{"_id":"5efe28698ebc3ea072037004","slug":"project-of-ice-cream-stick-placed-in-front-of-cm-shamli-news-mrt4893230119","type":"story","status":"publish","title_hn":"सीएम के सामने रखा आइसक्रीम स्टिक का प्रोजेक्ट","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
सीएम के सामने रखा आइसक्रीम स्टिक का प्रोजेक्ट
विज्ञापन
लखनऊ में मुख्यमंत्री आदित्यनाथ योगी से मुलाकात करते शामली के उद्यमी अनुज गर्ग।
- फोटो : SHAMLI
शामली। सीमा पर चीन के साथ तनाव के चलते शामली के उद्यमी चीन से अपने कारोबारी रिश्ते तोड़ने की तैयारी में है। उन्होंने चीनी सामन के विकल्प तलाशने शुरू कर दिए हैं। इसी क्रम में शामली के युवा उद्यमी अनुज गर्ग ने चीन से आने वाली आइसक्रीम और अगरबत्ती स्टिक को चीन से मंगाने की बजाय अपनी ही फैक्टरी में तैयार करने का प्लान तैयार किया है। इसके लिए विकल्प भी तलाशे हैं। अमर उजाला ने उद्यमी के प्रोजेक्ट को प्रमुखता से प्रकाशित किया तो प्रशासन का भी इसको शासन तक भेजा। पसंद आने पर सूक्ष्म लघु एवं मध्यम उद्योग विभाग के एडशिनल चीफ सेक्रेटरी ने उद्यमी को लखनऊ बुलाकर उनसे पूरे प्रोजेक्ट की जानकारी ली। उद्यमी ने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से मिलकर उन्हें भी उन्हें पूरा प्रोजेक्ट समझाया और भरोसा दिया कि वह काम शुरू करें स्थानीय लोगों को रोजगार दें। सरकार उनकी पूरी मदद करेगी।
आइसक्रीम स्टिक अपनी फैक्टरी में बनाने का प्लान
शहर के अमर स्प्रिंट इंडस्ट्रीज के डायरेक्टर अनुज गर्ग ने बताया कि देश में बड़ी ब्रांडेड आइसक्रीम कंपनियों द्वारा चीन से तैयार हुई आइसक्रीम स्टिक मंगाई जाती है। इसके अलावा अगरबत्ती में प्रयोग होने वाली बांस की लड़की की स्टिक भी वहां से आती है। व्यापारी का दावा था कि जिस तरह की स्टिक चीन में तैयार होती है उसी तरह की स्टिक हम अपनी फैक्टरी से भी बना सकते हैं। समस्या केवल लकड़ी की है। आइसक्रीम स्टिक में बर्च नामक लकड़ी लगती है। उस लकड़ी से बनी स्टिक में फिनिशिंग अच्छी आती है। हम भी अपने देश में इस तरह की लकड़ी इजाद कर सकते हैैं। जब तक इस पर रिसर्च हो जब तक हम यूरोपियन देशों से ये लकड़ी मंगाकर अपनी फैक्टरी में चीन जैसी स्टिक तैयार कर सकते हैं। उन्होंने यूक्रेन से लकड़ी का ऑर्डर दिया हुआ है।
मशीन और कटर भी अपने देश में
इसी तरह अगरबत्ती की स्टिक बनाने में बांस का प्रयोग होता है। बांस की लकड़ी हमारे देश में है, लेकिन जिस मशीनों से ये कटकर तैयार होती है, इसमें खास तरह के कटर लगे होते हैं। जिससे स्टिक सफाई से कटती है। ये वह मशीनें चीन से आती हैं। उन्होंने हैदराबाद, दिल्ली आदि में कुछ जगह बात की है उम्मीद है कि चीन जैसी मशीनें अपने ही देश में तैयार हो जाएंगी। उसके जैसे कटर भी यहां बन सकते है। इस पर वह काम कर रहे हैं और संभावना है कि जल्द सफलता भी मिलेगी।
विज्ञापन
करीब एक हजार लोगों को मिल सकता है रोजगार
