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अमर उजाला स्टिंग: IAS अफसरों के उड़े होश, व्हाट्सएप ग्रुपों पर चल रहा ये बड़ा खेल, सरकार को करोड़ों की हानि

Fri, 06 Oct 2023 02:51 AM IST
कपिल kapil महबूब अली, संवाद न्यूज एजेंसी, शामली
महबूब अली, संवाद न्यूज एजेंसी, शामली Published by: कपिल kapil Updated Fri, 06 Oct 2023 02:51 AM IST
सार

Amar Ujala Sting : संवाददाता गिरोह के बारे में जानकारी करने के लिए 1500 रुपये देकर दो ग्रुपों में जुड़ा। 20 दिन तक की गई पड़ताल में जो सामने आया उसने हर किसी के होश उड़ा दिए। मामला बड़े अफसरों तक पहुंचा तो उनके भी होश उड़ गए।

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Shamli: Location of mining officials being given on WhatsApp groups, crores loss of revenue to government
फाइल फोटो। - फोटो : amar ujala

विस्तार

विभागीय अधिकारियों की अनदेखी के कारण करीब डेढ़ साल से ओवरलोड और अन्य वाहनों को निकलवाने के लिए लोकेशन देने का खेल व्हाट्सएप ग्रुपों पर चल रहा है। माफिया 1500 से दो हजार रुपये लेकर यूपी, हरियाणा, उत्तराखंड और दिल्ली के आरटीओ, एआरटीओ, खनन अधिकारी की लोकेशन देकर ओवरलोड वाहनों को निकलवा रहे हैं। खास बात यह है कि 24 घंटे ग्रुपों में लोकेशन शेयर की जाती है। सबका साथ, सबका विकास, लोकेशन, ट्रक आदि ग्रुपों में लोकेशन देने का खेल चल रहा है। 

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संवाददाता गिरोह के बारे में जानकारी करने के लिए 1500 रुपये देकर दो ग्रुपों में जुड़ा। 20 दिन तक की गई पड़ताल में सामने आया कि शामली के अलावा बागपत, मुजफ्फरनगर, बिजनौर, सहारनपुर, बड़ौत, गाजियाबाद, लोनी, अमरोहा, हापुड़, मेरठ, नोएडा, बुलंदशहर, संभल, मुरादाबाद, अलीगढ़ के अलावा हरियाणा के कैथल, पानीपत, सोनीपत, पंचकूला, अंबाला, यमुनानगर, गुरुग्राम, रोहतक, रेवाड़ी, झज्जर, उत्तराखंड के देहरादून, हरिद्वार, दिल्ली के शाहदरा जिलों के आरटीओ, खनन अधिकारी और पुलिस की लोकेशन व्हाट्सएप ग्रुपों में शेयर की जा रही है। पड़ताल के दौरान संवाददाता और गिरोह के सदस्यों के बीच कुछ इस तरह से बातचीत हुई।

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गुर्गा -1
संवाददाता : भाई सुनील बोल रहा हूं, ग्रुप में जोड़ दो, लोकेशन चाहिए?
गुर्गा : कहां से हो

संवाददाता : लोनी से
गुर्गा : 1500 रुपये खाते में भेजो, एक बार कोड भेजा गया।

संवाददाता : 1500 रुपये भेजने के बाद, अभी तक नंबर एड नहीं किया गया।
गुर्गा : कर दिया गया है देखो

संवाददाता : हां नंबर एड हो गया है।
ग्रुप में यूपी, हरियाणा, उत्तराखंड, दिल्ली आदि राज्यों के चालक अपने-अपने स्थान की लोकेशन मांग रहे थे तो तुरंत ही उन्हें लोकेशन उपलब्ध कराई जा रही थी। आरटीओ, खनन अधिकारियों की गाड़ियों के भी फोटो मिनटों में डाले जा रहे हैं।

