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Shamli Encounter: चिनाई करते थे मुस्तफा और मुकीम... हत्याओं से मचाया आतंक, कहलाया गैंग ऑफ कैराना
Thu, 23 Jan 2025 12:16 AM IST
मोहम्मद मुस्तकीम
अमर उजाला नेटवर्क, शामली
अमर उजाला नेटवर्क, शामली
Published by: मोहम्मद मुस्तकीम
Updated Thu, 23 Jan 2025 12:16 AM IST
सार
अमीर बनने के सपने ने दोनों की गिनती वेस्ट यूपी के बड़े बदमाशों में करा दी। अभी दोनों गैंगों में 20 सदस्य एसटीएफ ने चिह्नित किए हैं, जिन पर शिकंजा कसने की तैयारी है।
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मुस्तफा उर्फ कग्गा का फाइल फोटो।
- फोटो : अमर उजाला
विस्तार
झिंझाना थाना क्षेत्र के उदपुर गांव के ईंट भट्ठे के पास चार बदमाशों के मुठभेड़ में मार गिराए जाने के बाद मुकीम उर्फ काला और मुस्तफा उर्फ कग्गा गैंग पूरी तरह से चर्चाओं में है। कग्गा हो या फिर मुकीम दोनों ही गैंगों ने वेस्ट यूपी में खूब आतंक मचाया था।
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मुकीम काला का फाइल फोटो।
- फोटो : अमर उजाला
मुस्तफा और मुकीम शुरुआत में चिनाई करते थे और रेत से भरे ट्रैक्टर चलाते थे। मजदूरी करते करते अमीर बनने के सपने ने उनकी गिनती वेस्ट यूपी के बड़े बदमाशों में करा दी। दोनों ने एक के बाद एक रंगदारी और लूट की वारदातों को अंजाम दिया। चंद दिनों में ही वेस्ट यूपी के बड़े गैंग बन गए। अभी भी दोनों गैंगों में 20 सदस्य एसटीएफ ने चिह्नित किए हैं, जिन पर शिकंजा कसने की तैयारी है।
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सहारनपुर के गंगोह क्षेत्र के बढ़ी माजरा का रहने वाला मुस्तफा उर्फ कग्गा डेढ़ दशक पहले तक चिनाई कर परिवार का पालन पोषण करता था। बाद में उसने अपराध की दुनिया में कदम रखा। शामली, बागपत, मुजफ्फरनगर, सहारनपुर, मेरठ, बिजनौर ही नहीं आसपास के अन्य जिलों में भी कग्गा लूट से लेकर अन्य वारदातों को अंजाम देता था। मुस्तफा ने गिरोह में शुरुआत में सिर्फ एक सदस्य आसिफ को शामिल किया था। इसके बाद गिरोह ने हर जिले में सदस्य बना लिए थे। गिरोह थानों के सामने ही गाड़ी लगाकर लूट की वारदात को अंजाम देता था।
कग्गा की खासियत थी कि वह पुलिसवालों की हत्या करने से भी पीछे नहीं रहता था। उसने झिंझाना में सिपाही सचिन को गोली मारकर मौत के घाट उतारा था। गंगोह में सिपाही बलबीर की हत्या कर दी थी। पुलिस को देखते ही वह फायरिंग करता था। वर्ष 2011 में बीनपुर के जंगल में एसओजी प्रभारी प्रशांत कपिल और उनकी टीम ने एनकाउंटर में मुस्तफा को मार गिराया था। इसके अलावा वाजिद उर्फ काला और साबिर जंधेड़ी प्रमुख शार्प शूटर भी थे, जिन्हें बाद में मारा था।
कग्गा की खासियत थी कि वह पुलिसवालों की हत्या करने से भी पीछे नहीं रहता था। उसने झिंझाना में सिपाही सचिन को गोली मारकर मौत के घाट उतारा था। गंगोह में सिपाही बलबीर की हत्या कर दी थी। पुलिस को देखते ही वह फायरिंग करता था। वर्ष 2011 में बीनपुर के जंगल में एसओजी प्रभारी प्रशांत कपिल और उनकी टीम ने एनकाउंटर में मुस्तफा को मार गिराया था। इसके अलावा वाजिद उर्फ काला और साबिर जंधेड़ी प्रमुख शार्प शूटर भी थे, जिन्हें बाद में मारा था।
