शामली का हाल: बजट के अभाव में अटकी कई परियोजनाएं, अब मुख्यमंत्री योगी के आगमन से जगी आस
शामली जिले में कई परियोजनाएं बजट के अभाव में लंबित पड़ी है। वहीं अब मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के दौरे से कुछ आस जगी है। हाल यह है कि एसपी इस समय सिंचाई विभाग के डाक बंगले में रह रहे हैं।
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दीपावली के बाद शामली जिले में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ का आगमन प्रस्तावित है। लंबे समय से जिले में पुलिस लाइन, जिला न्यायालय, रोडवेज बस अड्डे की भूमि चयन, रोडवेज डिपो की कार्यशाला का बजट अवमुक्त नहीं हो पा रहा है। जिला मुख्यालय पर विकास भवन और बीएसए कार्यालय बजट के अभाव में अधूरा पड़ा हुआ है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से प्रस्तावित जिले की विकास योजनाओं की धनराशि अवमुक्त होने की जिले की जनता को उम्मीद है।
वर्ष 2018 के कैराना उपचुनाव में शामली के आरके पीजी कॉलेज में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ कैराना-कांधला के बीच पीएसी बटालियन कैंप और फायरिंग रेंज की घोषणा कर चुके हैं। डेढ़ साल पूर्व कैराना क्षेत्र के ऊंचागांव-गुर्जरपुर में पीएसी कैंप और फायरिंग रेंज के लिए भूमि खरीदी गई थी। सात नवंबर को मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ पीएसी कैंप और फायरिंग रेंज की आधारशिला रखने आ रहे हैं। मुख्यमंत्री इस दौरे के बहाने विधानसभा चुनाव को भी साधेंगे।
इन योजनाओं को है अभी इंतजार
नवीन जिला मुख्यालय पर गोहरनी और भैंसवाल के जंगल में एक मार्च 2020 में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ 232 करोड़ रुपये की लागत से पुलिस लाइन की आधारशिला रख चुके हैं। लेकिन 20 माह बाद भी पुलिस लाइन की बजट की वित्तीय स्वीकृति नहीं हो पाई है। इसी तरह एसपी आवास को भी बजट का इंतजार है। एसपी इस समय सिंचाई विभाग के डाक बंगले में रह रहे हैं।
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उधर, गोहरनी गांव के जंगल में जिला न्यायालय कार्यालय एवं आवासीय भवनों के लिए भूमि चिन्हित हो चुकी है। न्यायालय कार्यालय और आवासीय भवनों के लिए एस्टीमेट जिला मुख्यालय से शासन और उच्च न्यायालय इलाहाबाद जा चुका है। छह साल पहले 208 करोड़ रुपये बाद में डेढ़ साल पहले 298 करोड़ रुपये का जिला न्यायालय और आवासीय भवनों के लिए एस्टीमेट पीडब्ल्यूडी से तैयार कराया था। शासन से अभी तक कोई भी धनराशि अवमुक्त नहीं हुई है।
जिला मुख्यालय बनने के बाद शामली जिला मुख्यालय पर आधुनिक बस अड्डा नहीं है। नगर पालिका परिषद की किराए के भवन में बस अड्ड़ा चल रहा है। किराए के भवन में भूमि कम होने पर बस सड़कों पर आकर रुकती है। वर्ष 2015 में मुजफ्फरनगर मार्ग पर फतेहपुर गांव के जंगल में नौ बीघा भूमि रोडवेज डिपो कार्यशाला के लिए आरक्षित की गई थी। पिछले कई सालों से नौ करोड़ रुपये का रोडवेज डिपो की कार्यशाला के लिए इस्टीमेट स्वीकृत होकर निगम मुख्यालय को भेजा गया था। प्रदेश के गन्ना मंत्री सुरेश राणा, सांसद प्रदीप चौधरी, विधायक तेजेंद्र निर्वाल की पैरवी कर चुके हैं। जिले में सालों बाद भी डिपो कार्यशाला के इस्टीमेट की धनराशि अवमुक्त नहीं हो पाई है।
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डीएम आवास कॉलोनी के लिए 26 करोड़ की धनराशि चारदीवारी जनसुविधाओं के लिए शासन से मांगा था। विकास भवन निर्माण के लिए नौ करोड़ और बीएसए कार्यालय की 80 लाख रुपये की धनराशि अवमुक्त नहीं हो पाई है।