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Shamli News: शायर रज्मी को दुनिया में मिली शान, अब परिवार को बचाना है मकान

Mon, 01 Jun 2026 12:13 AM IST
मेरठ ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, शामली
संवाद न्यूज एजेंसी, शामली Updated Mon, 01 Jun 2026 12:13 AM IST
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Poet Razmi has achieved global recognition, now his family must save their house.
नई दिल्ली में प्रधानमंत्री आवास पर पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह से मुलाकात करते शायर मुजफ्फर - फोटो : 1
कैराना (शामली)। परिंदे भी नहीं रहते पराये आशियानों में, हमने उम्र गुजार दी किराये के मकानों में...मशहूर शायर मुजफ्फर रज्मी का यह शेर आज उनके परिवार की जिंदगी की हकीकत बन गया है। देश-विदेश में अपनी शायरी का लोहा मनवाने वाले रज्मी के इंतकाल के करीब 14 साल बाद उनका परिवार उसी किराये के मकान को बचाने की जद्दोजहद में लगा है, जहां उन्होंने जिंदगी का बड़ा हिस्सा गुजारा।
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5 जून 1935 को जन्मे मुजफ्फर रज्मी नगर पालिका में बड़े बाबू के पद पर कार्यरत रहे। वर्ष 1972 में तत्कालीन चेयरमैन बाबू बशीर अहमद ने उन्हें नगर पालिका का एक मकान 62.50 रुपये मासिक किराये पर आवंटित किया था। बाद में उनका प्रमोशन हुआ और वह सहारनपुर में ऑफिस सुपरिटेंडेंट बने। इसके बाद रुड़की नगर पालिका से प्रथम श्रेणी अधिकारी के पद से सेवानिवृत्त हुए।
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19 सितंबर 2012 को उनके इंतकाल के बाद से नगर पालिका उक्त मकान को वापस लेने के प्रयास में जुटी हुई है। रज्मी के बड़े पुत्र जावेद इकबाल, उनके भाई परवेज जमाल और नावेद कमाल अपने परिवारों के साथ आज भी उसी जर्जर मकान में रह रहे हैं।
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जावेद इकबाल बताते हैं कि उनके पिता के निधन के बाद नगर पालिका ने मकान का किराया लेना बंद कर दिया था। इसके बाद मकान खाली कराने की कार्रवाई शुरू कर दी गई। परिवार का कहना है कि उनकी आर्थिक स्थिति ऐसी नहीं है कि वे कहीं और मकान लेकर रह सकें।
नावेद कमाल के अनुसार वर्ष 2019, 2020, 2023 और फिर 5 फरवरी 2026 को प्रधानमंत्री कार्यालय में आवेदन देकर मदद मांगी गई थी। प्रधानमंत्री कार्यालय से पत्र आने के बाद अधिकारियों ने उन्हें बुलाया भी, लेकिन समस्या का समाधान नहीं हो सका। बाद में तत्कालीन जिलाधिकारी से भी गुहार लगाई गई, जिन्होंने मामले में संज्ञान लेने के निर्देश दिए थे।
रज्मी के निधन के बाद नगर पालिका ने मकान को अवैध कब्जा बताते हुए एसडीएम कोर्ट में वाद दायर किया था। हालांकि एक समय उन्हें किरायेदार माना गया, लेकिन मामला अभी भी न्यायालय में विचाराधीन है। अब इस मामले में 5 जून को एसडीएम कोर्ट, कैराना में सुनवाई होनी है। परिवार को डर है कि यदि मकान हाथ से निकल गया तो उनके सामने रहने का गंभीर संकट खड़ा हो जाएगा। संवाद

कई प्रधानमंत्रियों ने संसद में सुनाया रज्मी का शेर
मुजफ्फर रज्मी की शायरी देश की संसद तक गूंज चुकी है। उनके बेटे जावेद इकबाल बताते हैं कि रज्मी का मशहूर शेर ये जब्र भी देखा है तारीख की नजरों ने, लम्हों ने खता की थी सदियों ने सजा पाई... पूर्व प्रधानमंत्री एचडी देवगौड़ा, पीवी नरसिम्हा राव और डॉ. मनमोहन सिंह के अलावा प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी संसद में इस शेर का उल्लेख किया था।


कई देशों में बिखेरी शायरी की खुशबू
जावेद इकबाल के अनुसार मुजफ्फर रज्मी को शायरी के लिए पाकिस्तान, बहरीन और सऊदी अरब सहित कई देशों में आमंत्रित किया गया था। उनके इंतकाल से दो दिन बाद उन्हें अमेरिका में एक कार्यक्रम में शामिल होना था। इसके लिए उनका वीजा और पासपोर्ट भी तैयार हो चुका था, लेकिन नियति को कुछ और मंजूर था।

नई दिल्ली में प्रधानमंत्री आवास पर पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह से मुलाकात करते शायर मुजफ्फर

नई दिल्ली में प्रधानमंत्री आवास पर पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह से मुलाकात करते शायर मुजफ्फर - फोटो : 1

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