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जांच रिपोर्ट नेगेटिव, फेफड़ों में इंफेक्शन तो मान लीजिए कोरोना है

Mon, 24 May 2021 11:55 PM IST
Meerut Bureau मेरठ ब्यूरो
Updated Mon, 24 May 2021 11:55 PM IST
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Report negative if there is lung infection, corona is
रिपोर्ट निगेटिव, फेफड़ों में संक्रमण है, तो कोरोना है
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शामली। कोरोना संक्रमण काल में अलग तरह के मामले सामने आ रहे हैं। इनमें एंटीजन और आरटीपीसीआर जांच रिपोर्ट निगेटिव होने के बाद भी फेफड़ों में संक्रमण फैल रहा है। जब तक मरीज को पता चलता है तब तक स्थिति गंभीर हो जाती है और सांस लेने में तकलीफ होने लगती है। चिकित्सकों का कहना है कि यह संक्रमण भी कोरोना की वजह से होता है, जो कई कारण से जांच में नहीं आ पाता। मरीजों को कोरोना की तरह ही सावधानी बरतने की जरूरत होती है।
जिले में कोरोना संक्रमण की जांच एंटीजन किट और आरटीपीसीआर द्वारा की जा रही है। इनमें कुछ लोगों की दोनों जांच रिपोर्ट निगेटिव आने के बाद भी फेफड़ों में संक्रमण के मामले सामने आ रहे हैं। जब तक मरीज को पता चलता है तब तक उसकी स्थिति गंभीर हो जाती है।
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सीएमएस डॉ. सफल कुमार ने बताया कि कई वजह से कोरोना के लक्षण वाले लोगों की लगभग 30 प्रतिशत जांच रिपोर्ट निगेटिव आती है। ऐसे मरीजों को प्रज्मेटिव कहा जाता है। सरकार की गाइड लाइन के अनुसार जिला अस्पताल में अलग से प्रज्मेटिव वार्ड बनाया गया है। जांच भले ही निगेटिव आए, लेकिन अगर लक्षण हैं तो तत्काल चिकित्सकों से सलाह लेकर उपचार शुरू कर देना चाहिए, अन्यथा फेफड़ों में संक्रमण होने से निमोनिया बन जाता है, जिससे सांस लेने में परेशानी होने लगती है।
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कोविड कंट्रोल एंड कमांड सेंटर के प्रभारी एसीएमओ डॉ. श्रीकांत शर्मा ने बताया कि इस तरह के मामले सामने आए हैं कि जांच रिपोर्ट निगेटिव है, लेकिन दोनों फेफड़े संक्रमित हो गए। यह कोरोना के प्रभाव की वजह से ही होता है। यह उन लोगों में ज्यादा होता है, जिनकी इम्युनिटी कम होती है, या जो लोग ब्लड प्रेशर, शुगर व कैंसर से पहले से ग्रसित होते हैं। कोरोना उनके फेफड़ों तक पहुंचने पर निमोनिया बन जाता है।
जांच रिपोर्ट नेेगेटिव आने के कारण
- जांच के समय कोरोना वायरस का प्रभाव कम होना।
- सैंपल का सही तरीके से न लिया जाना।
- समय से पहले जांच कराना।
प्रज्मेटिव केस के लक्षण
- सांस फूलना।
- बुखार आना।
- सूखी खांसी होना।
- शरीर में दर्द रहना।
सावधानियां
- 14 दिन आइसोलेशन में रहकर उपचार शुरू करें।
- एंटीजन व आरटीपीसीआर जांच दोबारा कराएं।
- ऑक्सीमीटर से ऑक्सीजन स्तर की जांच करें।
- किसी भी तरह की परेशानी होने पर चिकित्सक की सलाह लें।
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