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Shamli News: शहरी बनने का रचा खेल, सत्यापन में खुल गया फर्जीवाड़े का मेल
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शामली। प्रधानमंत्री शहरी आवास योजना का लाभ लेने के लिए जिले में बड़े पैमाने पर फर्जीवाड़ा सामने आया है। योजना के तहत मकान पाने की चाह में ग्रामीण क्षेत्रों के लोगों ने खुद को नगर निकायों का निवासी दर्शा दिया। किसी ने फर्जी आधार कार्ड बनवाया तो किसी ने आवास प्रमाणपत्र तैयार करा लिया।
कई आवेदकों ने शहर में रहने वाले रिश्तेदारों के मकानों और प्लॉटों की फोटो लगाकर आवेदन कर दिए। विभागीय सत्यापन में ऐसे मामलों की पोल खुलने के बाद 2,205 आवेदनों को अपात्र घोषित कर निरस्त कर दिया गया है। पीएम आवास योजना के तहत पात्रों को कुल 2.50 लाख रुपये दिए जाते हैं।
जिले के 10 नगर निकायों में आवास योजना के लिए अब तक 16,082 आवेदन प्राप्त हुए हैं। इनमें 3,319 आवेदक पात्र पाए गए हैं, जबकि 2,205 आवेदन जांच में अपात्र मिले। सबसे बड़ी बात यह है कि अभी भी 10,558 आवेदनों का सत्यापन लंबित है, जिससे अपात्र आवेदकों की संख्या और बढ़ सकती है।
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अधिकारियों के अनुसार कई लोगों ने योजना की शर्तों को दरकिनार कर लाभ लेने का प्रयास किया। जांच में सामने आया कि ग्रामीण क्षेत्रों के निवासी लोगों ने अपने रिश्तेदारों के शहरी मकानों की फोटो लगाकर आवेदन किए। कुछ ने नगर निकाय क्षेत्र का फर्जी पता दर्शाया, जबकि कई मामलों में आधार कार्ड और आवास संबंधी दस्तावेज भी संदिग्ध पाए गए।
सत्यापन में ऐसे खुला फर्जीवाड़ा
साजिद ने खुद को कांधला नगर निकाय क्षेत्र का निवासी बताते हुए आवेदन किया। जांच में पता चला कि वह ग्रामीण क्षेत्र का रहने वाला है। आवेदन के साथ लगाए गए दस्तावेज और मकान की फोटो भी दूसरे मकान की पाई गई।
थानाभवन क्षेत्र की मुस्कान ने फर्जी आधार कार्ड और आवास प्रमाण पत्र के आधार पर आवेदन किया। विभागीय जांच में दोनों दस्तावेज असत्य पाए गए, जिसके बाद आवेदन निरस्त कर दिया गया।
इसी तरह शामली क्षेत्र में काजीवाड़ा के महेंद्र ने रिश्तेदार के मकान और प्लॉट की फोटो लगाकर आवेदन किया। भौतिक सत्यापन में पता चला कि उसका वास्तविक निवास नगर निकाय क्षेत्र में नहीं है। इसके बाद उसका आवेदन भी खारिज कर दिया गया।
अधिकारियों का कहना है कि ये केवल कुछ उदाहरण हैं। जांच के दौरान ऐसे अनेक मामले सामने आए हैं, जिनमें पात्रता छिपाकर या गलत जानकारी देकर योजना का लाभ लेने की कोशिश की गई।
कैराना में सबसे अधिक अपात्र आवेदन
जिले में सबसे अधिक 752 अपात्र आवेदन कैराना में पाए गए हैं। इसके बाद कांधला में 430 और थानाभवन में 265 आवेदन अपात्र मिले हैं। सबसे कम नौ अपात्र आवेदन गढ़ीपुख्ता में पाए गए।
योजना का लाभ लेने के लिए ये हैं शर्तें
आवेदक नगर पालिका या नगर पंचायत क्षेत्र का निवासी होना चाहिए।
उसके नाम नगर निकाय क्षेत्र में प्लॉट या कच्चा मकान होना चाहिए।
पति-पत्नी में से केवल एक व्यक्ति ही योजना का लाभ ले सकता है।
आवास स्वीकृत होने पर लाभार्थी को तीन किस्तों में करीब ढाई लाख रुपये की सहायता राशि प्रदान की जाती है।
बोले अधिकारी
योजना में किसी भी प्रकार की अनियमितता बर्दाश्त नहीं की जाएगी। सभी आवेदनों का भौतिक सत्यापन कराया जा रहा है। फर्जी दस्तावेज या गलत जानकारी देने वाले आवेदकों के आवेदन निरस्त किए जा रहे हैं। सत्यापन प्रक्रिया पूरी होने के बाद पात्र लाभार्थियों की अंतिम सूची जारी की जाएगी।
-हामिद हुसैन, परियोजना अधिकारी डूडा