अनुज गर्ग ने दावा किया कि यदि चीन जैसी आइस्क्रीम स्टिक और अगरबत्ती स्टिक चीन से आने की बजाय हम अपनी फैक्ट्री में बनाने लगे तो इसमें करीब एक हजार लोगों को रोजगार मिलेगा क्योंकि स्टिक को तैयार करने, उनकी पैकिंग आदि के लिए काफी संख्या में लेबर की जरुरत होती हे। इस काम को खासतौर से महिलाएं अधिक करती हैं। उधमी ने कहा कि उनके स्तर से भी कई चीजों पर रिसर्च कराया जा रहा है और उम्मी है कि सफलता भी जल्द मिलेगी।
ये दिया सुझाव
- अनुज ने एडशिनल सेक्रेटरी को सुझाव दिया कि बर्च नाम की लकड़ी चीन के अलावा यूरोपियन देशों में है। हम भी इस तरह की लकड़ी को अपने यहां पैदा कर सकते हैं। उनके लिए सरकारी तौर पर रिसर्च करके इस लकड़ी की पैदावार के प्रयास करें तो विदेश से लड़की मंगाने की जरूरत ही नहीं होगी।
- उद्यमी ने सुझाव दिया कि लघु उद्योगों को बाहर विदेश से समुद्री रास्ते से माल मंगाने में काफी खर्च होता है। सुझाव दिया कि बंदरगाह से फैक्टरी तक माल पहुंचने में आने वाली लागत पर सरकार सब्सिडी दे तो उद्यमियों को राहत मिलेगी।
- लकड़ी के सामान बनाने वाली फर्मों के लिए लाइसेंस प्रक्रिया थोड़ी जटिल है। लाइसेंस के लिए काफी परेशानी होती है। इसलिए इस प्रक्रिया को सरल बनाया जाएगा।
उद्यमी द्वारा तैयार किए गए प्लान को अमर उजाला ने ही प्रमुखता से उठाया था। अमर उजाला ने अपने 24 मई के अंक में इसे प्रमुखता से स्थान दिया था। इसके विभागों का ध्यान इस तरफ गया। कुछ दिन बाद प्रदेश के उद्योग मंत्री के समक्ष भी वेबीनार के दौरान अनुज ने अपने प्रोजेक्ट के बारे में बताया था। जिसे मंत्री ने भी खूब सराहा था।
सीएम ने दिया भरोसा
अनुज गर्ग के अनुसार मुख्यमंत्री के समक्ष उन्होंने पूरा प्रोजेक्ट रखा और विस्तार से प्लानिंग बनाई। उनके द्वारा तैयार की जाने वाली आइसक्रीम स्टिक, अगरबत्ती स्टिक आदि के सैंपल भी रखे। सीएम ने उन्हें भरोसा दिया कि यदि चीन जैसा सामान अपने यहां तैयार हो तो स्थानीय लोगों को रोजगार मिलेगा। वह काम शुरू करें सरकार पूरी मदद करेगी। उन्होंने सीएम का धन्यवाद दिया।
विज्ञापन
आइसक्रीम स्टिक अपनी फैक्टरी में बनाने का प्लान
शहर के अमर स्प्रिंट इंडस्ट्रीज के डायरेक्टर अनुज गर्ग ने बताया कि देश में बड़ी ब्रांडेड आइसक्रीम कंपनियों द्वारा चीन से तैयार हुई आइसक्रीम स्टिक मंगाई जाती है। इसके अलावा अगरबत्ती में प्रयोग होने वाली बांस की लड़की की स्टिक भी वहां से आती है। व्यापारी का दावा था कि जिस तरह की स्टिक चीन में तैयार होती है उसी तरह की स्टिक हम अपनी फैक्टरी से भी बना सकते हैं। समस्या केवल लकड़ी की है। आइसक्रीम स्टिक में बर्च नामक लकड़ी लगती है। उस लकड़ी से बनी स्टिक में फिनिशिंग अच्छी आती है। हम भी अपने देश में इस तरह की लकड़ी इजाद कर सकते हैैं। जब तक इस पर रिसर्च हो जब तक हम यूरोपियन देशों से ये लकड़ी मंगाकर अपनी फैक्टरी में चीन जैसी स्टिक तैयार कर सकते हैं। उन्होंने यूक्रेन से लकड़ी का ऑर्डर दिया हुआ है।
