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Shamli: 'गर्भवती है, देगी 14 किलो दूध', फार्म मालिक ने झूठ बोलकर बेच दी गाय, 40 तारीखों के बाद आया ये फैसला
Wed, 06 May 2026 11:03 PM IST
Mohd Mustakim
अमर उजाला नेटवर्क, शामली
अमर उजाला नेटवर्क, शामली
Published by: Mohd Mustakim
Updated Wed, 06 May 2026 11:03 PM IST
सार
राजस्थान के फार्म मालिक से पशुपालक ने यू ट्यूब वीडियो देखकर 45 हजार की गाय खरीदी थी। गाय को आठ माह की गर्भवती बताया गया था, लेकिन वह गर्भवती नहीं थी। पशुपालक ने गाय वापस करनी चाही, तो वो भी नहीं हुई। इसके बाद उसने उपभोक्ता फोरम का दरवाजा खटखटाया।
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सांकेतिक तस्वीर।
- फोटो : PTI
विस्तार
सोशल मीडिया के माध्यम से राजस्थान के श्रीगंगानगर के फार्म मालिक ने गाय को आठ माह की गर्भवती बताकर बेच दिया। जब दो माह बाद भी गाय ने बच्चा नहीं दिया तो शामली निवासी खरीदार ने डॉक्टर को दिखाया। पता चला कि गाय गर्भवती नहीं है। इसके बाद खरीदार पशुपालक ने जिला उपभोक्ता विवाद प्रतितोष आयोग में अपील की। अब आयोग ने फार्म मालिक व यू ट्यूब चैनल समेत दो लोगों पर 2.25 लाख रुपये का जुर्माना लगाया है। परिवादी को मानसिक व आर्थिक क्षति के लिए मुआवजा देने के आदेश दिए हैं।
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गागौर गांव निवासी किसान विपिन कुमार ने 24 अक्तूबर 2023 को आयोग में परिवाद दायर किया था। उन्होंने बताया कि 23 जुलाई 2023 को सोशल मीडिया पर राजस्थान के श्रीगंगानगर के कमीनपुरा स्थित मालिक फार्म टॉक यूट्यूब चैनल पर गाय बिक्री का वीडियो देखा था। इसमें एक गाय की कीमत 45 हजार रुपये बताई गई थी, जिसे आठ माह की गर्भवती और बछड़ा होने पर प्रतिदिन 14 किलो दूध देने वाली बताया गया था।
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वीडियो में दिए गए संपर्क नंबर पर बात करने के बाद 45 हजार रुपये में गाय का सौदा तय हुआ। परिवादी ने 30 हजार रुपये ऑनलाइन भेज दिए, जबकि शेष राशि डिलीवरी के समय देने की सहमति बनी। 24 जुलाई 2023 को गाय उनके घर पहुंच गई। बाकी रुपये डिलीवरी के समय दे दिए।
दो माह बाद भी गाय ने बच्चा नहीं दिया तो पशु चिकित्सकों से जांच कराने पर स्पष्ट हुआ कि गाय गर्भवती नहीं थी। इसके बाद पीड़ित ने आरोपियों से संपर्क कर रुपये वापस मांगे, तो उन्होंने अभद्रता करते हुए गाय वापस लेने से इन्कार कर दिया। इसके बाद पीड़ित जिला उपभोक्ता आयोग में अपील की। मामले की सुनवाई के बाद आयोग के चेयरमैन हेमंत कुमार गुप्ता ने पाया कि परिवादी को गलत जानकारी देकर गाय बेची गई, जिससे उसे मानसिक और आर्थिक क्षति हुई।
