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परिषदीय विद्यालयों को गोद लेंगे निजी और उच्च शिक्षण संस्थान
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परिषदीय विद्यालयों को गोद लेंगे निजी विद्यालय और उच्च शिक्षण संस्थान
शामली। राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 के तहत विद्यालयों में एकीकृत शिक्षा को बढ़ावा देने के लिए शासन ने नई व्यवस्था लागू करने का निर्णय लिया है। इस व्यवस्था के तहत पांच से आठ किलोमीटर के दायरे में निजी, मान्यता प्राप्त, अशासकीय विद्यालय, उच्च शिक्षण संस्थान और विश्वविद्यालयों के साथ परिषदीय प्राथमिक व उच्च प्राथमिक विद्यालयों का युग्मन किया जाएगा यानि निजी विद्यालय व उच्च शिक्षण संस्थान परिषदीय विद्यालयों को गोद लेकर शैक्षणिक गतिविधियों की साझेदारी करेंगे। इस नई व्यवस्था को लागू करने के लिए कार्य योजना तैयार की जा रही है।
नई व्यवस्था का उद्देश्य परिषदीय विद्यालयों को अतिरिक्त संसाधन उपलब्ध कराना, शिक्षकों से बेहतर सहयोग, समन्वय के साथ दोनों विद्यालयों के बीच सकारात्मक एवं सहयोगात्मक वातावरण बनाना है। यह साझेदारी दो विद्यालयों के बीच मेंटरशिप प्रोग्राम की तरह होगी। शासन से जारी दिशा निर्देशों के अनुुसार युग्मित दोनों विद्यालयों के प्रधानाचार्य, प्रधानाध्यापक और शिक्षक विचार विमर्श कर रणनीति निर्धारित करेंगे और शैक्षिक सत्र के लिए गतिविधियों की स्पष्ट कार्य योजना तैयार कर संचालित की जाएगी। शासन का मानना है कि इस व्यवस्था के लागू होने से विद्यालयों में गुणवत्तापरक शिक्षा को बढ़ावा मिलेगा और नए प्रयोग लागू होने से बेहतर ढंग से सुधार हो सकेगा।
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ये मिलेगा लाभ
- दोनों विद्यालय के बच्चे एक दूसरे के यहां जाकर पुस्तकालय, प्रयोगशाला, खेल के मैदान, बुनियादी ढांचे और डिजिटल सुविधाओं का उपयोग कर सकेंगे। कला, विज्ञान प्रदर्शनी, टीएलएम मेला, सांस्कृतिक व खेल गतिविधियों व प्रशिक्षण कार्यक्रमों का संयुक्त आयोजन व भ्रमण करने का मौका मिलेगा। इसके साथ ही शैक्षिक आदान प्रदान की जानकारी अभिभावकों को भी दी जाएगी।
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निजी संस्थानों की ये रहेगी भूमिका
- परिषदीय विद्यालयों का सहयोगात्मक पर्यवेक्षण।
- शिक्षकों एवं बच्चों के लिए टीएलएम मेला व विज्ञान, गणित किट उपलब्ध कराना।
- विज्ञान संबंधी प्रोजेक्ट, प्रदर्शनी, टीएलएम का सृजन और ग्रेड अनुरूप शैक्षणिक वीडियो का निर्माण।
- पुस्तकालय हेतु ग्रेड के अनुसार पुस्तकें, खेल संसाधन, स्मार्ट क्लासेज आदि।
- बच्चों के एक्सपोजर विजिट, विद्यालय भ्रमण हेतु आवश्यक संसाधन।
- सांस्कृतिक कार्यक्रमों, खेलकूद गतिविधियों, शिक्षण प्रशिक्षण आदि के लिए जरूरी संसाधन उपलब्ध कराना व भौतिक सुविधाओं में सहयोग करना।
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जिला स्तर पर बनेगी अनुश्रवण समिति
विद्यालयों के युग्मन योजना के तहत होने वाली गतिविधियों के क्रियान्वयन के लिए जिला स्तर पर डीएम की अध्यक्षता में समिति गठित होगी। समिति में सीडीओ उपाध्यक्ष और सदस्य के रूप में डायट प्राचार्य, जिला विद्यालय निरीक्षक, जिला सूचना अधिकारी, जिला युवा कल्याण अधिकारी व डीएम द्वारा नामित निजी विद्यालयों के प्रबंध तंत्र, प्रतिष्ठित शिक्षण संस्थानों के तीन प्रतिनिधि और जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी सदस्य सचिव रहेंगे।
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कोट
राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 के तहत दो विद्यालयों के युग्मन की योजना संबंधी शासन से जारी दिशा-निर्देश प्राप्त हो गए हैं। जिले में इस योजना के क्रियान्वयन के लिए कार्य योजना तैयार की जा रही है। जल्द ही इस व्यवस्था को लागू किया जाएगा।
