पर जिले में संचालित 190 मकतबों की जांच कराई जाएगी। जिसकी तैयारी एटीएस के अधिकारियों ने कर ली है।
एटीएम के सूत्रों के अनुसार पूर्व में गोपनीय तरीके से जिले के मदरसों की जांच कराई जा चुकी है। अब मकतब यानी छोटे मदरसे भी रडार पर आ गए हैं। जिले के 190 मकतब हैं, जिनकी संपत्ति, पंजीकरण और फंडिंग की जांच शुरू कर दी है। शामली जिले की यदि बात की जाए तो यहां के लोग आतंकी गतिविधियों में समय-समय पर लिप्त मिल चुके हैं। कई आईएसआई एजेंट भी यहां से पकड़े गए हैं।
एसपी रामसेवक गौतम का कहना है कि यदि एटीएस पुलिस से सहयोग मांगती है तो पूरा सहयोग किया जाएगा। जिन लोगों को आतंकी गतिविधियों में लिप्त होने के आरोप में पुलिस, एसटीएफ ने पकड़ा है, उनकी जांच भी एटीएस ने गोपनीय तरीके से शुरू करा दी है। ऐसे 10 से अधिक परिवार एटीएस के रडार पर आ गए हैं।
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शामली जिले के लोगों का निकल चुका है आतंकी कनेक्शन
कैराना कस्बा 90 के दशक में कैराना गठरी व्यवसाय के लिए बदनाम था। गठरी व्यवसाय कपड़ा, चप्पल, सोने व हथियारों की तस्करी तक ही सीमित था। 17 जून 2021 को बिहार के दरभंगा रेलवे स्टेशन पर पार्सल ब्लास्ट हुआ था। 24 जून को एनआईए ने मामले की जांच शुरू कर दी थी। 30 जून को एनआईए ने हैदराबाद से कैराना निवासी दो सगे भाई नासिर खान व इमरान खान को गिरफ्तार किया था। इसके बाद एक जुलाई 2021 को एनआईए ने भारी पुलिस बल के साथ कैराना में दबिश देकर सलीम टूइयां व कफील को गिरफ्तार किया था। दोनों को न्यायालय में पेश करने के बाद एनआईए पांच दिन के ट्रांजिट रिमांड पर ले गई थी।
जिले का आतंकी कनेक्शन
एसटीएफ ने वर्ष 2005 में शामली से पांच किलो आरडीएक्स और अत्याधुनिक असलह के साथ जम्मू-कश्मीर निवासी तीन युवक गिरफ्तार किए थे। कैराना निवासी इकबाल काना और दिलशाद मिर्जा पाकिस्तान में रहकर नकली नोटों का नेटवर्क संचालित करते रहे हैं। गठरी उद्योग के जरिए समझौता एक्सप्रेस से कैराना लाई जा रही 40 पिस्टल पाकिस्तान बॉर्डर पर बरामद हुई थीं। आईएसआई एजेंट कलीम को भी पुलिस ने पिछले साल ही शामली से गिरफ्तार किया था, जिसका कनेक्शन पाकिस्तान के आईएसआई एजेंंट इकबाल काना और अन्य से निकला था।
ये होते हैं मकतब
मकतब एक तरह से छोटे मदरसे ही हैं। यहां छोटे बच्चों को दीनी तालीम दी जाती है। कुछ मकतब मदरसों में भी चलते हैं, लेकिन बड़ी संख्या में गली-मोहल्लों और गांवों में भी छोटे-छोटे भवनों में भी मकतब चल रहे हैं।
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एटीएम के सूत्रों के अनुसार पूर्व में गोपनीय तरीके से जिले के मदरसों की जांच कराई जा चुकी है। अब मकतब यानी छोटे मदरसे भी रडार पर आ गए हैं। जिले के 190 मकतब हैं, जिनकी संपत्ति, पंजीकरण और फंडिंग की जांच शुरू कर दी है। शामली जिले की यदि बात की जाए तो यहां के लोग आतंकी गतिविधियों में समय-समय पर लिप्त मिल चुके हैं। कई आईएसआई एजेंट भी यहां से पकड़े गए हैं।
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एसपी रामसेवक गौतम का कहना है कि यदि एटीएस पुलिस से सहयोग मांगती है तो पूरा सहयोग किया जाएगा। जिन लोगों को आतंकी गतिविधियों में लिप्त होने के आरोप में पुलिस, एसटीएफ ने पकड़ा है, उनकी जांच भी एटीएस ने गोपनीय तरीके से शुरू करा दी है। ऐसे 10 से अधिक परिवार एटीएस के रडार पर आ गए हैं।
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शामली जिले के लोगों का निकल चुका है आतंकी कनेक्शन
कैराना कस्बा 90 के दशक में कैराना गठरी व्यवसाय के लिए बदनाम था। गठरी व्यवसाय कपड़ा, चप्पल, सोने व हथियारों की तस्करी तक ही सीमित था। 17 जून 2021 को बिहार के दरभंगा रेलवे स्टेशन पर पार्सल ब्लास्ट हुआ था। 24 जून को एनआईए ने मामले की जांच शुरू कर दी थी। 30 जून को एनआईए ने हैदराबाद से कैराना निवासी दो सगे भाई नासिर खान व इमरान खान को गिरफ्तार किया था। इसके बाद एक जुलाई 2021 को एनआईए ने भारी पुलिस बल के साथ कैराना में दबिश देकर सलीम टूइयां व कफील को गिरफ्तार किया था। दोनों को न्यायालय में पेश करने के बाद एनआईए पांच दिन के ट्रांजिट रिमांड पर ले गई थी।
जिले का आतंकी कनेक्शन
एसटीएफ ने वर्ष 2005 में शामली से पांच किलो आरडीएक्स और अत्याधुनिक असलह के साथ जम्मू-कश्मीर निवासी तीन युवक गिरफ्तार किए थे। कैराना निवासी इकबाल काना और दिलशाद मिर्जा पाकिस्तान में रहकर नकली नोटों का नेटवर्क संचालित करते रहे हैं। गठरी उद्योग के जरिए समझौता एक्सप्रेस से कैराना लाई जा रही 40 पिस्टल पाकिस्तान बॉर्डर पर बरामद हुई थीं। आईएसआई एजेंट कलीम को भी पुलिस ने पिछले साल ही शामली से गिरफ्तार किया था, जिसका कनेक्शन पाकिस्तान के आईएसआई एजेंंट इकबाल काना और अन्य से निकला था।
ये होते हैं मकतब
मकतब एक तरह से छोटे मदरसे ही हैं। यहां छोटे बच्चों को दीनी तालीम दी जाती है। कुछ मकतब मदरसों में भी चलते हैं, लेकिन बड़ी संख्या में गली-मोहल्लों और गांवों में भी छोटे-छोटे भवनों में भी मकतब चल रहे हैं।