फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Shamli News ›   Sanjhi as Maa Durga, seated in homes

पितृ पक्ष के श्राद्ध हुए समाप्त, पितरों की हुई विदाई

Sun, 25 Sep 2022 11:48 PM IST
Meerut Bureau मेरठ ब्यूरो
Updated Sun, 25 Sep 2022 11:48 PM IST
विज्ञापन
Sanjhi as Maa Durga, seated in homes
पितृ पक्ष के श्राद्ध हुए संपन्न होते ही पितरों की विदाई
विज्ञापन

संवाद न्यूज एजेंसी
शामली। पितृ अमावस्या के सााि पितरो को विदाई दी गई। वहीं, घरों में मां दुुर्गा का प्रतीक सांझी विराजमान हो गई हैं। शारदीय दुर्गा नवरात्र सोमवार से शुरू हो रहे हैं। प्रथम दिन कलश स्थापना के साथ मां शैल पुत्री की विशेष पूजा-अर्चना होगी।
शारदीय नवरात्र की प्रतिपदा तिथि सोमवार को सुबह 3:23 बजे से शुरू होगी। कलश की स्थापना के बाद पूरे दिन मां शैलपुत्री की विशेष पूजा-अर्चना होगी। प्रतिप्रदा 27 सितंबर मंगलवार को सुबह 3:08 बजे तक रहेगी। इसके बाद मां दुर्गा के दूसरे स्वरुप में ब्रह्मचारिणी की विशेष पूजा-अर्चना होगी।
विज्ञापन

पंडित प्रभुशंकर शास्त्री के मुताबिक मिट्टी, तांबा या स्टील का कलश नवरात्र के प्रथम दिन शुभ मुहूर्त में ईशान कोण में स्थापित करके घट में पहले थोड़ी सी मिट्टी डालें। फिर जौ डालें। एक परत मिट्टी की बिछा दें। एक बार फिर जौ डालकर मिट्टी की परत बिछाएं। जल का छिड़काव करके पात्र को मिट्टी से भर दें। अब इस पात्र को स्थापित करके पूजन करें। उस पर साफ लाल कपड़ा बिछाकर फिर उस पर घट स्थापित करें।
विज्ञापन
विज्ञापन

उन्होंने बताया कि घट पर रोली या चंदन से स्वास्तिक बनाएं। घट के गले में मौली बांधे। तांबे के कलश में जल भरकर और उसके ऊपरी भाग पर कलावा बांधकर उसे उस मिट्टी के पात्र अर्थात घट के उपर रखें। अब कलश के ऊपर पत्ते रखें, पत्तों के बीच में कलावा बंधा हुआ नारियल लाल कपड़े में लपेटकर रखें। घट और कलश की पूजा करें। फल, मिठाई, प्रसाद आदि घट के आसपास रखें।
इसके बाद गणेश वंदना करें और फिर देवी का आह्वान करें। देवी-देवताओं का आह्वान कर प्रार्थना करें कि हे समस्त देवी-देवता, आप सभी नौ दिन के लिए कलश में विराजमान हों। कलश की पूजा करें। कलश को टीका करें, अक्षत चढ़ाएं, फूलमाला अर्पित करें, इत्र अर्पित करें, नैवेद्य यानी फल-मिठाई आदि अर्पित करें। मूर्ति, घट और कलश सहित अखंड ज्योति की प्रतिदिन पूजा और आराधना विधिवत रूप में करें और माता को भोग लगाएं। पूरे नौ दिन व्रत रखकर प्रतिदिन दुर्गा चालीसा, चंडी पाठ या दुर्ग सप्तशती का पाठ करें।

कलश स्थापना का शुभ मुहूर्त
शुभ मुहूर्त सुबह- 6:11 बजे से 7:41 बजे तक
स्थिर लग्न प्रात- 09:15 से 12:35 तक
विजय मुहूर्त : दोपहर- 2:29 से 3:17 तक
राहुकाल- 7:42 से 9:12 प्रात:
साप्ताहिक अवकाश में बाजार खुले
पितृ अमावस्या और श्री दुर्गा नवरात्र के मद्देनजर रविवार को साप्ताहिक अवकाश के दौरान दुकानें खुली रहीं। श्रद्धालुओं ने मां दुर्गा का स्वरूप में सांझी की खरीददारी की। अंतिम दिन भी श्रद्धालुओं ने मिट्टी की बनी सांझी, अखंड ज्योति के लिए घी, नरियल, चुनरी मां का शृंगार, फूल आदि की खरीदारी की गई। श्रीदुर्गा नवरात्र का सामान खरीदने के लिए महिला-पुरुष श्रद्धालुओं की बाजारों में भीड़ उमड़ पड़ी।
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed