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बारिश होने से संक्रामक रोगों का बढ़ा खतरा, बरतें सावधानी
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जिले में अब तक मलेरिया के मिल चुके 37 केस
मच्छरों को पनपने से रोकने और काटने से बचाव के करें इंतजाम
संवाद न्यूज एजेंसी
शामली। बारिश होने पर मच्छर जनित संक्रामक रोगों का खतरा बढ़ रहा है। बारिश से जगह-जगह जलभराव होने से मच्छर तेजी से पनपता है। जिससे मलेरिया, डेंगू समेत कई तरह का बुखार होने का खतरा ज्यादा रहता है। जिले में अब तक मलेरिया बुखार के 37 केस सामने आ चुके हैं, जबकि पिछले साल कुल 57 केस थे। चिकित्सकों का कहना है कि मच्छरों के काटने से बचाव के तरीके अपनाने से ही संक्रामक रोगों से बचा जा सकता है।
जिले में दो दिन से लगातार अच्छी बारिश हुई है। इससे जगह-जगह पर गड्ढों, नाले, व नालियों में जलभराव व गंदगी जमा हो गई है। इससे मच्छर तेजी से पनपता है। इसके परिणामस्वरूप संचारी रोगों के फैलने की आशंका बन जाती है। इस मौसम में मच्छर जनित बीमारियां मलेरिया, डेंगू, चिकनगुनिया, फाइलेरिया, जापानी बुखार आदि होने की आशंका ज्यादा रहती है। वैसे ही जिले में अब तक मलेरिया बुखार के 37 केस सामने आ चुके हैं। जुलाई में नौ केस मलेरिया के मिले हैं। डेंगू के कई संभावित केस सामने आ चुके हैं।
स्वास्थ्य विभाग का कहना है कि एलाइजा जांच की रिपोर्ट में अभी तक डेंगू की पुष्टि नहीं हो पाई है। वायरल बुखार पहले से चल ही रहा है। अब बारिश होने से वायरल के साथ मच्छर काटने से होने वाले बुखार के मामले बढ़ सकते हैं। इसलिए लोगों को मच्छरों से बचाव के लिए एहतियात बरतने की जरूरत है। मच्छर जनित रोगों से बचाव की परामर्शदाता राजेश कुमारी ने बताया कि मादा एनाफिलिज मच्छर काटने से मलेरिया होता है। बरसात के मौसम में मच्छर को पनपने से रोकने और काटने से बचाव के लिए एहतियात बरतनी चाहिए। उन्होंने बताया कि बुखार होने पर सरकारी अस्पताल में चिकित्सक से उपचार कराएं।
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मलेरिया के लक्षण
सिरदर्द व उल्टी होना।
ठंड के साथ तेज बुखार होना।
ज्यादा थकान होना।
कमजोरी महसूस होना।
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डेंगू के लक्षण
सिरदर्द होना।
मांसपेशियों, हड्डियों व जोड़ों में दर्द होना।
उल्टी, जी मिचलाना।
आंखों में दर्द होना।
त्वचा पर लाल चकत्ते होना।
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बचाव
सोते समय मच्छरदानी का प्रयोग करें।
घर में व आसपास जलभराव न होने दें।
जलभराव होने पर सप्ताह में दो बार मिट्टी का तेल या जला हुआ मोबिल ऑयल डालें।
फ्रिज की ट्रे, गमले और कूलर का पानी सप्ताह में दो बार साफ करें।
सुबह-शाम पूरी बाजू और शरीर को ज्यादा ढकने वाले कपड़े पहने।
सफाई का खास ध्यान रखें।
संतुलित भोजन का सेवन करें।
किसी तरह की परेशानी होने पर चिकित्सक की सलाह से उपचार कराएं।
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मच्छरों को पनपने से रोकने और काटने से बचाव के करें इंतजाम
संवाद न्यूज एजेंसी
शामली। बारिश होने पर मच्छर जनित संक्रामक रोगों का खतरा बढ़ रहा है। बारिश से जगह-जगह जलभराव होने से मच्छर तेजी से पनपता है। जिससे मलेरिया, डेंगू समेत कई तरह का बुखार होने का खतरा ज्यादा रहता है। जिले में अब तक मलेरिया बुखार के 37 केस सामने आ चुके हैं, जबकि पिछले साल कुल 57 केस थे। चिकित्सकों का कहना है कि मच्छरों के काटने से बचाव के तरीके अपनाने से ही संक्रामक रोगों से बचा जा सकता है।
जिले में दो दिन से लगातार अच्छी बारिश हुई है। इससे जगह-जगह पर गड्ढों, नाले, व नालियों में जलभराव व गंदगी जमा हो गई है। इससे मच्छर तेजी से पनपता है। इसके परिणामस्वरूप संचारी रोगों के फैलने की आशंका बन जाती है। इस मौसम में मच्छर जनित बीमारियां मलेरिया, डेंगू, चिकनगुनिया, फाइलेरिया, जापानी बुखार आदि होने की आशंका ज्यादा रहती है। वैसे ही जिले में अब तक मलेरिया बुखार के 37 केस सामने आ चुके हैं। जुलाई में नौ केस मलेरिया के मिले हैं। डेंगू के कई संभावित केस सामने आ चुके हैं।
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स्वास्थ्य विभाग का कहना है कि एलाइजा जांच की रिपोर्ट में अभी तक डेंगू की पुष्टि नहीं हो पाई है। वायरल बुखार पहले से चल ही रहा है। अब बारिश होने से वायरल के साथ मच्छर काटने से होने वाले बुखार के मामले बढ़ सकते हैं। इसलिए लोगों को मच्छरों से बचाव के लिए एहतियात बरतने की जरूरत है। मच्छर जनित रोगों से बचाव की परामर्शदाता राजेश कुमारी ने बताया कि मादा एनाफिलिज मच्छर काटने से मलेरिया होता है। बरसात के मौसम में मच्छर को पनपने से रोकने और काटने से बचाव के लिए एहतियात बरतनी चाहिए। उन्होंने बताया कि बुखार होने पर सरकारी अस्पताल में चिकित्सक से उपचार कराएं।
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मलेरिया के लक्षण
सिरदर्द व उल्टी होना।
ठंड के साथ तेज बुखार होना।
ज्यादा थकान होना।
कमजोरी महसूस होना।
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डेंगू के लक्षण
सिरदर्द होना।
मांसपेशियों, हड्डियों व जोड़ों में दर्द होना।
उल्टी, जी मिचलाना।
आंखों में दर्द होना।
त्वचा पर लाल चकत्ते होना।
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बचाव
सोते समय मच्छरदानी का प्रयोग करें।
घर में व आसपास जलभराव न होने दें।
जलभराव होने पर सप्ताह में दो बार मिट्टी का तेल या जला हुआ मोबिल ऑयल डालें।
फ्रिज की ट्रे, गमले और कूलर का पानी सप्ताह में दो बार साफ करें।
सुबह-शाम पूरी बाजू और शरीर को ज्यादा ढकने वाले कपड़े पहने।
सफाई का खास ध्यान रखें।
संतुलित भोजन का सेवन करें।
किसी तरह की परेशानी होने पर चिकित्सक की सलाह से उपचार कराएं।