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Shamli News: शामली में उगा सकेंगे पूसा आरुषि, प्रतीक्षा, पंत प्रभात अमरूद की किस्में
Mon, 06 Jan 2025 11:52 PM IST
मेरठ ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, शामली
संवाद न्यूज एजेंसी, शामली
Updated Mon, 06 Jan 2025 11:52 PM IST
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शामली के कृषि विज्ञान केंद्र में ट्रायल के दौरान लगाई गई अमरूद की विभिन्न प्रजातियों की पौध
शामली। जल्द ही जिले के किसान पूसा आरुषि, प्रतीक्षा, पंत प्रभात अमरूद की किस्मों को आसानी से उगा सकेंगे। कृषि विज्ञान केंद्र पर तीनों किस्मों का ट्रायल सफल रहा है। रिसर्च के दौरान एक अमरूद का वजन 300 से लेकर 400 ग्राम तक का निकला है। खास बात यह है कि इन प्रजातियों में रोगों के लगने की संभावना भी कम है।
जल्द ही किसानों में जागरुकता अभियान चलाकर निशुल्क ट्रेनिंग और तीनों किस्मों की पौध भी उपलब्ध कराई जाएगी। जिसकी तैयारी केंद्र के अधिकारियों ने कर ली है।
शामली जिले में करीब 400 हेक्टेयर में किसान अमरूद की सफेदा, इलाहाबादी सफेदा, एल 49, हिसार सफेदा आदि किस्मों की बुवाई करते हैं।
यहां पैदा होने वाले अमरूद की सप्लाई हरियाणा के अलावा दिल्ली, उत्तराखंड के देहरादून तक की जाती है। शामली के कृषि विज्ञान केंद्र के वैज्ञानिकों ने डेढ़ साल पूर्व पंत नगर और आंध्र प्रदेश, हरियाणा से लाकर करीब दो एकड़ में प्रयोग के तौर पर अमरूद की पूसा आरुषि, प्रतीक्षा, पंत प्रभात की किस्मों को लगाया था।
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कृषि विज्ञान केंद्र प्रभारी डॉ. संदीप चौधरी, वैज्ञानिक डाॅ. ओंकार सिंह का कहना है कि तीनों प्रजातियों का ट्रायल पूरी तरह से सफल रहा है।
खास बात यह है कि ऑर्गेनिक तरीके से तीनों प्रजातियों को उगाया गया और उनमें किसी तरह का रोग भी नहीं लगा है।
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जल्द ही किसानों में जागरुकता अभियान चलाकर निशुल्क ट्रेनिंग और तीनों किस्मों की पौध भी उपलब्ध कराई जाएगी। जिसकी तैयारी केंद्र के अधिकारियों ने कर ली है।
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शामली जिले में करीब 400 हेक्टेयर में किसान अमरूद की सफेदा, इलाहाबादी सफेदा, एल 49, हिसार सफेदा आदि किस्मों की बुवाई करते हैं।
यहां पैदा होने वाले अमरूद की सप्लाई हरियाणा के अलावा दिल्ली, उत्तराखंड के देहरादून तक की जाती है। शामली के कृषि विज्ञान केंद्र के वैज्ञानिकों ने डेढ़ साल पूर्व पंत नगर और आंध्र प्रदेश, हरियाणा से लाकर करीब दो एकड़ में प्रयोग के तौर पर अमरूद की पूसा आरुषि, प्रतीक्षा, पंत प्रभात की किस्मों को लगाया था।
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कृषि विज्ञान केंद्र प्रभारी डॉ. संदीप चौधरी, वैज्ञानिक डाॅ. ओंकार सिंह का कहना है कि तीनों प्रजातियों का ट्रायल पूरी तरह से सफल रहा है।
खास बात यह है कि ऑर्गेनिक तरीके से तीनों प्रजातियों को उगाया गया और उनमें किसी तरह का रोग भी नहीं लगा है।