विज्ञापन
मशीन और कटर भी अपने देश में
इसी तरह अगरबत्ती की स्टिक बनाने में बांस का प्रयोग होता है। बांस की लकड़ी हमारे देश में है, लेकिन जिस मशीनों से ये कटकर तैयार होती है, इसमें खास तरह के कटर लगे होते हैं। जिससे स्टिक सफाई से कटती है। ये वह मशीनें चीन से आती हैं। उन्होंने हैदराबाद, दिल्ली आदि में कुछ जगह बात की है उम्मीद है कि चीन जैसी मशीनें अपने ही देश में तैयार हो जाएंगी। उसके जैसे कटर भी यहां बन सकते है। इस पर वह काम कर रहे हैं और संभावना है कि जल्द सफलता भी मिलेगी।
विज्ञापन
करीब एक हजार लोगों को मिल सकता है रोजगार
अनुज गर्ग ने दावा किया कि यदि चीन जैसी आइस्क्रीम स्टिक और अगरबत्ती स्टिक चीन से आने की बजाय हम अपनी फैक्ट्री में बनाने लगे तो इसमें करीब एक हजार लोगों को रोजगार मिलेगा क्योंकि स्टिक को तैयार करने, उनकी पैकिंग आदि के लिए काफी संख्या में लेबर की जरुरत होती हे। इस काम को खासतौर से महिलाएं अधिक करती हैं। उधमी ने कहा कि उनके स्तर से भी कई चीजों पर रिसर्च कराया जा रहा है और उम्मी है कि सफलता भी जल्द मिलेगी।
ये दिया सुझाव
- अनुज ने एडशिनल सेक्रेटरी को सुझाव दिया कि बर्च नाम की लकड़ी चीन के अलावा यूरोपियन देशों में है। हम भी इस तरह की लकड़ी को अपने यहां पैदा कर सकते हैं। उनके लिए सरकारी तौर पर रिसर्च करके इस लकड़ी की पैदावार के प्रयास करें तो विदेश से लड़की मंगाने की जरूरत ही नहीं होगी।
- उद्यमी ने सुझाव दिया कि लघु उद्योगों को बाहर विदेश से समुद्री रास्ते से माल मंगाने में काफी खर्च होता है। सुझाव दिया कि बंदरगाह से फैक्टरी तक माल पहुंचने में आने वाली लागत पर सरकार सब्सिडी दे तो उद्यमियों को राहत मिलेगी।
- लकड़ी के सामान बनाने वाली फर्मों के लिए लाइसेंस प्रक्रिया थोड़ी जटिल है। लाइसेंस के लिए काफी परेशानी होती है। इसलिए इस प्रक्रिया को सरल बनाया जाएगा।
उद्यमी द्वारा तैयार किए गए प्लान को अमर उजाला ने ही प्रमुखता से उठाया था। अमर उजाला ने अपने 24 मई के अंक में इसे प्रमुखता से स्थान दिया था। इसके विभागों का ध्यान इस तरफ गया। कुछ दिन बाद प्रदेश के उद्योग मंत्री के समक्ष भी वेबीनार के दौरान अनुज ने अपने प्रोजेक्ट के बारे में बताया था। जिसे मंत्री ने भी खूब सराहा था।
सीएम ने दिया भरोसा
अनुज गर्ग के अनुसार मुख्यमंत्री के समक्ष उन्होंने पूरा प्रोजेक्ट रखा और विस्तार से प्लानिंग बनाई। उनके द्वारा तैयार की जाने वाली आइसक्रीम स्टिक, अगरबत्ती स्टिक आदि के सैंपल भी रखे। सीएम ने उन्हें भरोसा दिया कि यदि चीन जैसा सामान अपने यहां तैयार हो तो स्थानीय लोगों को रोजगार मिलेगा। वह काम शुरू करें सरकार पूरी मदद करेगी। उन्होंने सीएम का धन्यवाद दिया।

शामली : अनुज गर्ग द्वारा मुख्यमंत्री के समक्ष सैंपल के तौर पर दिखाई गई आइसक्रीम और अगरबत्ती स्टिक- फोटो : SHAMLI