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राम मंदिर निर्माण: बुलंदशहर जेल में रखे गए थे जिले के राम भक्त
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शामली: पांच अगस्त को अयोध्या में भव्य श्रीराम मंदिर की नींव रखी जाएगी। राम मंदिर निर्माण के लिए लंबा संघर्ष हुआ और आखिरकार सुप्रीम कोर्ट के निर्णय के बाद यह सपना साकार हो रहा है। राम मंदिर आंदोलन में भागेदारी करने वाले लोग गदगद हैं। उन्होंने राम मंदिर के जिस भव्य स्वरूप का सपना देखा था वह साकार होने जा रहा है। आंदोलन में शामिल रहे स्वयं सेवक बताते हैं कि जिले के बहुत से लोगों ने श्रीराम मंदिर की राह में अनेक कष्ट सहे तब जाकर यह दिन आया है।
इस आंदोलन में कई लोगों को जेल जाना पड़ा तथा लंबा संघर्ष करना पड़ा। सेवानिवृत प्रवक्ता एवं आपातकाल के दौरान सहारनपुर में आरएसएस के जिला प्रचारक रहे अमरीश संगल बताते हैं कि 80-90 के दशक में पूरे देश की तरह शामली में भी बड़ा आंदोलन हुआ था। वे उस समय संघ योजना से माध्यमिक शिक्षक संघ के प्रदेश उपाध्यक्ष रहे थे। जनजागरण कार्यक्रमों में शामिल होते थे। शहर में वीवी कॉलेज और डीएवी इंटर कॉलेज बुढ़ाना में अस्थाई जेल बनाई गई थी। 1990 में शहर में बड़ा प्रदर्शन हुआ और बड़ी संख्या में लोग प्रदर्शन करते हुए कोतवाली पहुंच गए। वहां से सभी को गिरफ्तार कर लिया गया। उनके साथ प्रोफेसर अमलेश गुप्ता, आचार्य सुरेश शर्मा समेत अन्य कई लोगों को गिरफ्तार बसों से बुलंदशहर जेल भेजा गया। जेल में जगह नहीं होने के कारण वहां पर डीएवी कॉलेज में बनाई गई अस्थाई जेल में रखा गया। इसके बाद वहां कर्फ्यू लग गया तथा करीब दस दिन बाद उन्हें छोड़ दिया गया।
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लोगों से संपर्क करते, पत्रक बांटकर करते प्रचार
अमरीश संगल बताते हैं कि शिक्षण के साथ राम मंदिर आंदोलन में सक्रिय रहते थे। लोगों से मिलते अं प्रचार करते। पत्रक बांटते थे। वह बताते हैं कि आंदोलन में शामिल होने के कारण उनकी शिक्षक की नौकरी पर भी खतरा था लेकिन उन्होंने आंदोलन से पैर पीछे नहीं खींचे। जिस समय वे बुलंदशहर जेल में बंद थे, उस समय झगड़ा शुरू हो गया था। शामली जनपद में बुलंदशहर के लोगों को रक्षा गया था जबकि शामली के लोगों को बुलंदशहर भेजा गया था।
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इस आंदोलन में कई लोगों को जेल जाना पड़ा तथा लंबा संघर्ष करना पड़ा। सेवानिवृत प्रवक्ता एवं आपातकाल के दौरान सहारनपुर में आरएसएस के जिला प्रचारक रहे अमरीश संगल बताते हैं कि 80-90 के दशक में पूरे देश की तरह शामली में भी बड़ा आंदोलन हुआ था। वे उस समय संघ योजना से माध्यमिक शिक्षक संघ के प्रदेश उपाध्यक्ष रहे थे। जनजागरण कार्यक्रमों में शामिल होते थे। शहर में वीवी कॉलेज और डीएवी इंटर कॉलेज बुढ़ाना में अस्थाई जेल बनाई गई थी। 1990 में शहर में बड़ा प्रदर्शन हुआ और बड़ी संख्या में लोग प्रदर्शन करते हुए कोतवाली पहुंच गए। वहां से सभी को गिरफ्तार कर लिया गया। उनके साथ प्रोफेसर अमलेश गुप्ता, आचार्य सुरेश शर्मा समेत अन्य कई लोगों को गिरफ्तार बसों से बुलंदशहर जेल भेजा गया। जेल में जगह नहीं होने के कारण वहां पर डीएवी कॉलेज में बनाई गई अस्थाई जेल में रखा गया। इसके बाद वहां कर्फ्यू लग गया तथा करीब दस दिन बाद उन्हें छोड़ दिया गया।
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लोगों से संपर्क करते, पत्रक बांटकर करते प्रचार
अमरीश संगल बताते हैं कि शिक्षण के साथ राम मंदिर आंदोलन में सक्रिय रहते थे। लोगों से मिलते अं प्रचार करते। पत्रक बांटते थे। वह बताते हैं कि आंदोलन में शामिल होने के कारण उनकी शिक्षक की नौकरी पर भी खतरा था लेकिन उन्होंने आंदोलन से पैर पीछे नहीं खींचे। जिस समय वे बुलंदशहर जेल में बंद थे, उस समय झगड़ा शुरू हो गया था। शामली जनपद में बुलंदशहर के लोगों को रक्षा गया था जबकि शामली के लोगों को बुलंदशहर भेजा गया था।
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