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स्कूल में बांधे गोवंश, गली में लगी क्लास
Tue, 29 Jan 2019 11:05 PM IST
NAVEEN GUPTA
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Published by: NAVEEN GUPTA
Updated Tue, 29 Jan 2019 11:05 PM IST
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- फोटो : amarujala
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कुड़ाना के ग्रामीणों ने गांव में आवारा घूम रहे गोवंश पकड़कर कन्या उच्च प्राथमिक स्कूल में बंद कर ताला लगा दिया। जिस कारण छात्राओं को स्कूल के बाहर गली में ही बैठकर पढ़ना पड़ा। शिक्षिकाओं की सूचना पर पहुुंचे नायब तहसीलदार और पुलिस ने ग्रामीणों से वार्ता की।
सोमवार रात को ही ग्रामीणों ने गांव में आवारा घूमने वाले करीब 24 गोवंश को पकड़कर उच्च प्राथमिक कन्या स्कूल के परिसर में बंद कर दिया था। सुबह स्कूल की शिक्षिकाएं और छात्राएं स्कूल पहुंचीं, तो गेट का ताला लगा था। ग्रामीण भी मौके पर जमा थे। शिक्षिकाओं ने गेट बंद पर एतराज जताया। उन्होंने गोवंश को स्कूल परिसर से बाहर करने को कहा, लेकिन ग्रामीणों ने कह दिया जब तक अधिकारी आकर इन्हें गोशाला भेजने की व्यवस्था नहीं करेंगे ये पशु यहीं बंधे रहेंगे। शिक्षिकाओं ने स्कूल की छात्राओं को स्कूल के बाहर गली में ही दरी डालकर बैठाया और अधिकारियों को सूचना दी। कुछ देर बाद नायब तहसीलदार सुरेंद्र सिंह और कोतवाली पुलिस मौके पर पहुंची और ग्रामीणों से वार्ता की। अधिकारियों का कहना था कि अधिकांश अधिकृत गोशालाएं भर चुकी हैैं। अधिकारी चाहते थे कि स्थायी व्यवस्था होने तक ग्रामीण ही आपसी सहयोग से उन्हें कुछ दिन कहीं और रखने की व्यवस्था कर लें। सहमति नहीं बनने पर नायब तहसीलदार ने बुटराड़ा में उन्हें रखने की अस्थायी व्यवस्था कराई। जिसके बाद शाम को ग्रामीण उन्हें वहां छोड़ने गए।
हमारे खेत बर्बाद कर दिए
बबलू, रोहताश, राजकुुमार, प्रमोद, रमन, सोनू आदि ग्रामीणों का कहना था कि गांव में आवारा पशु खेतों में घुसकर फसलें बर्बाद कर रहे हैं। रात को खेत में पानी चलाने जाना पड़ता है और अंधेरे में टक्कर मार देते हैं। पूरा गांव इनसे परेशान हैं। अब सरकार उन्हें गोशाला भेज रही है तो उनके गांव के गोवंश को भी गोशाला भेजा जाए।
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दूसरे स्कूल में शिफ्ट किए
सुबह स्कूल में गोवंश बंधने के बाद प्रधानाध्यापिका ने उन्हें स्कूल के बाहर बैठाकर पढ़ाने की व्यवस्था की। प्रधानाध्यापिका पुष्पा शर्मा के अनुसार स्कूल में कुल 140 छात्राएं नामांकित हैं। उन्हें दरी डालकर पढ़ाया गया। बाद में नायब तहसीलदार के आने के बाद इन छात्राओं को गांव के ही नजदीकी प्राइमरी पाठशाला नंबर एक में भेजा गया।
फिलहाल बुटराड़ा गांव में गोवंश को अस्थायी रुप से रखने की व्यवस्था कर ली है। कुछ दिन बाद उनके रहने की स्थायी व्यवस्था करा दी जाएगी। स्कूल की छात्राएं कल से अपने ही स्कूल में बैठकर पढे़ंगी। - सुरेंद्र कुमार, नायब तहसीलदार
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सोमवार रात को ही ग्रामीणों ने गांव में आवारा घूमने वाले करीब 24 गोवंश को पकड़कर उच्च प्राथमिक कन्या स्कूल के परिसर में बंद कर दिया था। सुबह स्कूल की शिक्षिकाएं और छात्राएं स्कूल पहुंचीं, तो गेट का ताला लगा था। ग्रामीण भी मौके पर जमा थे। शिक्षिकाओं ने गेट बंद पर एतराज जताया। उन्होंने गोवंश को स्कूल परिसर से बाहर करने को कहा, लेकिन ग्रामीणों ने कह दिया जब तक अधिकारी आकर इन्हें गोशाला भेजने की व्यवस्था नहीं करेंगे ये पशु यहीं बंधे रहेंगे। शिक्षिकाओं ने स्कूल की छात्राओं को स्कूल के बाहर गली में ही दरी डालकर बैठाया और अधिकारियों को सूचना दी। कुछ देर बाद नायब तहसीलदार सुरेंद्र सिंह और कोतवाली पुलिस मौके पर पहुंची और ग्रामीणों से वार्ता की। अधिकारियों का कहना था कि अधिकांश अधिकृत गोशालाएं भर चुकी हैैं। अधिकारी चाहते थे कि स्थायी व्यवस्था होने तक ग्रामीण ही आपसी सहयोग से उन्हें कुछ दिन कहीं और रखने की व्यवस्था कर लें। सहमति नहीं बनने पर नायब तहसीलदार ने बुटराड़ा में उन्हें रखने की अस्थायी व्यवस्था कराई। जिसके बाद शाम को ग्रामीण उन्हें वहां छोड़ने गए।
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हमारे खेत बर्बाद कर दिए
बबलू, रोहताश, राजकुुमार, प्रमोद, रमन, सोनू आदि ग्रामीणों का कहना था कि गांव में आवारा पशु खेतों में घुसकर फसलें बर्बाद कर रहे हैं। रात को खेत में पानी चलाने जाना पड़ता है और अंधेरे में टक्कर मार देते हैं। पूरा गांव इनसे परेशान हैं। अब सरकार उन्हें गोशाला भेज रही है तो उनके गांव के गोवंश को भी गोशाला भेजा जाए।
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दूसरे स्कूल में शिफ्ट किए
सुबह स्कूल में गोवंश बंधने के बाद प्रधानाध्यापिका ने उन्हें स्कूल के बाहर बैठाकर पढ़ाने की व्यवस्था की। प्रधानाध्यापिका पुष्पा शर्मा के अनुसार स्कूल में कुल 140 छात्राएं नामांकित हैं। उन्हें दरी डालकर पढ़ाया गया। बाद में नायब तहसीलदार के आने के बाद इन छात्राओं को गांव के ही नजदीकी प्राइमरी पाठशाला नंबर एक में भेजा गया।
फिलहाल बुटराड़ा गांव में गोवंश को अस्थायी रुप से रखने की व्यवस्था कर ली है। कुछ दिन बाद उनके रहने की स्थायी व्यवस्था करा दी जाएगी। स्कूल की छात्राएं कल से अपने ही स्कूल में बैठकर पढे़ंगी। - सुरेंद्र कुमार, नायब तहसीलदार