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गन्ने के साथ तरबूज की फसल लगाएं, आमदमी बढाएं
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शामली, थानाभवन। ताइवान की कंपनी के अधिकारियों ने यारपुर गांव में मल्चिंग शीड पद्धति से मास्टर प्रदीप कुमार की गन्ने के साथ बोई गई तरबूज की फसल का निरीक्षण किया। कंपनी के करनाल ब्रांच अधिकारी वीरेंद्र खोकर व क्षेत्रीय इंचार्ज दिनेश शर्मा ने बताया कि किसान गन्ने के साथ तरबूज की फसल लगाकर अपनी आय बढ़ा सकते हैं।
उन्होंने बताया कि ताइवान की कंपनी नो यू सीड का हेड ऑफिस पुणे में स्थित है जिसके ब्रांच करनाल में है। मल्चिंग शीड पद्धति के अंतर्गत एक बीघा भूमि पर गन्ने के साथ अगर किसान तरबूज की फसल लगाता है तो उसका लगभग 15000 रुपये खर्च होता है, जबकि अगर बिना गन्ने की फसल के तरबूज पैदा करते हैं तो 10000 रुपये में यह फसल तैयार हो जाती है।
जिससे प्रति एक बीघा में 40 से 50 क्विंटल तरबूज की पैदावार होती है, जो आमतौर पर बाजार में 15 से 20 रुपये किलो तक बिकता है। दिसंबर से जनवरी माह में तरबूज की पौध तैयार की जाती है, जिसे जनवरी के अंत या फरवरी में खेत में लगा दी जाती है। जिसके बाद मात्र 65 दिनों में तरबूज की फसल तैयार हो जाती है। इस दौरान इंदर सिंह, शैलेंद्र कुमार नरेंद्र मास्टर विश्व प्रताप आदि किसान मौजूद रहे।
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उन्होंने बताया कि ताइवान की कंपनी नो यू सीड का हेड ऑफिस पुणे में स्थित है जिसके ब्रांच करनाल में है। मल्चिंग शीड पद्धति के अंतर्गत एक बीघा भूमि पर गन्ने के साथ अगर किसान तरबूज की फसल लगाता है तो उसका लगभग 15000 रुपये खर्च होता है, जबकि अगर बिना गन्ने की फसल के तरबूज पैदा करते हैं तो 10000 रुपये में यह फसल तैयार हो जाती है।
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जिससे प्रति एक बीघा में 40 से 50 क्विंटल तरबूज की पैदावार होती है, जो आमतौर पर बाजार में 15 से 20 रुपये किलो तक बिकता है। दिसंबर से जनवरी माह में तरबूज की पौध तैयार की जाती है, जिसे जनवरी के अंत या फरवरी में खेत में लगा दी जाती है। जिसके बाद मात्र 65 दिनों में तरबूज की फसल तैयार हो जाती है। इस दौरान इंदर सिंह, शैलेंद्र कुमार नरेंद्र मास्टर विश्व प्रताप आदि किसान मौजूद रहे।
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