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सात साल में नहीं हुआ समस्याओं का समाधान

Thu, 19 Aug 2021 10:44 PM IST
Meerut Bureau मेरठ ब्यूरो
Updated Thu, 19 Aug 2021 10:44 PM IST
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Problems not solved in seven years
शामली। जिले में शामिल होने के सात साल बाद 10 गांवों के ग्रामीणों को गन्ना विभाग, चकबंदी, परिवहन, पशु स्वास्थ्य, डाक विभाग की समस्याओं के समाधान के लिए तीन जिलों में भटकना पड़ता है। इन गांवों के ग्रामीणों को अलग-अलग कार्यों के लिए मुजफ्फरनगर, बागपत और शामली जिलों के अफसरों के चक्कर काटने पड़ते हैं।
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एक जमाने में कांधला ब्लाक के नाला, भारसी, भनेड़ा, कनियान, डांगरौल, भभीसा, सुन्ना, ख्यासपुर, हुरमुजपुर और सल्फा गांव बुढ़ाना तहसील में आते थे। भाजपा-बसपा गठबंधन की सरकार में मुजफ्फरनगर जिले में शामली को नवसृजित तहसील बना दिया गया। बुढ़ाना तहसील से हटाकर कांधला ब्लाक के इन दस गांवों को शामली तहसील में शामिल कर दिया गया था। वर्ष 2002 में इन गांवों को ग्रामीणों के अनुरोध पर फिर से बुढ़ाना तहसील में शामिल कर दिया गया। 27 सितंबर 2011 को शामली अलग जिला बना। इन दस गांवों को शामली में शामिल करने की मांग उठी।
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ग्रामीणों की मांग पर सात अक्तूबर 2014 को इन दस गांवों को बुढ़ाना तहसील से हटाकर शामली तहसील में शामिल करने की अधिसूचना जारी कर दी गई थी। शामली में शामिल होने के बाद अब ग्रामीणों को समस्याओं के समाधान के बागपत, मुजफ्फरनगर और शामली जिले में भटकना पड़ता है। सात साल बाद भी इन दस गांवों के ग्रामीणों की समस्याओं के समाधान नहीं हुआ है।
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- शामली के दस गांवों के ग्रामीणों को गन्ना भुगतान के लिए बागपत जिले के रमाला चीनी मिल जाना पड़ता है। चकबंदी, पशुओं के स्वास्थ्य, परिवहन और डाक विभाग आदि की समस्याओं के लिए समाधान के लिए मुजफ्फरनगर जिला मुख्यालय पर ग्रामीण आते हैं, जबकि राजस्व विभाग के कार्य शामली में होते हैं। 13 अगस्त को कलक्ट्रेट में डीएम से मिलकर इन दस गांवों की मूलभूत समस्याओं के संबंध में अवगत कराया था। - सुनील पंवार, संयोजक, ग्राम संघर्ष समिति, शामली

- इन दस गांव के ग्रामीण पिछले सप्ताह उनसे मिले थे। संबंधित विभागों के अफसरों को गांवों के विकास के लिए मैपिंग तैयार करने के निर्देश दिए हैं। संबंधित विभागों के प्रस्ताव आने के बाद ग्रामीणों की समस्या समाधान के लिए शासन को प्रस्ताव भेजे जाएंगे। - जसजीत कौर डीएम
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