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बारिश से किसानों को राहत, धान रोपाई तेज
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थानाभवन के जलालाबाद में बरसात के बाद लगाई गई धान की फसल
- फोटो : SHAMLI
थानाभवन। वैसे तो करीब दस से 15 दिन पूर्व किसानों ने बारिश के इंतजार के बाद ट्यूबवेलों से पानी चलाकर धीरे-धीरे धान की रोपाई का काम शुरू कर दिया था, लेकिन पिछले दो दिन के भीतर हुई बारिश ने किसानों को काफी सहारा लगाया है। इसी का परिणाम है कि बारिश के बाद किसानों ने धान की रोपाई का काम तेज कर दिया है, साथ ही जिन खेतों में धान लगाए जा चुके हैं, वहां भी बारिश से फसल को काफी फायदा पहुंच रहा है।
क्षेत्र की बात करें तो यहां लगभग 70 फीसदी के आसपास धान की रोपाई का काम पूरा हो चुका है। एक खाद बीज विक्रेता की मानें तो इस साल किसानों को बारीक धान में 1509 और 1121 का बीज काफी प्रभावित कर रहा है। जबकि, मोटा धान लगाने वाले किसानों की पीआर 14 पहली पसंद बनी हुई है। इसमें 75 फीसदी किसान 1509 किस्म का बीज का इस्तेमाल कर रहे हैं। जबकि, बाकी 25 फीसदी किसान 1121 और पीआर 14 किस्म का बीज धान की रोपाई में इस्तेमाल कर रहे हैं।
बोले किसान
बारिश का काफी इंतजार करने के बाद तीन दिन पहले ही दस बीघा खेत में धान की रोपाई का काम पूरा किया है। हालांकि, अब भी जब बारिश आई तो इससे भी फसल को काफी फायदा पहुंचा है। क्योंकि, बारिश की कमी लगने के कारण फसल को नुकसान होता है। हमने 1509 किस्म के बीज का इस्तेमाल किया है। - रमेश कुमार सिंह
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30 बीघा खेत में धान की रोपाई ट्यूबवेल से पानी चलाकर करनी संभव नहीं हो पा रही थी। दो दिन में हुई बारिश और ट्यूबवेल चलाकर धान की रोपाई का काम पूरा किया गया है। इस बारिश से काफी राहत मिली है। हमारे क्षेत्र में अधिकांश बारीक धान की ही रोपाई की जाती है। - सीटू सिंह
20 हजार हेक्टेयर का रखा गया है लक्ष्य
कृषि विभाग ने इस साल बीस हजार हेक्टेयर क्षेत्रफल में धान की रोपाई का लक्ष्य रखा गया था। इसमें से लगभग 70 फीसदी क्षेत्रफल में धान की रोपाई का काम पूरा किया जा चुका है। शामली जिले में मोटे धान की रोपाई ना के बराबर ही होती है। इसलिए मोटे धान का कोई लक्ष्य निर्धारित नहीं किया जाता। - राम निवास, अधिकारी अपर जिला कृषि
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क्षेत्र की बात करें तो यहां लगभग 70 फीसदी के आसपास धान की रोपाई का काम पूरा हो चुका है। एक खाद बीज विक्रेता की मानें तो इस साल किसानों को बारीक धान में 1509 और 1121 का बीज काफी प्रभावित कर रहा है। जबकि, मोटा धान लगाने वाले किसानों की पीआर 14 पहली पसंद बनी हुई है। इसमें 75 फीसदी किसान 1509 किस्म का बीज का इस्तेमाल कर रहे हैं। जबकि, बाकी 25 फीसदी किसान 1121 और पीआर 14 किस्म का बीज धान की रोपाई में इस्तेमाल कर रहे हैं।
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बोले किसान
बारिश का काफी इंतजार करने के बाद तीन दिन पहले ही दस बीघा खेत में धान की रोपाई का काम पूरा किया है। हालांकि, अब भी जब बारिश आई तो इससे भी फसल को काफी फायदा पहुंचा है। क्योंकि, बारिश की कमी लगने के कारण फसल को नुकसान होता है। हमने 1509 किस्म के बीज का इस्तेमाल किया है। - रमेश कुमार सिंह
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30 बीघा खेत में धान की रोपाई ट्यूबवेल से पानी चलाकर करनी संभव नहीं हो पा रही थी। दो दिन में हुई बारिश और ट्यूबवेल चलाकर धान की रोपाई का काम पूरा किया गया है। इस बारिश से काफी राहत मिली है। हमारे क्षेत्र में अधिकांश बारीक धान की ही रोपाई की जाती है। - सीटू सिंह
20 हजार हेक्टेयर का रखा गया है लक्ष्य
कृषि विभाग ने इस साल बीस हजार हेक्टेयर क्षेत्रफल में धान की रोपाई का लक्ष्य रखा गया था। इसमें से लगभग 70 फीसदी क्षेत्रफल में धान की रोपाई का काम पूरा किया जा चुका है। शामली जिले में मोटे धान की रोपाई ना के बराबर ही होती है। इसलिए मोटे धान का कोई लक्ष्य निर्धारित नहीं किया जाता। - राम निवास, अधिकारी अपर जिला कृषि