आयोग ने आरोपियों श्रीगंगानगर के कमीनपुरा निवासी शीशपाल पुत्र राजकुमार और मालिक फार्म टॉक यूट्यूब चैनल (गोवर्धन एवं संवर्धन चैनल) के संचालक जयपाल सिंह को दोषी मानते हुए 20 हजार रुपये मुआवजा, 5 हजार रुपये वाद व्यय और दो लाख रुपये का अर्थदंड लगाने का आदेश दिया। आदेश में कहा गया है कि 45 दिन के भीतर भुगतान न करने पर उपभोक्ता अधिनियम के तहत आगे की कार्रवाई की जाएगी। इसमें दो लाख रुपये आयोग में जमा हो जाएंगे, जबकि 25 हजार रुपये पीड़ित पशुपालक को मिलेंगे।
गाय को करनाल गोशाला में भेज दिया था
किसान विपिन कुमार ने बताया कि वर्ष 2025 में उक्त गाय को करनाल की गोशाला में भिजवा दिया गया था। इसके बाद उन्होंने गंगानगर से दूसरी गाय खरीदी, जिसे वह पाल रहे हैं।
गाय को करनाल गोशाला में भेज दिया था
किसान विपिन कुमार ने बताया कि वर्ष 2025 में उक्त गाय को करनाल की गोशाला में भिजवा दिया गया था। इसके बाद उन्होंने गंगानगर से दूसरी गाय खरीदी, जिसे वह पाल रहे हैं।
40 से अधिक तारीखों के बाद मिला न्याय
विपिन ने कहा कि आयोग के फैसले का सम्मान करते हैं। शुरुआत में वह इस मामले को छोड़ने के बारे में सोच रहे थे, लेकिन परिजनों के हौसले के बाद केस जारी रखा। 40 से अधिक सुनवाई के बाद यह फैसला आया है। उन्होंने लोगों से अपील की कि इस तरह की धोखाधड़ी के मामलों में उपभोक्ता आयोग के माध्यम से न्याय जरूर लें।
विपिन ने कहा कि आयोग के फैसले का सम्मान करते हैं। शुरुआत में वह इस मामले को छोड़ने के बारे में सोच रहे थे, लेकिन परिजनों के हौसले के बाद केस जारी रखा। 40 से अधिक सुनवाई के बाद यह फैसला आया है। उन्होंने लोगों से अपील की कि इस तरह की धोखाधड़ी के मामलों में उपभोक्ता आयोग के माध्यम से न्याय जरूर लें।
जानिए... कौन लोग कर सकते हैं परिवाद दायर
ऐसा लेनदेन या सेवा जिसमें धन का आदान-प्रदान हुआ है। उससे संबंधित किसी भी शिकायत की सुनवाई उपभोक्ता प्रतितोष आयोग में हो सकती है। इसके दायरे में सरकारी प्रतिष्ठानों जैसे टेलीफोन, विद्युत, डाक, बीमा, मेडिकल, सभी मार्केट आदि सेवाएं भी आती हैं।
ऐसा लेनदेन या सेवा जिसमें धन का आदान-प्रदान हुआ है। उससे संबंधित किसी भी शिकायत की सुनवाई उपभोक्ता प्रतितोष आयोग में हो सकती है। इसके दायरे में सरकारी प्रतिष्ठानों जैसे टेलीफोन, विद्युत, डाक, बीमा, मेडिकल, सभी मार्केट आदि सेवाएं भी आती हैं।
सुनवाई का अधिकार
जिला उपभोक्ता विवाद प्रतितोष आयोग में एक रुपये से लेकर पांच लाख या उससे अधिक के परिवादों की सुनवाई की जाती है।
फोरम के दंडाधिकार
जिला उपभोक्ता विवाद प्रतितोष आयेाग में दोषी पाए जाने पर आरोपी को जुर्माने के अलावा अधिकतम तीन साल की जेल, अर्थदंड और जरूरत पड़ने पर वारंट जारी कराया जा सकता है।
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जिला उपभोक्ता विवाद प्रतितोष आयोग में एक रुपये से लेकर पांच लाख या उससे अधिक के परिवादों की सुनवाई की जाती है।
फोरम के दंडाधिकार
जिला उपभोक्ता विवाद प्रतितोष आयेाग में दोषी पाए जाने पर आरोपी को जुर्माने के अलावा अधिकतम तीन साल की जेल, अर्थदंड और जरूरत पड़ने पर वारंट जारी कराया जा सकता है।
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