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Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Shamli News ›   Shamli Encounter: Arshad's marriage was to take place on February 3, he was killed in an encounter 14 days ago

Shamli Encounter: तीन फरवरी को होना था अरशद का निकाह, 14 दिन पहले हो गया एनकाउंटर में ढेर

Thu, 23 Jan 2025 12:18 AM IST
मोहम्मद मुस्तकीम अमर उजाला नेटवर्क, शामली
अमर उजाला नेटवर्क, शामली Published by: मोहम्मद मुस्तकीम Updated Thu, 23 Jan 2025 12:18 AM IST
सार

अरशद के परिजनों का कहना है कि उसने जुर्म से तौबा कर ली थी। इसीलिए देहरादून में लड़की देखकर उसका निकाह तय कर दिया था, लेकिन उससे पहले ही उसकी मौत की खबर आ गई। 

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Shamli Encounter: Arshad's marriage was to take place on February 3, he was killed in an encounter 14 days ago
अरशद की फाइल फोटो। - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

मेरठ एसटीएफ के साथ मुठभेड़ में ढेर हुए एक लाख के इनामी बदमाश अरशद का शव पोस्टमार्टम के बाद बुधवार सुबह गांव में पहुंचा। बेटे का शव घर पहुंचते ही उसकी मां हुसैना लिपटकर रोने लगी। इसके बाद भारी पुलिस बल की मौजूदगी में शव को सुपुर्द-ए-खाक किया गया। 
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अरशद की मौत को लेकर परिजनों का कहना है कि वह तो नई जिंदगी शुरू करना चाहता था। तीन फरवरी को देहरादून में उसका निकाह भी होना था, लेकिन इससे पहले ही उसकी जिंदगी का अंत हो गया।
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Shamli Encounter: Arshad's marriage was to take place on February 3, he was killed in an encounter 14 days ago
सहारनपुर में गमजदा बैठे अरशद के परिजन। - फोटो : अमर उजाला
अरशद चार भाइयों में सबसे छोटा था। बड़े भाई राशिद ने बताया कि शुरुआत में वह गलत संगत में पड़ गया था। मुस्तफा उर्फ कग्गा के साथ मिलकर अपराध किया था, जिसकी उसने 14 साल तक सजा भी काटी थी। करीब छह माह पहले वह जेल से आया था। अब वह शांति का जीवन जीना चाहता था। वह हमेशा निकाह के लिए मना करता था, लेकिन कुछ समय पहले उसने सहमति जता दी थी कि वह निकाह के लिए तैयार है।
 
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इसके बाद देहरादून में रिश्ता भी तय कर दिया था। तीन फरवरी को निकाह होना था। दोनों परिवार शादी की तैयारियों में जुटे थे, लेकिन क्या पता था कि यह सब हो जाएगा। राशिद ने बताया कि 20 जनवरी को शाम करीब पांच बजे अरशद से फोन पर बात हुई थी। अरशद ने बताया था कि वह पानीपत के राना माजरा गांव में बहन के यहां पर है।
जेल से आने के बाद अकसर वह बहन के यहां पर जाता रहता था। 21 जनवरी को सुबह पता चला कि वह मुठभेड़ में मारा गया। बता दें कि शामली में मुठभेड़ का पता चलते ही मंगलवार सुबह उसके तीनों भाई राशिद, साजिद और वाजिद शव लेने के लिए चले गए थे, जो बुधवार सुबह लौटे।
 
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मुठभेड़ पर उठाए सवाल, बोले जाएंगे अदालत
अरशद के भाई राशिद ने मुठभेड़ पर सवाल उठाए। राशिद का कहना है कि यह मुठभेड़ फर्जी है। मुठभेड़ में पुलिस पैर में गोली मारती है, लेकिन अरशद के पैर में गोली नहीं मारी गई, उसे सीधे मौत के घाट उतार दिया। राशिद ने यह भी आरोप लगाए कि 2011 में शामली में डकैती के बाद अरशद ने कोई अपराध नहीं किया। पुलिस ने जेल में रहते हुए उस पर कई मामले दर्ज किए। मुठभेड़ को लेकर अदालत का दरवाजा खटखटाएंगे।
 

18 दिसंबर को हुआ था एक लाख का इनाम
बेहट स्थित फाइनेंस कंपनी में 29 नवंबर की रात डकैती डाली गई थी। पुलिस के अनुसार, जांच के दौरान इस मामले में अरशद का नाम सामने आया। इसके बाद 13 दिसंबर को गंगोह कोतवाली में हिस्ट्रीशीट खोली गई। पुलिस की तरफ से 50 हजार का इनाम घोषित कर दिया गया। 18 दिसंबर को इनाम की राशि बढ़ाकर एक लाख रुपये कर दी गई। पुलिस तभी से उनकी तलाश में जुटी हुई थी।
 

कग्गा ने युवाओं को धकेला अपराध की दलदल में
बाढ़ी माजरा के ग्रामीणों का कहना है कि यह सब गांव के ही कुख्यात बदमाश मुस्तफा उर्फ कग्गा की देन है। कग्गा 2009 में सक्रिय हुआ था। इसके बाद उसने ताबड़तोड़ वारदात कर पुलिस को चुनौती दी। यहां तक कि कई पुलिसकर्मियों की हत्या भी की। ग्रामीणों का कहना है कि कग्गा ने गांव के कई युवाओं की जिंदगी बर्बाद की। उन्हें लालच देकर अपराध के दलदल में उतारा। अरशद भी उन्हीं युवाओं में से एक था। किताबें थामने की उम्र में उसने इन युवाओं के हाथों में तमंचे पकड़ाए और मोटे पैसे व नाम कमाने के सब्जबाग दिखाकर उन्हें अपने गिरोह में शामिल कर लिया। इनमें से इसरान और राशिद आज भी जेल में हैं, जबकि एक अन्य बदमाश असजद गैंगवार में मारा जा चुका है। हालांकि इनमें से कुछ ने समय रहते अपराध की दुनिया से तौबा कर मेहनत-मजदूरी शुरू कर दी।



 
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