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Shamli News: रावण अंगद संवाद की लीला का मंचन किया
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फोटो
कैराना। गोशाला भवन में चल रहे श्री रामलीला महोत्सव के 14वें दिन का शुभारंभ वरिष्ठ नेत्र चिकित्सक डॉ़ सपन कुमार गर्ग और नितिन गर्ग द्वारा दीप प्रज्ज्वलित कर किया गया।
प्रथम दृश्य में दिखाया गया कि वानर सेना के सहयोग से पुल तैयार किया जाता है। पुल तैयार होने के बाद रामचंद्र जी और वानर सेना लंका में पहुंच जाते हैं और वहां जाकर भगवान शंकर की रामेश्वरम धाम की स्थापना के लिए विद्वान पंडित रावण को बुलाया जाता है। युद्ध प्रारंभ करने से पूर्व अंगद जी को दूत के तौर पर रावण के दरबार में भेजा जाता है। उधर, रावण अपनी तमाम सेना के साथ युद्ध की योजना बना रहे होते हैं, तभी वहां पर विभीषण रावण को समझाते हैं कि श्री रामचंद्र जी साधारण मानव नहीं हैं। वह नारायण का अवतार हैं, उनसे युद्ध करना गलत है। मगर रावण नहीं मानता है और अपने दरबार से बेइज्जती करके भगा देता है। विभीषण जी सीधे राम दल में जाते हैं और रामचंद्र जी उन्हें लंका के राजा का राजतिलक करते हैं। वहीं अंगद रावण के दरबार में पहुंच जाता है और रावण से कहता है कि ऐसा कृत्य न करे, परंतु अभिमानी रावण नहीं मानता है और तभी अंगद रावण से कहता है कि मैं तेरे दरबार में अपना पैर जमाता हूं। परंतु कोई भी योद्धा अंगद का पैर नहीं हिला पाता, तभी रावण उसका पैर उखाड़ने के लिए खड़ा होता है तो अंगद कहता है कि यदि पैर पकड़ना है तो प्रभु श्री राम के पकड़, मेरे पैर पकड़ने से तेरा उद्धार नहीं होगा। राम का अभिनय सतीश प्रजापत, लक्ष्मण का अभिनय राकेश प्रजापत, सीता का अभिनय शिवम गोयल, हनुमान जी का आशु गर्ग, रावण का अभिनय शगुन मित्तल, विभीषण का अभिषेक भारद्वाज, अंगद का अमन गोयल, जामवंत का पियूष गर्ग ने किया।
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कैराना। गोशाला भवन में चल रहे श्री रामलीला महोत्सव के 14वें दिन का शुभारंभ वरिष्ठ नेत्र चिकित्सक डॉ़ सपन कुमार गर्ग और नितिन गर्ग द्वारा दीप प्रज्ज्वलित कर किया गया।
प्रथम दृश्य में दिखाया गया कि वानर सेना के सहयोग से पुल तैयार किया जाता है। पुल तैयार होने के बाद रामचंद्र जी और वानर सेना लंका में पहुंच जाते हैं और वहां जाकर भगवान शंकर की रामेश्वरम धाम की स्थापना के लिए विद्वान पंडित रावण को बुलाया जाता है। युद्ध प्रारंभ करने से पूर्व अंगद जी को दूत के तौर पर रावण के दरबार में भेजा जाता है। उधर, रावण अपनी तमाम सेना के साथ युद्ध की योजना बना रहे होते हैं, तभी वहां पर विभीषण रावण को समझाते हैं कि श्री रामचंद्र जी साधारण मानव नहीं हैं। वह नारायण का अवतार हैं, उनसे युद्ध करना गलत है। मगर रावण नहीं मानता है और अपने दरबार से बेइज्जती करके भगा देता है। विभीषण जी सीधे राम दल में जाते हैं और रामचंद्र जी उन्हें लंका के राजा का राजतिलक करते हैं। वहीं अंगद रावण के दरबार में पहुंच जाता है और रावण से कहता है कि ऐसा कृत्य न करे, परंतु अभिमानी रावण नहीं मानता है और तभी अंगद रावण से कहता है कि मैं तेरे दरबार में अपना पैर जमाता हूं। परंतु कोई भी योद्धा अंगद का पैर नहीं हिला पाता, तभी रावण उसका पैर उखाड़ने के लिए खड़ा होता है तो अंगद कहता है कि यदि पैर पकड़ना है तो प्रभु श्री राम के पकड़, मेरे पैर पकड़ने से तेरा उद्धार नहीं होगा। राम का अभिनय सतीश प्रजापत, लक्ष्मण का अभिनय राकेश प्रजापत, सीता का अभिनय शिवम गोयल, हनुमान जी का आशु गर्ग, रावण का अभिनय शगुन मित्तल, विभीषण का अभिषेक भारद्वाज, अंगद का अमन गोयल, जामवंत का पियूष गर्ग ने किया।
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