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सिर पर छत ना खाने को रोटी, ऐसे कट रही जिंदगी
ब्यूरो, अमर उजाला/ शामली
Updated Sun, 29 Jul 2018 11:44 PM IST
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झिंझाना में खुली छत के नीचे खाना बनाती महिला।
- फोटो : अमर उजाला
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शामली में मुफलिसी और बदकिस्मती की मार झेल रहे गरीबों पर कुदरत का कहर ऐसा टूटा कि सब कुछ बर्बाद हो गया। सिर पर ना छत बची और ना खाने को रोटी। मजदूरी कर पेट पालने वाले गरीबों के सामने रोटी का संकट पैदा हो गया। बस खुले आसमान का सहारा रह गया। गरीब सिर पर छत का इंतजाम करे या फिर अपना पेट भरे? यह सवाल उनके सामने खड़ा हुआ है। अमर उजाला टीम ने जिले में रविवार को पीड़ित लोगों का दर्द साझा किया तो यह हकीकत निकलकर सामने आई।
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दरअसल कई दिनों से पड़ रही बारिश कैराना, कांधला और थानाभवन सहित पूरे जिले में कहर बनकर गिरी। इस दौरान 100 से अधिक मकान और उनकी छत गिर गई। हादसों में तीन की जान भी गई और कई घायल भी हुए है। इन परिवारों में ऐसे भी है जिनकी माली हालत खराब है। मेहनत मजदूरी कर बच्चों का पेट पाल रहे ऐसे लोगों के मकान गिर गए और सामान भी दबकर नष्ट हो गया। जेब में पैसे नहीं है। मकान बनाए या फिर रोटी खाए? सोचकर लोग मायूस है। कैराना के मोहल्ला मुल्तानियान में विधवा जुबेदा एक छोटे से कमरे में रहती थी। शनिवार की सुबह कमरे की छत और एक दीवार गिर गई थी। घर में खाने पीने के सामान के अलावा चारपाई, बिस्तर व कपड़े मलबे में दब गये थे। जुबे दा ने बताया कि उसका एक बेटा है, जो मजदूरी करता है। उसके पास घर की मरम्मत कराने के लिए भी पैसे नहीं है। इसलिए वो रात में पड़ोसी के घर पर सोई। मोहल्ला घोसाचुंगी निवासी सुभाष सैनी का कच्चा मकान गिरने से उसकी पत्नी सुनीता और तीन बच्चे घायल हो गए थे। रविवार को भी घर का सारा सामान मलबे में ही दबा पड़ा था। दोनों पति पत्नी बच्चों के साथ मलबे में तब्दील हुए घर के बाहर एक चारपाई पर बैठे थे। सुभाष ने बताया कि फिलहाल भाई के घर से खाना बनकर आता है। गांव पंजीठ निवासी रविंद्र कश्यप भी अपने तीन बच्चों के साथ टूटे मकान के आगे बैठा था। रविंद्र ने बताया कि वो किसानों के खेतों में मजदूरी करके परिवार को पेट पालता है। उसकी पत्नी पूनम बीमार है। रात को उसका परिवार घर के बाहर खुले आसमान के नीचे सोया। उसे समझ नहीं आ रहा कि अब उसका घर कैसे बनेगा?
थानाभवन के गांव तितारसी निवासी सत्यवीर सिंह के घर में चार बच्चे और पत्नी है। बड़ा बेटा 18 साल का हुआ तो उसने सोचा कि वह परिवार में हाथ बटाएगा, लेकिन दुर्भाग्य ये है कि उसे ब्रेन कैंसर हो गया। पहले ही मुफलिसी की जिंदगी जी रहे सत्यवीर पर और मुसीबत आन पड़ी। बारिश हुई तो घर की रसोई भी गिर गई। अब बेटे का उपचार करना तो दूर की बात रसोई ठीक कराने के भी पैसे नहीं है। कांधला क्षेत्र के गांव इस्सोपुरटील निवासी मेनपाल के मकान की छत शुक्रवार की रात गिर गई थी। इसके बाद उसका परिवार खुले आसमान के नीचे आ गया। मजदूरी करके परिवार का पेट पालने वाले मेनपाल के सामने सिर पर छत और अगले टाइम रोटी खाने का संकट पैदा हो गया। हालांकि ग्रामीणों ने व्यक्तिगत स्तर पर उसकी कुछ मदद की है।
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