पूर्व में 2166 मिले थे अपात्र
पूर्व में भी डूडा विभाग के अधिकारियों ने मई माह में भी सत्यापन कराया था। इस दौरान 2166 अपात्र मिले थे, जिनके आवेदन निरस्त कर दिए गए थे।
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कई आवेदकों ने शहर में रहने वाले रिश्तेदारों के मकानों और प्लॉटों की फोटो लगाकर आवेदन कर दिए। विभागीय सत्यापन में ऐसे मामलों की पोल खुलने के बाद 2,205 आवेदनों को अपात्र घोषित कर निरस्त कर दिया गया है। पीएम आवास योजना के तहत पात्रों को कुल 2.50 लाख रुपये दिए जाते हैं।
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जिले के 10 नगर निकायों में आवास योजना के लिए अब तक 16,082 आवेदन प्राप्त हुए हैं। इनमें 3,319 आवेदक पात्र पाए गए हैं, जबकि 2,205 आवेदन जांच में अपात्र मिले। सबसे बड़ी बात यह है कि अभी भी 10,558 आवेदनों का सत्यापन लंबित है, जिससे अपात्र आवेदकों की संख्या और बढ़ सकती है।
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अधिकारियों के अनुसार कई लोगों ने योजना की शर्तों को दरकिनार कर लाभ लेने का प्रयास किया। जांच में सामने आया कि ग्रामीण क्षेत्रों के निवासी लोगों ने अपने रिश्तेदारों के शहरी मकानों की फोटो लगाकर आवेदन किए। कुछ ने नगर निकाय क्षेत्र का फर्जी पता दर्शाया, जबकि कई मामलों में आधार कार्ड और आवास संबंधी दस्तावेज भी संदिग्ध पाए गए।
सत्यापन में ऐसे खुला फर्जीवाड़ा
साजिद ने खुद को कांधला नगर निकाय क्षेत्र का निवासी बताते हुए आवेदन किया। जांच में पता चला कि वह ग्रामीण क्षेत्र का रहने वाला है। आवेदन के साथ लगाए गए दस्तावेज और मकान की फोटो भी दूसरे मकान की पाई गई।
थानाभवन क्षेत्र की मुस्कान ने फर्जी आधार कार्ड और आवास प्रमाण पत्र के आधार पर आवेदन किया। विभागीय जांच में दोनों दस्तावेज असत्य पाए गए, जिसके बाद आवेदन निरस्त कर दिया गया।
इसी तरह शामली क्षेत्र में काजीवाड़ा के महेंद्र ने रिश्तेदार के मकान और प्लॉट की फोटो लगाकर आवेदन किया। भौतिक सत्यापन में पता चला कि उसका वास्तविक निवास नगर निकाय क्षेत्र में नहीं है। इसके बाद उसका आवेदन भी खारिज कर दिया गया।
अधिकारियों का कहना है कि ये केवल कुछ उदाहरण हैं। जांच के दौरान ऐसे अनेक मामले सामने आए हैं, जिनमें पात्रता छिपाकर या गलत जानकारी देकर योजना का लाभ लेने की कोशिश की गई।
कैराना में सबसे अधिक अपात्र आवेदन
जिले में सबसे अधिक 752 अपात्र आवेदन कैराना में पाए गए हैं। इसके बाद कांधला में 430 और थानाभवन में 265 आवेदन अपात्र मिले हैं। सबसे कम नौ अपात्र आवेदन गढ़ीपुख्ता में पाए गए।
योजना का लाभ लेने के लिए ये हैं शर्तें
आवेदक नगर पालिका या नगर पंचायत क्षेत्र का निवासी होना चाहिए।
उसके नाम नगर निकाय क्षेत्र में प्लॉट या कच्चा मकान होना चाहिए।
पति-पत्नी में से केवल एक व्यक्ति ही योजना का लाभ ले सकता है।
आवास स्वीकृत होने पर लाभार्थी को तीन किस्तों में करीब ढाई लाख रुपये की सहायता राशि प्रदान की जाती है।
बोले अधिकारी
योजना में किसी भी प्रकार की अनियमितता बर्दाश्त नहीं की जाएगी। सभी आवेदनों का भौतिक सत्यापन कराया जा रहा है। फर्जी दस्तावेज या गलत जानकारी देने वाले आवेदकों के आवेदन निरस्त किए जा रहे हैं। सत्यापन प्रक्रिया पूरी होने के बाद पात्र लाभार्थियों की अंतिम सूची जारी की जाएगी।
-हामिद हुसैन, परियोजना अधिकारी डूडा
पूर्व में 2166 मिले थे अपात्र
पूर्व में भी डूडा विभाग के अधिकारियों ने मई माह में भी सत्यापन कराया था। इस दौरान 2166 अपात्र मिले थे, जिनके आवेदन निरस्त कर दिए गए थे।

अंबाला कैंट का ऑलवेदर स्वीमिंग पूल: संवाद