गुर्गा -2
संवाददाता : भाई ग्रुप में एड कर दो, लोकेशन चाहिए।

गुर्गा : किसने नंबर दिया
संवाददाता : रोहन ट्रक चालक ने।

गुर्गा : ग्रुप में नंबर एड कर देता है।
ग्रुप में शामली, बागपत, सहारनपुर, मुजफ्फरनगर, हरियाणा के करनाल, सोनीपत, पानीपत, हिसार, भिवानी, हरिद्वार, देहरादून की लोकेशन तुरंत मांगते ही उपलब्ध कराई गई।

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गुर्गा-3
संवाददाता : भाई शामली और बागपत की लोकेशन चाहिए।
गुर्गा : ओके है, गाड़ी को तेजी से लेकर जाओ

संवाददाता : भाई करनाल, सोनीपत और झज्जर बताओ
गुर्गा- लाइन क्लीयर है, तेजी से लेकर जाओ

संवाददाता : सहारनपुर, बिजनौर, मुरादाबाद, संभल, गाजियाबाद की लोकेशन चाहिए?
गुर्गा : सहारनपुर, बिजनौर वाले गाड़ी को कहीं रोक लो, संभल, गाजियाबाद, मुरादाबाद में लाइन क्लियर है।

कार और बाइकों से अधिकारियों की गाड़ियों की निगरानी करते हैं गुर्गें
पड़ताल के दौरान पता चला कि लोकेशन देने के लिए माफिया ने हर जिले में 10 से लेकर 12 हजार रुपये प्रतिमाह के हिसाब से गुर्गे रखे हुए हैं, जो आरटीओ, खनन अधिकारी की गाड़ी की लोकेशन लेने के लिए उनकी गाड़ी का अपनी गाड़ी या फिर बाइक से पीछा करते हैं। लोकेशन बार-बार माफिया को भेजी जाती है। सबका साथ सबका विकास में 122, लोकेशन में 200 और एक अन्य ग्रुप में 190 नंबर जोड़े गए हैं।

सरकार को हो रही राजस्व की हानि
ओवरलोड वाहनों को निकलवाने के इस खेल में सरकार को भी करोड़ों के राजस्व की हानि हो रही है। क्योंकि यदि ओवरलोड वाहनों के खिलाफ चालान और सीज की कार्रवाई हो तो सरकार को भी राजस्व मिले।

भाई सब जगह सेटिंग है, दिक्कत मत मानो
पड़ताल के दौरान ग्रुप चलाने वाले दो लोगों ने कहा कि भाई ऊपर तक सेटिंग है, दिक्कत नहीं मानो, ग्रुप में जुड़े रहो। पूछने पर एक ने कहा कि विभागीय अधिकारियों को कर्मचारी भी सहयोग करते हैं। सदस्य अधिकतर व्हाट्सएप कॉल या फिर ऑडियो भेजकर ही बात करते हैं।

ये हैं कोड वर्ड
ओके रिपोर्ट : इसका मतलब होता कि जिस जिले के चालक ने आरटीओ या फिर खनन अधिकारी की लोकेशन मांगी है, वह सड़क पर नहीं है। यानी रिपोर्ट ओके है। राइट है : यानी कोई दिक्कत नहीं है। अभी रुको : यानी अधिकारी चेकिंग कर रहे हैं। जय हो -यानी लाइन क्लियर है।

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इन्होंने कहा...
व्हाट्सएप ग्रुपों में लोकेशन देने के बारे में जानकारी हासिल हुई थी, मगर कौन लोकेशन दे रहा है, अभी तक इसका पता नहीं लग सका है। जांच कराकर कार्रवाई की जाएगी। ग्रुपों को चलाने वालों को नहीं बख्शा जाएगा। - रोहित राजपूत, एआरटीओ शामली

व्हाट्सएप ग्रुपों में लोकेशन देने के खेल के बारे में जानकारी नहीं है। जानकारी कराकर कार्रवाई कराई जाएगी। - रविंद्र सिंह, डीएम शामली

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