- अमित कुमार, जिला समन्वयक सामुदायिक सहभागिता बेसिक शिक्षा।
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शामली। राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 के तहत विद्यालयों में एकीकृत शिक्षा को बढ़ावा देने के लिए शासन ने नई व्यवस्था लागू करने का निर्णय लिया है। इस व्यवस्था के तहत पांच से आठ किलोमीटर के दायरे में निजी, मान्यता प्राप्त, अशासकीय विद्यालय, उच्च शिक्षण संस्थान और विश्वविद्यालयों के साथ परिषदीय प्राथमिक व उच्च प्राथमिक विद्यालयों का युग्मन किया जाएगा यानि निजी विद्यालय व उच्च शिक्षण संस्थान परिषदीय विद्यालयों को गोद लेकर शैक्षणिक गतिविधियों की साझेदारी करेंगे। इस नई व्यवस्था को लागू करने के लिए कार्य योजना तैयार की जा रही है।
नई व्यवस्था का उद्देश्य परिषदीय विद्यालयों को अतिरिक्त संसाधन उपलब्ध कराना, शिक्षकों से बेहतर सहयोग, समन्वय के साथ दोनों विद्यालयों के बीच सकारात्मक एवं सहयोगात्मक वातावरण बनाना है। यह साझेदारी दो विद्यालयों के बीच मेंटरशिप प्रोग्राम की तरह होगी। शासन से जारी दिशा निर्देशों के अनुुसार युग्मित दोनों विद्यालयों के प्रधानाचार्य, प्रधानाध्यापक और शिक्षक विचार विमर्श कर रणनीति निर्धारित करेंगे और शैक्षिक सत्र के लिए गतिविधियों की स्पष्ट कार्य योजना तैयार कर संचालित की जाएगी। शासन का मानना है कि इस व्यवस्था के लागू होने से विद्यालयों में गुणवत्तापरक शिक्षा को बढ़ावा मिलेगा और नए प्रयोग लागू होने से बेहतर ढंग से सुधार हो सकेगा।
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ये मिलेगा लाभ
- दोनों विद्यालय के बच्चे एक दूसरे के यहां जाकर पुस्तकालय, प्रयोगशाला, खेल के मैदान, बुनियादी ढांचे और डिजिटल सुविधाओं का उपयोग कर सकेंगे। कला, विज्ञान प्रदर्शनी, टीएलएम मेला, सांस्कृतिक व खेल गतिविधियों व प्रशिक्षण कार्यक्रमों का संयुक्त आयोजन व भ्रमण करने का मौका मिलेगा। इसके साथ ही शैक्षिक आदान प्रदान की जानकारी अभिभावकों को भी दी जाएगी।
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निजी संस्थानों की ये रहेगी भूमिका
- परिषदीय विद्यालयों का सहयोगात्मक पर्यवेक्षण।
- शिक्षकों एवं बच्चों के लिए टीएलएम मेला व विज्ञान, गणित किट उपलब्ध कराना।
- विज्ञान संबंधी प्रोजेक्ट, प्रदर्शनी, टीएलएम का सृजन और ग्रेड अनुरूप शैक्षणिक वीडियो का निर्माण।
- पुस्तकालय हेतु ग्रेड के अनुसार पुस्तकें, खेल संसाधन, स्मार्ट क्लासेज आदि।
- बच्चों के एक्सपोजर विजिट, विद्यालय भ्रमण हेतु आवश्यक संसाधन।
- सांस्कृतिक कार्यक्रमों, खेलकूद गतिविधियों, शिक्षण प्रशिक्षण आदि के लिए जरूरी संसाधन उपलब्ध कराना व भौतिक सुविधाओं में सहयोग करना।
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जिला स्तर पर बनेगी अनुश्रवण समिति
विद्यालयों के युग्मन योजना के तहत होने वाली गतिविधियों के क्रियान्वयन के लिए जिला स्तर पर डीएम की अध्यक्षता में समिति गठित होगी। समिति में सीडीओ उपाध्यक्ष और सदस्य के रूप में डायट प्राचार्य, जिला विद्यालय निरीक्षक, जिला सूचना अधिकारी, जिला युवा कल्याण अधिकारी व डीएम द्वारा नामित निजी विद्यालयों के प्रबंध तंत्र, प्रतिष्ठित शिक्षण संस्थानों के तीन प्रतिनिधि और जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी सदस्य सचिव रहेंगे।
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कोट
राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 के तहत दो विद्यालयों के युग्मन की योजना संबंधी शासन से जारी दिशा-निर्देश प्राप्त हो गए हैं। जिले में इस योजना के क्रियान्वयन के लिए कार्य योजना तैयार की जा रही है। जल्द ही इस व्यवस्था को लागू किया जाएगा।
- अमित कुमार, जिला समन्वयक सामुदायिक सहभागिता बेसिक शिक्षा।