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वनवास के लिए गए राम, भरत से मिले
शामली/ ब्यूरो/ अमर उजाला
Updated Sat, 17 Oct 2015 12:56 AM IST
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शामली/जलालाबाद/कैराना। शामली के श्री हनुमान धाम के रंगमंच पर श्रीराम वनवास की लीला का मंचन किया।
रामलीला में राजा दशरथ श्रीराम को राजा बनाने की घोषणा कराते हैं।
कैकेयी राजा से राम को 14 वर्ष तक वनवास और भरत को राज मांगती है। राम, लक्ष्मण और सीता साधु वेश धारण करके वन को जाते हैं। श्रीराम लीला रंगमंच पर श्रीराम का रवि पाठक, लक्ष्मण का आशुतोष पाठक, सीता का योगेश चीकू, कौशल्या का रामेश्वर बछ , कैकेई का अनिल कुमार, सुमित्रा का नामेदव, दशरथ का आदेश शर्मा, सुमंत का प्रदीप सैनी, गुरू वशिष्ठ का डॉ. मधुर गोपाल ने शानदार अभिनय किया। मंच निर्देशक वैद्य उपेंद्र द्विवेदी, पंडित दिनेश पाठक और उत्तम नामदेव ने किया।
उधर, जलालाबाद के गांधी चौक मैदान में रामली
ला में श्रीराम-सीता, लक्ष्मण और सुमंत वनगमन करते हैं। प्रजा वासियों को सोता छोड़ आगे प्रस्थान करते हैं और निशादराज से मित्रता करते हैं। निशादराज गंगा घाट तक छोड़ते हैं। वहां श्रीराम की केवट से भेंट हुई। राम केवट संवाद सुनकर श्रद्धालु भक्तिरस में डूब गए।
उधर, कैराना में श्रीराम लीला में भरत ननिहाल गए हैं। अयोध्या से दूत आ जाता है और भरत शत्रुघ्न को साथ ले जाते हैं। अयोध्या जाने पर दोनों को पता चलता है कि कैकेई माता ने भरत को अयोध्या का राजा बनाने के लिए श्रीराम को वनवास भेज दिया है। भरत जी अयोध्या का राजा बनने से इंकार कर देते हैं और तुरंत मंत्री सुमंत को साथ लेकर राम-लक्ष्मण से मिलने वन में जाते हैं। उनके साथ तीनों माताएं भी जाती हैं।
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रामलीला में राजा दशरथ श्रीराम को राजा बनाने की घोषणा कराते हैं।
कैकेयी राजा से राम को 14 वर्ष तक वनवास और भरत को राज मांगती है। राम, लक्ष्मण और सीता साधु वेश धारण करके वन को जाते हैं। श्रीराम लीला रंगमंच पर श्रीराम का रवि पाठक, लक्ष्मण का आशुतोष पाठक, सीता का योगेश चीकू, कौशल्या का रामेश्वर बछ , कैकेई का अनिल कुमार, सुमित्रा का नामेदव, दशरथ का आदेश शर्मा, सुमंत का प्रदीप सैनी, गुरू वशिष्ठ का डॉ. मधुर गोपाल ने शानदार अभिनय किया। मंच निर्देशक वैद्य उपेंद्र द्विवेदी, पंडित दिनेश पाठक और उत्तम नामदेव ने किया।
उधर, जलालाबाद के गांधी चौक मैदान में रामली
ला में श्रीराम-सीता, लक्ष्मण और सुमंत वनगमन करते हैं। प्रजा वासियों को सोता छोड़ आगे प्रस्थान करते हैं और निशादराज से मित्रता करते हैं। निशादराज गंगा घाट तक छोड़ते हैं। वहां श्रीराम की केवट से भेंट हुई। राम केवट संवाद सुनकर श्रद्धालु भक्तिरस में डूब गए।
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उधर, कैराना में श्रीराम लीला में भरत ननिहाल गए हैं। अयोध्या से दूत आ जाता है और भरत शत्रुघ्न को साथ ले जाते हैं। अयोध्या जाने पर दोनों को पता चलता है कि कैकेई माता ने भरत को अयोध्या का राजा बनाने के लिए श्रीराम को वनवास भेज दिया है। भरत जी अयोध्या का राजा बनने से इंकार कर देते हैं और तुरंत मंत्री सुमंत को साथ लेकर राम-लक्ष्मण से मिलने वन में जाते हैं। उनके साथ तीनों माताएं भी जाती हैं।
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