गैंग ऑफ कैराना भी कहा जाने लगा था
इनामी रहा वेस्ट यूपी का बदमाश मुकीम उर्फ काला शामली के कैराना क्षेत्र के जहानपुरा गांव का रहने वाला था। ग्रामीणों के अनुसार वह भी पहले चिनाई करता था। इसके बाद रेत से भरे ट्रैक्टर चलाने लगा था। इसके बाद उसने कग्गा गैंग के संपर्क में आकर गांव में ही तमंचे बेचने शुरू कर दिए थे। 16 साल की उम्र में वर्ष 2008 में वह पहली बार आर्म्स एक्ट के तहत जेल गया था। पानीपत के ठेकेदार के यहां पर मजदूरी करते समय ही मुकीम ने अपराध की दुनिया में कदम रख दिया था।करनाल जेल में मुकीम बंद रहा, जो उसके लिए अपराध की पाठशाला साबित हुई। जेल में उसकी मुलाकात कग्गा और अन्य गिरोह के सदस्यों से हुई थी। मुकीम ने शामली के अलावा मुजफ्फरनगर, सहानपुर में भी वारदातों को अंजाम दिया। मुकीम काला गैंग ने 15 फरवरी 2015 को सहारनपुर के तनिष्क ज्वेलरी शोरूम में डकैती डाली थी, जबकि उसी दौरान तीतरो में दो सगे भाइयों की हत्या और सहारनपुर शहर में सिपाही राहुल ढाका की हत्या कर दी थी।
मुस्तफा की मौत के बाद बदला था गैंग का नाम
मुस्तफा के मारे जाने के बाद मुकीम ने कग्गा गैंग का नाम मुकीम रख दिया था। इसे गैंग ऑफ कैराना भी कहा जाने लगा था। वर्ष 2013 में उसने हरियाणा की सीमा में पेट्रोल पंप लूटा था। बाद में बचने के लिए मुकीम हवा में नोट उड़ाकर फरार हो जाता था। 14 मई 2021 को मुकीम की गैंगस्टर अंशु दीक्षित ने चित्रकूट की जेल में हत्या कर दी थी।
मुकीम गैंग में बदमाश अरशद के अलावा रिजवान, वाजिद, सादर, हैदर, नीरज, सुनील, आसिफ, हारून, अजरू, मनोज, महताब, एक अन्य अरशद आदि शामिल रहे।
मुस्तफा के मारे जाने के बाद मुकीम ने कग्गा गैंग का नाम मुकीम रख दिया था। इसे गैंग ऑफ कैराना भी कहा जाने लगा था। वर्ष 2013 में उसने हरियाणा की सीमा में पेट्रोल पंप लूटा था। बाद में बचने के लिए मुकीम हवा में नोट उड़ाकर फरार हो जाता था। 14 मई 2021 को मुकीम की गैंगस्टर अंशु दीक्षित ने चित्रकूट की जेल में हत्या कर दी थी।
मुकीम गैंग में बदमाश अरशद के अलावा रिजवान, वाजिद, सादर, हैदर, नीरज, सुनील, आसिफ, हारून, अजरू, मनोज, महताब, एक अन्य अरशद आदि शामिल रहे।
अब कौन संभालेगा गिरोह की कमान, अरशद या कोई और
एक लाख के इनामी अरशद की मौत के बाद अब मुकीम गिरोह की कमान कौन संभालेगा। यह सवाल हर किसी के दिमाग में है। अधिकारियों को आशंका है कि गिरोह का दूसरा सदस्य अरशद गिरोह की कमान संभाल सकता है। पुलिस ने गिरोह के सभी सदस्यों पर शिकंजा कसने की तैयारी कर ली है।
एक लाख के इनामी अरशद की मौत के बाद अब मुकीम गिरोह की कमान कौन संभालेगा। यह सवाल हर किसी के दिमाग में है। अधिकारियों को आशंका है कि गिरोह का दूसरा सदस्य अरशद गिरोह की कमान संभाल सकता है। पुलिस ने गिरोह के सभी सदस्यों पर शिकंजा कसने की तैयारी कर ली है।